लखनऊ . प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं परिकल्पना से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 76वें जन्म दिवस के अवसर पर जन भवन परिसर में निर्मित ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना का आज लोकार्पण राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करकमलों से संयुक्त रूप से बटन दबाकर किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वय केशव प्रसाद मौर्य एवं ब्रजेश पाठक तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
लोकार्पण पश्चात सभी गणमान्यों द्वारा गंगा सागर नमो नमः का भ्रमण किया गया। तत्पश्चात गणमान्यों द्वारा शिव डमरू फाउंटेन के समीप निर्मित गंगासागर में गंगाजल अर्पित किया गया तथा विधिवत गंगा आरती की गई गयी। गंगा आरती के पश्चात आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जन भवन के विद्यार्थियों एवं राजकीय बाल गृह (बालिका), सिंधी खेड़ा की बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। बच्चों ने ‘गंगा धराय शिव गंगा धराय’, ‘कर लो-कर लो चारों धाम’ तथा ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ गीतों का सामूहिक गायन कर वातावरण को भक्तिमय एवं भावपूर्ण बना दिया।
विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने समारोह में परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं दूरदर्शी परिकल्पना से साकार यह परियोजना जन भवन परिसर को एक विशिष्ट सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक पहचान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि आज का अवसर इसलिए भी विशेष है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर इस परियोजना का लोकार्पण किया जा रहा है।

डॉ. बोबडे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत एवं पर्यावरणीय सरोकारों को नई प्राथमिकता मिली है। ‘नमामि गंगे’ के माध्यम से मां गंगा की निर्मलता, अविरलता एवं संरक्षण को व्यापक राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप मिला है। ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना इसी भावना की सुंदर सांस्कृतिक अभिव्यक्ति है।
उन्होंने बताया कि 6 करोड़ 41 लाख रुपये की कुल लागत से विकसित यह परियोजना दो प्रमुख हिस्सों ‘गंगोत्री से गंगासागर’ तथा ‘गंगासागर फाउंटेन’ में है। गंगोत्री से गंगासागर परियोजना में लोक निर्माण विभाग (सिविल) द्वारा 4 करोड़ 19 लाख रुपये, लोक निर्माण विभाग (विद्युत) द्वारा 31 लाख रुपये तथा उद्यान विभाग द्वारा 78 लाख रुपये का कार्य कराया गया है। वहीं गंगासागर फाउंटेन का कार्य 1 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ है।
परियोजना में कैलाश धाम के प्रतीक स्वरूप भगवान शिव की प्रतिमा, प्रतीकात्मक मानसरोवर तथा चार धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की मार्बल प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं। इसके आगे प्रयागराज का संगम, काशी के विश्वप्रसिद्ध घाट और अंत में गंगासागर की यात्रा को प्रतीकात्मक स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार परियोजना के माध्यम से गंगोत्री से गंगासागर तक की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा को एक ही स्थान पर साकार किया गया है।

डॉ. बोबडे ने बताया कि परियोजना की लंबाई 110 मीटर तथा कैलाश से गंगासागर तक अधिकतम ऊंचाई 6 मीटर है। लगभग एक वर्ष में पूर्ण हुई इस परियोजना में करीब 1,000 टन पत्थरों (बोल्डर्स) का उपयोग किया गया है। परियोजना का डिजाइन एवं क्रियान्वयन अहमदाबाद स्थित कम्पनी ‘लैंडस्केप इंडिया’ द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह संस्था पूरी तरह महिलाओं द्वारा स्थापित एवं संचालित है, जिसका प्रतिनिधित्व सुश्री अभिजा दलाल एवं सुश्री पारिता सखिया कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि परियोजना की प्रमुख विशेषता जल, प्रकाश, ध्वनि, कला एवं आधुनिक तकनीक का सुंदर संयोजन है। ‘शिव डमरू म्यूजिकल फाउंटेन’ इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें जलधाराओं, एलईडी प्रकाश, ध्वनि एवं प्रोग्रामेबल तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसमें ‘शिव तांडव’, ‘मनुष्य तू बड़ा महान है’ तथा ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की’ जैसी रचनाओं का समावेश किया गया है, जो इसे केवल दृश्य आकर्षण तक सीमित न रखकर आध्यात्मिकता, मानवीय मूल्यों एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि से जोड़ता है। परियोजना में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित क्षेत्र के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें 17 प्रकार के वृक्षों के कुल 40 पौधे तथा लगभग 100 विभिन्न प्रकार की झाड़ियों के 6,000 पौधे लगाए गए हैं। यह हरित क्षेत्र परियोजना की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जैव-विविधता के प्रति जागरूकता का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि लगभग एक लाख लीटर क्षमता के भूमिगत जल टैंक के माध्यम से जलधारा तंत्र में पानी के पुनर्चक्रण की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार परियोजना में सौंदर्य एवं आधुनिक तकनीक के साथ जल संरक्षण को भी जोड़ा गया है। डॉ. बोबडे ने कहा कि परियोजना में देश के विभिन्न क्षेत्रों की शिल्प-कला एवं विशेषज्ञता का समावेश किया गया है। अंबाजी के सोमपुरा कारीगरों ने मंदिर स्थापत्य से संबंधित नक्काशी एवं निर्माण कार्य में योगदान दिया है। उन्होंने परियोजना को साकार करने में योगदान देने वाले डिजाइनरों, शिल्पकारों, अभियंताओं, तकनीकी विशेषज्ञों एवं निर्माण कार्य से जुड़े सभी कार्मिकों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की कार्यशैली की विशेषता है कि वे किसी भी पहल को केवल उसके तत्काल परिणाम तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उसके व्यापक सामाजिक एवं भावी प्रभाव पर भी ध्यान देती हैं। जन भवन परिसर में विकसित विभिन्न पहलें इसी सोच की परिचायक हैं। जन भवन अब केवल प्रशासनिक गतिविधियों का परिसर नहीं रह गया है, बल्कि संस्कृति, पर्यावरण, कला एवं जन-जागरूकता से जुड़े अनुभवों का भी सजीव केंद्र बन रहा है। ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना इस परिवर्तन को भव्य एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि ‘गंगासागर नमो नमः’ परियोजना निर्धारित समय-सीमा से लगभग एक माह पूर्व पूर्ण हुई है। व्यापक स्वरूप की इस परियोजना का समय से पूर्व पूर्ण होना उच्च स्तर की योजना, प्रभावी अनुश्रवण, विभागीय समन्वय एवं टीम की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डॉ. बोबडे ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह परियोजना जन भवन आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल कुछ देखने का अवसर ही नहीं देगी, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, पर्यावरण संरक्षण एवं मां गंगा के महत्व को समझने, अनुभव करने और उससे सीखने का अवसर भी प्रदान करेगी। मां गंगा निरंतर प्रवाह, लोककल्याण एवं समर्पण का संदेश देती हैं। उन्होंने सभी से मां गंगा की निर्मलता एवं अविरलता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने तथा पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का आह्वान किया।
‘गंगोत्री से गंगासागर नमो नमः’ परियोजना के लोकार्पण से पूर्व राजकीय बाल गृह (बालिका), सिंधी खेड़ा की 14 बालिकाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री द्वय श्री केशव प्रसाद मौर्य एवं श्री ब्रजेश पाठक तथा उपस्थित अधिकारीगण को राखी बांधी। बालिकाओं ने आत्मीयता एवं स्नेह के साथ सभी को रक्षासूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र संबंध का संदेश दिया।

