- राज्यपाल ने समाज में बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर सामाजिक समस्याओं पर भी शोध करना चाहिए।
लखनऊ ,01 अगस्त, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में 31 जुलाई को लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ का 69वाँ दीक्षोत्सव सम्पन्न हुआ। दीक्षोत्सव में कुल 1,25,285 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 57,166 छात्र तथा 68,119 छात्राएँ शामिल हैं। समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए 111 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 204 पदक प्रदान किए गए। पदक प्राप्त करने वालों में 81 छात्राएँ एवं 30 छात्र शामिल रहे।
69th Convocation Ceremony : University of Lucknow : राज्यपाल जी के दिशानिर्देशों के अनुपालन में लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए ग्रामों में लखनऊ विश्वविद्यालय के 69वें दीक्षोत्सव के अंतर्गत मेरी माँ विषय पर चित्रकला, कहानी कथन काव्य और भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। इनमें 256 बच्चों ने प्रतिभाग किया। राज्यपाल जी ने सभी विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने जल एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर प्रेरणादायी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। राज्यपाल जी ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत संदेश की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों ने बहुत अच्छा संदेश दिया है।
राज्यपाल जी ने बताया कि आज लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ के दीक्षोत्सव में जनपद रायबरेली के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 300 आंगनबाड़ी किट तथा जनपद लखनऊ के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 200 आंगनबाड़ी किट प्रदान की गईं। इसके साथ ही जनपद रायबरेली में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 300 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया।
उन्होंने बताया कि आज ही डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के दीक्षोत्सव में जनपद बदायूं के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 300 आंगनबाड़ी किट प्रदान की गईं तथा जनपद बदायूं में तैनात पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 300 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण किया गया।
उन्होंने कहा कि अब तक पूरे प्रदेश 70,793 आंगनबाड़ी किट वितरित की जा चुकी हैं, यह जनकल्याणकारी अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। राज्यपाल जी ने बताया कि उन्होंने पिछले छह वर्षों से जनभागीदारी के माध्यम से बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत कराई है, जिसके अंतर्गत अब तक 5,87,459 टीकाकरण संपन्न हो चुके हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब यह वैक्सीन निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि वे व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर पात्र बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कुलाधिपति जी ने कहा कि सभी उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर पर अपलोड किया गया है, ताकि विद्यार्थी आवश्यकता पड़ने पर उन्हें वहीं से डाउनलोड कर सकें। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि किसी भी विद्यार्थी को उपाधि अथवा अंकपत्र की हार्ड कॉपी प्रदान न की जाए।
दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा विश्वविद्यालय परिवार को भी समारोह के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं और कहा कि विद्यार्थी सफलता की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें तथा माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करते हुए उनके आदर्शों पर चलें। अपने परिवार, समाज, विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन करना ही शिक्षा की वास्तविक सार्थकता है। यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, गुरुजनों, परिवारजनों और मित्रों की भी है। किसी भी सफलता के पीछे परिवार का त्याग, मार्गदर्शन, सहयोग और विश्वास महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राज्यपाल जी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। यह समाज में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त संकेत है तथा बेटियों की प्रतिभा, परिश्रम, कर्तव्यनिष्ठा और जिम्मेदारियों के उत्कृष्ट निर्वहन का प्रेरणादायी प्रमाण है। उन्हांेने कहा कि पिछले सात वर्षों से विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणामों का अवलोकन करने पर यह देखा गया है कि छात्राओं का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है, जबकि छात्र अपेक्षाकृत पीछे रह रहे हैं। उन्होंने इसे गंभीर अध्ययन का विषय बताते हुए विश्वविद्यालय को इस संबंध में शोध कराने का निर्देश दिया और कहा कि कि शोध के निष्कर्षों के आधार पर ही यह समझा जा सकेगा कि इसके पीछे कौन-कौन से कारण हैं तथा छात्रों और छात्राओं दोनों के समग्र शैक्षिक विकास के लिए कौन-से प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में संतुलित और समान प्रगति ही विकसित समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार बनेगी।

राज्यपाल जी ने मुख्य अतिथि नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदिकर का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनका योगदान देश के लिए प्रेरणादायी है। आईआईटी कानपुर के निदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव तथा वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य के रूप में प्रो. करंदिकर ने नेशनल क्वांटम मिशन, नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ), 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा दूरसंचार मानकीकरण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देकर भारत के वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास को नई दिशा प्रदान की है।
