लखनऊ . ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केन्द्र, लखनऊ (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा तथा वास्तुकला एवं योजना संकाय, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ के तत्वाधान में टैगोर मार्ग स्थित प्रांगण में 22 सितम्बर को “सेवा ही संस्कृति” के तहत “रंग बिरंगे रंगों से नया भारत” विषय पर आधारित एक दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवा कलाकारों की सृजनात्मक ऊर्जा को एक ऐसा सकारात्मक मंच प्रदान करना था, जहाँ वे अपनी तूलिका और रंगों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सेवा भाव और भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को कागज पर जीवंत कर सकें। लखनऊ शहर के विभिन्न प्रतिष्ठित और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से आए युवा विद्यार्थियों में इस कार्यशाला को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला।

इस वृहद आयोजन में कला जगत के कई प्रमुख संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही, जिसके तहत कला एवं शिल्प महाविद्यालय लखनऊ, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, गोएल इंस्टीट्यूट, उ०प्र० राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ एवं वास्तुकला एवं योजना संकाय, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ से 200 से अधिक प्रतिभाशाली कला छात्र-छात्राओं ने पूरी ऊर्जा और तन्मयता के साथ हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में कला और शिक्षा क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में वास्तुकला एवं योजना संकाय की विभागाध्यक्ष रितु गुलाटी, कला एवं शिल्प महाविद्यालय लखनऊ के प्राचार्य श्री आलोक कुमार, वरिष्ठ कलाकार श्रीमती किरण सिंह राठौर, श्री विनीत पाण्डेय, अजीत सिंह और ललित कला अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी जी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।

सभी 200 से अधिक छात्र-छात्रों ने अपने रंगों के अद्भुत संयोजन से “सेवा ही संस्कृति” की थीम पर नए भारत’ की परिकल्पना को कागज़ पर बनाया। किसी ने अपनी पेंटिंग में पर्यावरण और विकास के संतुलन को दर्शाया, तो किसी ने सामाजिक समरसता, सेवा भाव और तकनीकी रूप से आगे बढ़ते भारत की तस्वीर को रंगों के माध्यम से बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों द्वारा बनाई गई उत्कृष्ट कलाकृतियों में से सर्वश्रेष्ठ 5 कलाकृतियों को चुना गया | इन पांच श्रेष्ठ पुरस्कृत कलाकृतियों में से 2 कला एवं शिल्प महाविद्यालय लखनऊ के छात्र दीपक वर्मा एवं सुदीप्ता घाना की थीं, 1 पुरस्कार डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के छात्र भूमिका बहुगुणा को प्राप्त हुई , तथा 1 पुरस्कार गोएल इंस्टीट्यूट के कला छात्र आरजू यादव एवं 1 पुरस्कार हेमा चौहान, वाराणसी की कृति को प्रदान किया गया। इस प्रकार विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों ने पुरस्कार जीतकर अपने संस्थानों का नाम रोशन किया और सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। आयोजन के अंत में सभी प्रतिभागी कलाकारों को ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी जी के द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

प्रसिद्ध कला समीक्षक भूपेन्द्र अस्थाना जी ने कार्यक्रम का संचालन एवं छात्रों की सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि, “आज के युवा कलाकार अपनी तुलिका और रंगों के माध्यम से सामाजिक सरोकार और नए भारत की सच्ची तस्वीर को पेश कर रहे हैं। ऐसे आयोजन न केवल कला को बढ़ावा देते हैं, बल्कि छात्रों की प्रतिभा को निखारने का एक बेहतरीन मंच भी प्रदान करते हैं।”
कार्यक्रम के इस महत्वपूर्ण अवसर पर ललित कला अकादेमी के क्षेत्रीय सचिव डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी जी ने उपस्थित सभी छात्रों, शिक्षकों और कलाप्रेमियों को संबोधित करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि “कला केवल रंगों और आकृतियों का मेल नहीं है, बल्कि यह मानव के अंतर्मन की वह सच्ची अभिव्यक्ति है जो समाज और संस्कृति को गहराई से आपस में जोड़ती है। उन्होंने आगे कहा कि जब युवा कलाकार अपनी तूलिका से नए भारत की परिकल्पना को उकेरते हैं, तो देश की सांस्कृतिक विरासत और सेवा की भावना और अधिक सशक्त होती है।” इस अवसर पर केन्द्र के अधिकारी, कर्मचारी एवं कलाकार उपस्थित रहे |
