- 10 से अधिक देशों एवं भारत के कोने-कोने से जुड़े 200 से अधिक शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ।
- प्रतिभागियों और मुख्य अतिथियों ने आयोजन प्रबंधन को बताया अभूतपूर्व और अतुलनीय
- जनजातीय विकास एवं सतत विकास पर प्रस्तुत किए गए 200 से अधिक शोध
जांजगीर-चांपा , चैतन्य साइंस एंड आट्र्स ऑटोनॉमस कॉलेज पामगढ़, जांजगीर-चांपा (Chaitanya Science and Arts College, Pamgarh ) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आज 09 अगस्त 2026 को गूगल मीट के माध्यम से सफल समापन हुआ। यह सम्मेलन जनजातीय विकास में बहुविषयक अनुसंधान चुनौतियाँ : अवसर और सतत विकास विषय पर आयोजित किया गया था।
इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ इकोनॉमिक एसोसिएशन जनजातीय शोध पीठ और सोशल साइंस एंड मैनेजमेंट वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इसमें भारत और विश्व भर से जुड़े 200 से अधिक शोधकर्ता सम्मेलन में भारत के लगभग सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ दुनिया के 10 से अधिक प्रमुख विदेशी देशों (जैसे जापान, अफ्रीका, रोमानिया, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नाइजीरिया आदि) के शिक्षाविद , नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। दो दिनों के इस अकादमिक महाकुंभ में 200 से अधिक उच्च स्तरीय शोध प्रस्तुत किए गए, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय मानकों वाले जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।
वैश्विक मंच पर आयोजन प्रबंधन की हुई प्रशंसा
सम्मेलन के समापन अवसर पर जुड़े देश-विदेश के वक्ताओं, मुख्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने इस बहुविषयक आयोजन की तकनीकी सटीकता, अनुशासन और प्रबंधन की खुलकर तारीफ की। कई अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों ने प्रतिक्रिया देते हुए चैतन्य कॉलेज पामगढ़ द्वारा किए गए इस वैश्विक आयोजन को अभूतपूर्व और अतुलनीय करार दिया और कहा कि ग्रामीण अंचल से इस प्रकार का अंतर्राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना उच्च शिक्षा में एक मिसाल है।
आयोजन समिति और मुख्य मार्गदर्शक
सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने में कॉलेज की आयोजन समिति का विशेष योगदान रहा. इस आयोजन के संरक्षक वीरेंद्र तिवारी (अध्यक्ष गवर्निंग बॉडी , चैतन्य कॉलेज पामगढ़), सह संरक्षक डॉ् वीके गुप्ता प्राचार्य चैतन्य साइंस एंड आट्र्स कॉलेज पामगढ़), सम्मेलन संयोजक डाक्टर अमित चंद्रा (प्राचार्य बीएड विभाग) , सम्मेलन सचिव डाक्टर नरेंद्रनाथ गुरिया विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग रहे .
प्रमुख अतिथि, प्रख्यात वक्ता एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ
सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर विनय चौहान ( कुलपति शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़) डॉ् रूपेंद्र कवी ( उप सचिव राज्यपाल छत्तीसगढ़ शासन) अभिषेक रंजन कुमार (नवाचार अधिकारी, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार) डॉ् तरुण धर दीवान (कुलसचिव रायगढ़)ए तथा डाक्टर जितेन्द्र कुमार सिंह (कुलसचिव झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में प्रख्यात वक्ता के रूप में डाक्टर पीएल चंद्राकर (पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर) एवं प्रो वीपी सती (मिजोरम सेंट्रल यूनिवर्सिटीए मिजोरम) ने अपने महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किए। साथ ही प्रोफेसर गरिमा तिवारी गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर ने जनजातीय विकास एवं पर्यावरण सरंक्षण विषय पर अपने अमूल्य व दूरदर्शी सुझाव साझा किए।
अंतर्राष्ट्रीय वक्ताओं में डाक्टर वजीरा गुनासेना (श्रीलंका) फाधिल्ला शेल्सा (इंडोनेशिया), डॉ प्रिंस डैन मबाची (नाइजीरिया), डॉ् निकोलेटा वासिलकोव्स्की (रोमानिया), मस्वेनेंग मोकोलवेन एरिक (दक्षिण अफ्रीका) एवं इंजीनियर ओलुरुंतोयिन सेफियू ताइवो (नाइजीरिया) ने अपने विचार रखे।
तकनीकी सत्र एवं कुशल संचालन
विभिन्न शोध सत्रों में अध्यक्ष के रूप में डाक्टर चंद्रमाउली इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक एवं डाक्टर दीपक (सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) तथा उपाध्यक्ष के रूप में डाक्टर रतन मजूमदार (पोर्ट ब्लेयर) एवं डाक्टर शीला श्रीधर (रायपुर) उपस्थित रहे।
सत्रों का कुशल संचालन एवं मॉडरेटर की जिम्मेदारी डाक्टर शैली ओझा, आकाश कश्यप (सहायक प्राध्यापक, वानिकी एवं वन्यजीव विभाग) तथा सुश्री भावना रत्नाकर ने बखूबी निभाई। कार्यक्रम के अंत में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों एवं प्रस्तुतियों के लिए अवार्ड प्रदान किए गए। अंत में आयोजन सचिव डॉ नरेंद्रनाथ गुरिया ने सम्मेलन को मिली अपार सफलता के लिए समस्त राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों और आयोजन टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।