राज्यपाल जी ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय को 77 देशों के 3,421 अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों से प्रवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 64 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता, शोधोन्मुख वातावरण, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों तथा बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रमाण बताते हुए विश्वविद्यालय को विदेशी विद्यार्थियों की संख्या और उनकी प्रगति का नियमित एवं व्यवस्थित अभिलेख रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। भारत की शिक्षा व्यवस्था युवाओं को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 1,39,000 करोड़ रुपये का अभूतपूर्व प्रावधान किया गया है, जिसमें 83,562 करोड़ रुपये विद्यालयी शिक्षा तथा 55,727 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह निवेश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राज्यपाल ने बताया कि केंद्रीय बजट में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक कॉरिडोरों के निकट पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप तथा एक राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना की घोषणा की गई है। उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि इन पहलों का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश के प्रत्येक जिले में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित विषयों का अध्ययन करने वाली बालिकाओं के लिए छात्रावास स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्यपाल जी ने कहा कि डिजिटल एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए देश के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों तथा 500 महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएँगी। वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख पेशेवरों के लिए रोजगार एवं करियर के नए अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
69th Convocation Ceremony : University of Lucknow : उन्होंने बताया कि शिक्षा को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज विषय पर उच्च स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित भविष्य की तकनीकों एवं रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) हेतु 12,123 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) हेतु 6,260 करोड़ रुपये तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए 17,440 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए सक्रिय प्रयास किए जाएँ।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए निजी क्षेत्र के सहयोग से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएँगे। साथ ही विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को राहत देने के उद्देश्य से विदेश में शिक्षा पर कुल लागत पर लगने वाले टैक्स को घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिलेगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी हैं। भारत सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अब देश के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा चुकी है, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता और प्रभावशीलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 30 जून, 2026 तक इस योजना से देशभर के 12 करोड़ लाभार्थी परिवार जुड़ चुके हैं। साथ ही योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में शामिल किया गया है, जो वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत अथवा कार्यरत जो भी पात्र लाभार्थी हों, उन्हें आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांचों गांवों में जागरूकता अभियान संचालित कर प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजना से जोड़ने का प्रयास किया जाए।
राज्यपाल जी ने कहा कि वर्षा ऋतु में एक ओर वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करना आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर मानसून के दौरान फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए भी विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारम्भ किए गए ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से वर्षा की प्रत्येक बूंद को संरक्षित करने का आह्वान किया गया है। उन्होंने सभी से अपने घरों, संस्थानों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान डायरिया, सर्दी-जुकाम, फ्लू, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया तथा अन्य वेक्टर जनित रोगों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इनसे बचाव के लिए स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, संतुलित आहार, हाथों की नियमित सफाई, मच्छरों की रोकथाम, जलभराव न होने देना तथा समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है। राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को अपने परिसरों एवं आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण तथा मानसून जनित रोगों की रोकथाम के संबंध में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए और कहा कि विद्यार्थी यदि समाज में यह संदेश पहुंचाएं तो यह अभियान जन-आंदोलन का स्वरूप ले सकता है।
राज्यपाल जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2 अगस्त, 2026 को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया जाएगा। यह अभियान 100 सप्ताह तक देशभर में संचालित होगा, जिसके अंतर्गत 10 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से अधिक युवा एक साथ नशामुक्ति की शपथ लेंगे। उन्होंने बताया कि ‘माय भारत’ के नेतृत्व में संचालित इस अभियान में एनएसएस स्वयंसेवक, युवा क्लब, विद्यालय, महाविद्यालय तथा 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठन सक्रिय भागीदारी करेंगे। अभियान के दौरान प्रत्येक रविवार खेल प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, ध्यान सत्र एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल अपने करियर तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी निर्वहन करें। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों, परिवार और समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति और तकनीकी विकास से नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित, जागरूक एवं नशामुक्त युवा शक्ति से ही संभव है।
