लखनऊ | लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (LUACTA ) के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडेय एवं महामंत्री प्रोफेसर अंशु केडिया ने उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर CAS प्रोन्नत की समयबद्ध व्यवस्था का निदेशालय स्तर पर पालन न होने के संबंध में नाराजगी जताई है | शिक्षक नेताओं ने हो रही देरी की उच्च शिक्षा सचिव को विस्तार से जानकारी दी है | भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों / पुस्तकालय अध्यक्षों की करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जानी है|
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस आदेश का उद्देश्य प्रोन्नति को शीघ्र पारदर्शी और समय सीमा में ग्रहण करना था | इस शासनादेश का ऑटो फॉरवर्ड महाविद्यालय प्रबंधन समिति तक नियमित रूप से काम करता है, लेकिन निदेशालय उच्च शिक्षा की लाग इन में पहुंचते ही आवेदन होल्ड हो जाता है | शिक्षक नेताओं ने नाराजगी जताई है कि अनुदानित महाविद्यालय का 30 दिन के नियम का पालन रुक जाता है| उन्होंने कहा है कि आदेश में अविलंब को सहमति मानकर फाइल आगे बढ़ने का सिद्धांत इसलिए रखा था कि किसी स्तर पर प्रक्रिया को रोक ना जा सके लेकिन बिना किसी कारण के निदेशालय स्तर पर होल्ड करना तरह – तरह की आशंका उत्पन्न करता है |
पत्र में कहा गया है कि इस विलम्ब से शिक्षक का वेतनमान और अगला आकस्मिक स्तर रुक जाता है | शिक्षक नेताओं ने प्रमुख सचिव शिक्षा से इस मामले में विस्तार से जानकारी लेने और शिक्षकों को न्याय देने की बात कही है| साथ ही निदेशालय स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया को लंबित एवं सुस्त बनाए रखने वालों के खिलाफ कार्यवाही की भी मांग की है|

शिक्षक नेताओं ने प्रमुख सचिव से कहा है कि वे कृपया शासनादेश संख्या-1411/सत्तर-1-2024, दिनांक 16 अक्टूबर 2024 का अवलोकन करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों/पुस्तकालय अध्यक्षों की कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सी.ए.एस.) प्रोन्नति समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जानी है। इस आदेश का उद्देश्य प्रोन्नति को शीघ्र, पारदर्शी और समय सीमा में क्रियान्वित करना था।
नेताओं के अनुसार उक्त शासनादेश में अनुदानित महाविद्यालय ऑनलाइन प्रोन्नति प्रक्रिया के अनुसार शासन ने निम्न तथ्य और बाध्यताएँ लिखी हैं:
(1) समस्त प्रक्रिया आवेदक के लॉग-इन में नियत समय तक दृश्यमान रहेगी। प्रत्येक स्तर पर निर्धारित समय में निर्णय लिया जाएगा। समयांतरित निर्णय न होने पर आवेदन स्वतः अगले स्तर पर अग्रसारित (Auto forward) हो जाएगा। प्रोन्नति की समस्त प्रक्रिया अधिकतम 90 दिन में पूर्ण होगी।
(2) प्रक्रिया-तालिका में आईक्यूएसी समन्वयक को 20 दिन में अग्रसारित करना होगा, प्राचार्य तथा स्क्रीनिंग/चयन समिति को 20 दिन में, सचिव, प्रबंध समिति स्तर पर 20 दिन में, प्रबंध समिति द्वारा अग्रसारित निदेशक उच्च शिक्षा लॉग-इन में 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है।
संघ के अनुभव में आया है कि शासनादेश का ऑटो-फॉरवर्ड महाविद्यालय और प्रबंध समिति तक नियमित रूप से काम करता है, लेकिन निदेशक, उच्च शिक्षा की लॉग-इन में पहुँचते ही आवेदन होल्ड हो जाता है। अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों का 30 दिन के नियम का पालन रुक जाता है।
नेताओं के अनुसार आदेश ने विलम्ब को सहमति मानकर फ़ाइल स्वतः आगे बढ़ाने का सिद्धांत इसलिए रखा था कि कोई स्तर प्रक्रिया को रोक न सके और पारदर्शिता बनी रहे। बिना किसी कारण के निदेशालय पर होल्ड मनमानी तथा अनियमितता की आशंका उत्पन्न करता है। पात्र शिक्षक का वेतनमान और अगला अकादमिक स्तर रुक जाता है। अतः संगठन का अनुरोध है कि शासनादेश में उल्लिखित व्यवस्था का कड़ाई से समयबद्ध पालन हो। निदेशक स्तर पर भी ऑटो-फॉरवर्ड बिना अपवाद लागू हो। स्वीकृति पर डिजिटल प्रोन्नति-पत्र अपलोड हो, एवं वेतन निर्धारण के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था लागू हो।

