लखनऊ. उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में विभिन्न गुटों में बंटे शिक्षक नेता आपसी तालमेल और सामंजस्य के अभाव में शिक्षक समस्याओं के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं. शिक्षक हितों में प्रभावी भूमिका बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षक संघ ( एकजुट) ने एक बार फिर पहल की है . वर्तमान में शिक्षक कई तरह की समस्याओं से परेशान हैं .
पहल यह है कि विभिन्न धडों बंटे शिक्षक संघ एक राय, एक मत होकर एक संगठन बनाएं और अपने-अपने संगठनों को इस नवगठित संगठन में सम्मिलित कर दें . माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश प्रवक्ता श्रवण कुमार कुशवाहा ने सोशल मीडिया पोस्ट में सेवानिवृत शिक्षकों को संगठनों से अलग हटकर नए और सेवारत शिक्षकों को काम करने का अवसर देने की प्राथमिकता बताई है.

शिक्षक संघ ( एकजुट) के प्रदेश प्रवक्ता श्रवण कुमार कुशवाहा की सोशल पोस्ट को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों में हलचल मच गई है . CampusSsamachar.com से विशेष बातचीत में श्रवण कुमार कुशवाहा ने कहा कि उनका संगठन शिक्षकों के हित में है. इसलिए विभिन्न गुटों में बंटे शिक्षक नेताओं को एक मंच पर लाने की लाने के अभियान में जुटा है और सोशल मीडिया में डाली गई पोस्ट उसी का हिस्सा है . उन्होंने कहा कि बड़े दुख की बात है कि आज भी विभिन्न शिक्षक संगठनों में लगभग 80 फ़ीसदी पदों पर सेवानिवृत शिक्षकों का कब्जा है, जबकि समय-समय पर जारी शासनादेशों से इन सेवानिवृत शिक्षकों पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ता है. ऐसे में जो दर्द सेवारत शिक्षकों को है , वह समस्या इन सेवानिवृत शिक्षकों को नहीं है . ऐसे में महत्वपूर्ण हो जाता है कि एक मजबूत संगठन बनाया जाए और जो शिक्षकों के हितों की लड़ाई लड़े .
श्रवण कुमार कुशवाहा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वे चाहते हैं कि नए संगठन के चुनाव पूरी तरीके से स्वच्छ और पारदर्शी हो ताकि रिटायर शिक्षकों को उसमें गुंजाइश न रहे. हालांकि श्रवण कुमार कुशवाहा के सोशल मीडिया पोस्ट पर अन्य संगठनों ने अभी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, लेकिन इतना जरूर है कि श्रवण कुमार कुशवाहा की सोशल मीडिया पोस्ट से विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी में हलचल जरूर मच गई है. नए सत्र शुरू होने के बाद से ही विभिन्न शिक्षक संगठन शिक्षक समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन आंदोलन कर रहे हैं . इसी साल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव होने के कारण भी संगठनों में सक्रियता बढ़ी हुई है. ऐसे में एक मंच पर एक संगठन बनाकर आने की अपील करना महत्वपूर्ण हो जाता है. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में शिक्षक संगठन अपने-अपने धड़े अपनी -अपनी नीतियों के अनुसार चलते रहेंगे या फिर आपसी राजनीति भूल कर एक मंच पर एक सशक्त शिक्षक संगठन बनाकर शिक्षकों की लड़ाई जारी रखेंगे.
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