राज्यपाल जी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के जन भवन में भी व्यापक नशा मुक्ति अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत 7 सदस्यीय नशा मुक्ति वाहिनी का गठन किया गया है, जो जन भवन के विभिन्न आवासीय परिसरों में नियमित सघन जांच अभियान चला रही है। अभियान के दौरान यदि कोई व्यक्ति नशे का आदी पाया जाता है तो उसे परामर्श, जागरूकता एवं प्रेरणा के माध्यम से नशामुक्त करने का प्रयास किया जाएगा। ऐसे लोगों को सामान्य जीवन की मुख्यधारा से जोड़ना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने बताया कि यह अभियान 26 जुलाई से प्रारंभ होकर 18 अगस्त तक चलेगा। अभियान की शुरुआत जन भवन आदर्श माध्यमिक विद्यालय के 252 विद्यार्थियों की प्रभात फेरी एवं जन-जागरूकता रैली से हुई, जिन्होंने आसपास की बस्तियों में नशामुक्ति का संदेश देते हुए जागरूकता पंपलेट वितरित किए। इसके बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) तथा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के सहयोग से गांधी सभागार में जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें नशे के दुष्परिणामों तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। राज्यपाल जी ने कहा कि जन भवन स्थित आदर्श माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों के परिवारों को भी नशा मुक्ति अभियान से जोड़ा जाएगा। जन भवन की टीम विद्यार्थियों के घर-घर जाकर उनके परिजनों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगी तथा उन्हें नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। नशा मुक्ति अभियान केवल व्यक्ति तक सीमित न रहकर पूरे परिवार और समाज को जोड़ने का जन-आंदोलन बनना चाहिए।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, अपने निर्णयों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध भविष्य के निर्माण में योगदान दें।
राज्यपाल ने समाज में बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षा तक सीमित न रहकर सामाजिक समस्याओं पर भी शोध करना चाहिए। उन्होंने कुलपति को निर्देश दिया कि जेल का भ्रमण करें, आजीवन कारावास की सजा काट रहे सामूहिक हत्याओं के दोषियों से जेल में मिलें तथा इस विषय पर शोध कराया जाए कि ऐसी कौन-सी मानसिक, सामाजिक अथवा पारिवारिक परिस्थितियाँ होती हैं, जिनके कारण व्यक्ति इतने जघन्य अपराध कर बैठते हैं। शोध के निष्कर्ष समाज को अपराधों की रोकथाम के लिए नई दिशा दे सकते हैं।
राज्यपाल ने युवाओं से दहेज जैसी सामाजिक कुरीति से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि दहेज के लिए महिलाओं की हत्या जैसे अपराध अत्यंत निंदनीय हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षित, जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनने का आह्वान किया। बेटियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई दहेज की मांग करता है तो ऐसी शादी से स्पष्ट रूप से इंकार कर देना चाहिए। विवाह का आधार धन नहीं, बल्कि व्यक्ति का चरित्र, संस्कार और मानवीय मूल्य होने चाहिए।
उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय से समाज में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने, शपथ कार्यक्रम आयोजित करने तथा युवाओं में नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के जेलों में होने की स्थिति समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इसे रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता तथा सामाजिक सहभागिता आवश्यक है।

राज्यपाल जी ने गुजरात का अनुभव साझा करते हुए कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है। अधिकारियों के साथ बैठकर चर्चा और विचार-विमर्श के जरिए समाधान खोजा जाना चाहिए, न कि हड़ताल और अराजकता का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी को मिलकर देश और प्रदेश को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए कार्य करना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जन भवन की टीम द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया गया, जिसमें विभिन्न व्यवस्थाओं में कई कमियां सामने आई हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि निरीक्षण में चिन्हित सभी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।
राज्यपाल जी ने दोनों परिसरों के छात्रावासों का आवंटन न होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को बाहर रहना पड़ता है, जिससे उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ और अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने छात्रावासों का आवंटन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने मेस बंद होने पर भी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को भोजन संबंधी परेशानियां हो रही हैं।
राज्यपाल ने छात्रावासों में वाशिंग मशीन तथा वाई-फाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पनीर स्थानीय विक्रेताओं से खरीदा जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय पुस्तकालय से संबंधित शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि लाइब्रेरी का समय बढ़ाया जाए तथा शनिवार को भी विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय खुला रखा जाए। उन्होंने पुस्तकों के रख-रखाव एवं साफ-सफाई की व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय के विभिन्न भवनों में साफ-सफाई की स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए परिसर में लंबे समय से पड़े स्क्रैप का शीघ्र निस्तारण (ऑक्शन) कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि अग्नि सुरक्षा के कई उपकरण पुराने एवं एक्सपायर पाए गए हैं, जिन्हें तत्काल बदलकर आवश्यक सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही शुद्ध पेयजल एवं आरओ की व्यवस्था को भी संतोषजनक बनाने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय ( 69th Convocation Ceremony : University of Lucknow ) में ई-ऑफिस प्रणाली शुरू किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस व्यवस्था से फाइलों का त्वरित निस्तारण होगा तथा अनावश्यक विलंब समाप्त होगा, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय की खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन तथा शिक्षकों द्वारा अधिक संख्या में पुस्तकों के लेखन की सराहना करते हुए इसे विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
इस अवसर पर ( 69th Convocation Ceremony : University of Lucknow ) राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने शोध एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को टीचर्स एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों का भी लोकार्पण किया। एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट सहभागिता के लिए जनपद रायबरेली के मुख्य विकास अधिकारी एवं मुख्य कार्यक्रम अधिकारी को सम्मानित किया गया। जन भवन की ओर से विद्यालयों की लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भेंट की गईं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी राज्यपाल जी को पुस्तकें भेंट कीं। पुस्तकों को विद्यालयों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि विद्यार्थियों को उनका अधिकाधिक लाभ मिल सके।
