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लखनऊ । खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, चौक, लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “Humanity, Health and Well-being in Contemporary Society: An Interdisciplinary Perspectives” का समापन समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
प्रातः 11 बजे से संगोष्ठी का समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (IITR), लखनऊ के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. वी.पी. शर्मा तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के जैव रसायन विभाग के प्रो. सुधीर मेहरोत्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. अंशु केडिया के स्वागत उद्बोधन से हुआ। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मान किया गया।

समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में स्वास्थ्य के मुद्दे पर अपने विचार रखे उन्होंने बताया की आधुनिकता की दौड़ में हम प्रकृति से दूर होते जा रहे है हम प्रकृति के साथ नहीं चल रहे है जोकि बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है ।हम सभी को स्वस्थ रहने के लिए स्वस्थ व सकारात्मक जीवन शैली को अपनाना होगा जिसमे सात्विक भोजन , प्रतिदिन व्यायाम तथा व्यसनों से दूर रहना सम्मिलित है| उप मुख्य मंत्री जी ने बालिकाओ को उनके उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य के साथ मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व दिया जाना आवश्यक है।

डॉ. वी.पी. शर्मा ने अपने समापन संबोधन में संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा अंतर्विषयक शोध एवं अकादमिक संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने जीवन से जुड़े मुद्दों की बात की उन्होंने बताया की हमे विकास तो करना है लेकिन विनाश से दूर रहना है ।विकास के लिए आवश्यक ह कि हम ज़्यादा से ज़्यादा अनुसंधान कार्य करे ताकि आने वाली पीढ़ी को उज्जवल भविष्य दे सके ।
प्रो. सुधीर मेहरोत्रा ने जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के विषय में बात की। उन्होंने बताया कि बीमारियों से बचने का सबसे सरल उपाय है जागरूकता। स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर हम बीमारियों से बच सकते है।
संगोष्ठी के द्वितीय दिवस का शुभारंभ ऑनलाइन पूर्ण सत्र से हुआ, जिसमें लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर के प्रो. यतेन्द्र कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके उपरांत ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। ऑफलाइन तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के प्रो. दुर्गेश श्रीवास्तव ने की तथा सह-अध्यक्ष के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग के डॉ. रमेश त्रिपाठी उपस्थित रहे।प्रथम ऑनलाइन सत्र की अध्यक्षता डॉ कृष्णकांत, बी एच यू, एवम सह अध्यक्षता डा. गुरदीप सिंह, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने की।
द्वितीय ऑनलाइन तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. मीनाक्षी दीक्षित ,कृष्णा देवी कॉलेज एवम सह अध्यक्षता डॉ मुकेश कुमार मिश्रा, कालीचरण पीजी कॉलेज ने की ।

इस अवसर पर संगोष्ठी की दो दिवसीय गतिविधियों एवं शैक्षणिक उपलब्धियों की विस्तृत रिपोर्ट डॉ. सत्यम तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों, शोधपत्र प्रस्तुतियों तथा देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े प्रतिभागियों की सहभागिता का उल्लेख किया।
समारोह में उत्कृष्ट शोधपत्र एवं पोस्टर प्रस्तुति के लिए प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही प्रतिभागियों ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। इसके पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजेता दीक्षित ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पारुल सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने मानवता, स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण जैसे समकालीन विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को एक साझा अकादमिक मंच प्रदान किया। कार्यक्रम की सफलता में महाविद्यालय की प्राचार्या, आयोजन समिति, समस्त शिशिकाओं , कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
