- Census 2027 में OBC की जातिवार गणना और राज्यवार जातियों की सूची हो. -शिव कुमार भारती
- जनगणना मे ओबीसी वर्ग की जाति-जनगणना मे हो रहे खेल को रोका जाये -जस्टिस बी.डी.नकवी
- जनगणना 2027 के प्रश्न संख्या 10 में संवैधानिक वर्ग एससी एसटी के साथ ओबीसी को भी शामिल करें।– प्रो: राजेंद्र कुमार वर्मा
- संवैधानिक कटेगरी SC, ST एवं ओबीसी मे राज्यवार जातियों का ड्रापडाउन लिस्ट भी हो.- डा. अनूप पटेल
लखनऊ. पेरियार ई.वी. रामासामी की 147वीं जयंती के अवसर पर लखनऊ में “देश मांगे जाति-जनगणना” विषय पर प्रेस-वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने जाति गणना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। अभी भी बड़ी आबादी को उनका हक नहीं मिल पा रहा है, सबके पास पर्याप्त शिक्षा और स्वास्थ्य संसाधान उपलब्ध नहीं है। जाति जनगणना से ही देश में सभी वर्गों और जाति के लोगों की तरक्की संभव है। वक्ताओं ने कहाकि देश की तरक्की तभी संभव है जब सबको आगे बढ़ने के अवसर मिलें और यह जाति जनगणना से ही संभव होगा।
प्रेस-वार्ता के आयोजक व कार्यक्रम के संचालक ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अनूप पटेल ने बताया कि आगामी जनगणना-2027 में जातिवार आंकड़ों को व्यापक, स्पष्ट और पारदर्शी रूप से दर्ज किए जाने की आवश्यकता है। डा. अनूप पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ने पिछले वर्ष जातिगत-जनगणना करवाने का फैसला किया था। जबकि जाति-जनगणना की मांग पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के समय से चली आ रही है। वर्ष 2011 मे डा. मनमोहन सिंह की सरकार के समय सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना हुयी थी, लेकिन उसके आंकड़े अभी तक पब्लिश नहीं हुये है। इस बार सही मायनो मे जाति-जनगणना होनी चाहिये।
प्रेस-वार्ता को सम्बोधित करते हुये प्रो. राजेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि प्रमुख मांग SC, ST और OBC की राज्यवार जातियों की सूची उपलब्ध कराने को लेकर है। राज्यों में जातियों के नाम और वर्गीकरण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए जनगणना प्रक्रिया में राज्यवार सामाजिक संरचना को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जातिवार आंकड़ों की उपलब्धता से सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार, प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित नीतियों को अधिक तथ्य-आधारित बनाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने जनगणना 2027 के प्रश्न संख्या 10 में संवैधानिक वर्ग एससी एसटी के साथ ओबीसी शामिल करने की मांग की.
प्रो. राजेंद्र वर्मा ने कहा कि प्रमुख उद्देश्य है कि समाज में सबको शिक्षा, रोजगार, भोजन के अवसर मिलें। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है, 80 % संसाधनों पर कुछ लोगों का कब्जा है। यदि जाति जनगणना होती है तो इससे पूरी बीमारी डायग्नोस हो जाएगी। इस देश के बजट निर्धारण में केंद्रीय सचिवालय में केवल 3 ओबीसी हैं। जो बजट आवंटन करते हैं, पता चला कि 10 परसेंट लोगों को 100 परसेंट जा रहा है, और 90 परसेंट लोगों को 10 परसेंट भी नहीं मिल रहा है।
ये भागीदारी की लड़ाई है, जाति जनगणना से ये स्पष्ट हो जाएगा, कि किसको कितनी भागीदारी मिलनी चाहिए। कुछ लोगों का आरोप है कि आरक्षण का लाभ केवल कुछ लोगों को मिल रहा है, लेकिन इसका कोई डेटा नहीं है, जातीय जनगणना होगी तो ये भी साफ हो जाएगा। जरूरतमंद लोगों को उनका हक मिलेगा।
सबको मिले उनका हक
इस मौके पर जस्टिस बीडी नकवी ने कहा कि देश के सिस्टम में सभी लोगों को कारोबार में, नौकरियों में बराबर हिस्सा मिला या नहीं ये जातीय जनगणना से ही पता चलेगा। संसाधनों पर सबकी भागीदारी होगी, जो लोग पीछे रह गए हैं उनकी तरक्की होगी, तभी तो एक मजबूत देश बनेगा। यह सब जातीय जनगणना से ही संभव हो सकेगा। इसका विरोध वो लोग कर रहे हैं जो गरीबों को हिस्सा नहीं देना चाहते। इस देश में 2 परसेंट लोगों का कब्जा 40 परसेंट संसाधनों पर है।
अर्जक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार भारती ने कहा कि देश में जन्म ही जाति के साथ होता है तो जनगणना को को क्यों इग्नोर कर रहे हैं जबकि जाति ही इस देश में पहचान है। सीधी सी बात है, वो शोषण करना चाहते हैं, इसलिए जाति जनगणना नहीं करना चाहते। मंडल कमीशन की सभी सिफारिशें आज तक लागू नहीं की गई। आरक्षण का लाभ मिला या नहीं यह जाति जनगणना से ही साफ होगा। जो पीछे रह गए उनको मुख्यधारा में आने का अवसर मिलेगा।
अर्जक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार भारती मे कहा कि भारत सरकार ने Census 2027 में जातियों की गणना को शामिल करने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार जाति की गणना जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में की गयी है और इस चरण की प्रश्नावली अधिसूचित हो गयी है। अतः जनगणना-2027 की प्रश्नावली में OBC वर्ग की जातियों को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की व्यवस्था हो, ताकि देश की सामाजिक संरचना और विभिन्न सामाजिक समूहों की वास्तविक जनसंख्या का विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध हो सके। जस्टिस बी डी नकवी ने कहा कि केवल व्यापक सामाजिक श्रेणियों के आंकड़े पर्याप्त नहीं होंगे।
एक्टिविस्ट मुरली मनोहर ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना का प्रशासनिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह देश की सामाजिक और आर्थिक वास्तविकताओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए जाति संबंधी आंकड़ों की सटीकता, पारदर्शिता, एकरूपता और सार्वजनिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। सामाजिक चेतना फाउंडेशन के महेंद्र मंडल ने कहा कि आगामी दिनों मे सही ढंग से जाति-जनगणना सुनिश्चित कराने हेतु देशव्यापी आंदोलन होगा।
इस मौके पर आशु मौर्य,समीरा चौधरी, इंजीनियर नीलेश पाल,सुजीत कुमार, संतोष धरकार, डॉ राजेश कुमार, सुनील कुमार, डॉ मोहम्मद अकबर, शेष पाल यादव, डॉ अशोक रंजन वर्मा, दिनेश यादव, डॉ. आकाश आदि लोग मौजूद रहे।
