मलिहाबाद. मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तेज हो गई हैं और केंद्र बिंदु में हैं मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र की विधायक जय देवी कौशल. काकोरी कस्बे में स्थित शीतला माता मंदिर में उन्हें पूजा न करने देने के उनके बयान के बाद मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र की राजनीति दूसरे मोड़ पर पहुंच गई है.
विधायक जय देवी कौशल ने स्वयं सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि मंदिर में उनके साथ दुराव हुआ और उन्हें पूजा तक नहीं करने दी गई जबकि इस मंदिर के पुनरुद्धार के लिए उन्होंने सरकारी प्रयास किया और भारी रकम इस मंदिर को दिलाने में सफलता प्राप्त की. इसके बाद ही मंदिर में निर्माण कार्य शुरू हुआ लेकिन जब पूजा करने का अवसर आया तो उनके उपस्थित होने के बावजूद आयोजकों ने उनसे पूजा नहीं कराई . हालांकि मंदिर समिति के आयोजकों ने विधायक के आरोपों से इनकार किया लेकिन इसके बाद भी अभी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है. विधायक जय देवी कौशल और उनके पति कौशल किशोर इस मुद्दे पर लगातार अपनी बातें रख रहे हैं. उनकी बातों में राजनीति भी है, सामाजिक एकता भी है और अपने समर्थकों के लिए एकजुटता दिखाने के लिए प्रेरित करने वाली बातें भी हैं .
यह सिलसिला कहां जाकर खत्म होगा यह कह पाना मुश्किल है. अभी कौशल किशोर सार्वजनिक रूप से बातें कह कर अपना पक्ष स्पष्ट कर रहे हैं. यहां यह बताना भी उल्लेखनीय है कौशल किशोर ( Kaushal Kishore ex mp ) वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और मोहनलालगंज से सांसद रहे हैं. मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे हैं. उनकी पत्नी वर्तमान में मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से विधायक है . वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यह मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आर के चौधरी से चुनाव हार गए थे . उनकी बातों में अपने संसदीय चुनाव की हार के कारणों का भी कहीं-कहीं उल्लेख है और वह प्रत्यक्ष रूप से अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं को भी निशाना बना रहे हैं. हालांकि इस पूरे प्रकरण में भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेता किसी भी प्रकार की खुलकर बात करने से कतरा रहे . संभवत: इस विवाद को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए जरूरी हो. लेकिन कितने दिन तक चुप्पी साधने वाला दौर चलेगा ? यह भी कहना मुश्किल है? फिलहाल अभी राजनीति का दौर जारी है. कौशल किशोर के समर्थक सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं . उनके समर्थनमें तरह पोस्ट कर रहे हैं, लेकिन मामला उतना आसान नहीं है जितना वर्तमान में दिखाई पड़ रहा है, बल्कि यह काफी अंदर तक है और गहराइयों तक है उसे समझना और देखना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा और यह तभी संभव है जब खुलकर स्पष्ट रूप से दोनों पक्ष बताएं कि उनका दर्द क्या है ? उनकी समस्याएं क्या है ? और उसे समस्याओं का निराकरण करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी पक्ष रखा जाना चाहिए कि पार्टी कौशल किशोर के विचारों से कहां तक और कितना सहमत है और अगर सहमत है तो इन विचारों की निराकरण और सुलझाने के लिए भारतीय जनता पार्टी किस प्रकार की प्रक्रिया अपना रही है ? यह महत्वपूर्ण तब और हो जाता है जब विभिन्न राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति बना रहे हैं और मलिहाबाद क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी इस विवाद में उलझी हुई है .
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