- पदक पाकर खिले मेधावियों के चेहरे
- 13वें दीक्षांत समारोह में 1921 विद्यार्थियों को उपाधियां, 130 मेधावियों को मिले 156 पदक
लखनऊ, 01 अगस्त, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ( Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) का 13वां दीक्षांत समारोह शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को को विश्वविद्यालय के अटल प्रेक्षागृह में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। मेधावी विद्यार्थियों को पदक पहनाए जाने के साथ ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शिक्षकों, अभिभावकों तथा विश्वविद्यालय को दिया।
दीक्षांत समारोह (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) में कुल 1921 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 956 छात्राएं और 965 छात्र शामिल हैं। कुल उपाधियों में 17 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं। समारोह में कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदक प्रदान किए गए। इनमें 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं। स्वर्ण पदकों की बात करें तो 32 छात्राओं को 41 स्वर्ण पदक तथा 25 छात्रों को 35 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 57 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले। रजत पदकों में 22 छात्राओं को 24 रजत पदक तथा 14 छात्रों को 16 रजत पदक प्रदान किए गए। कुल 36 विद्यार्थियों को रजत पदक मिले।

इसी तरह 24 छात्राओं को 26 कांस्य पदक तथा 13 छात्रों को 14 कांस्य पदक प्रदान किए गए। कुल 37 विद्यार्थियों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। कुल मिलाकर 78 छात्राओं को 91 पदक और 52 छात्रों को 65 पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदकों से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह की एक विशेष उपलब्धि दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। कुल 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 45 पदक हासिल किए। इनमें 13 दिव्यांग छात्राएं और 14 दिव्यांग छात्र शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने 22 स्वर्ण पदक प्राप्त किए, जिनमें 10 छात्राएं और 12 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा एक रजत पदक एक छात्र को तथा चार कांस्य पदक प्रदान किए गए, जिनमें तीन छात्राएं और एक छात्र शामिल हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी प्रयासों का प्रमाण बनी। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियां गिनाईं।

13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University : शैक्षिक शोभायात्रा से कार्यक्रम शुरू हुआ। इसके बाद राष्ट्रगीत और कुलगीत गायन हुआ। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने शुभारंभ की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने स्वागत भाषण और विवि का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दीक्षोपदेश दिया। समारोह की विशेषता यह रही कि पूरे कार्यक्रम का सांकेतिक भाषा में भी समानांतर प्रस्तुतीकरण किया गया। साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर्स ने प्रत्येक संबोधन और कार्यक्रम को सांकेतिक भाषा के माध्यम से दिव्यांगजनों तक पहुंचाया। ऐसा हर वर्ष होता रहा है।

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बटन दबाकर विद्यार्थियों की डिग्रियों को एक साथ डिजिलॉकर पर अपलोड किया। तत्पश्चात कुलसचिव रोहित सिंह ने पदक विजेता विद्यार्थियों (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) को मंच पर आमंत्रित किया। राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप, मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर और राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबडे ने मेधावियों को पदक प्रदान किए। जैसे-जैसे विद्यार्थियों को पदक मिलते गए, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। उत्कृष्ट कार्य करने हेतु शिक्षक पुष्पेंद्र सिंह को सम्मानित किया गया। इसके बाद छोटे बच्चों ने जल व पर्यावर संरक्षण पर मनमोहक प्रस्तुति दी। मंच पर प्रमुख सचिव दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग राजेश कुमार सिंह भी मौजूद रहे। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल की अनुपस्थिति में राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने किया।
मुख्य अतिथि ने किया विश्वविद्यालय को विशेष दर्जा देने का अनुरोध…
इसके बाद मुख्य अतिथि सी सदानंदन मास्टर ने समारोह संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उपलब्धि, उत्सव और जीवन की नई शुरुआत का दिन है। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं देता, बल्कि ज्ञान, उत्तरदायित्व और मानवता की सेवा का संकल्प भी सौंपता है। उन्होंने सभी उपाधिधारकों और उनके अभिभावकों को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उन्होंने कहा कि डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) देश के उन चुनिंदा संस्थानों में है, जहां दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थी एक साथ अध्ययन करते हैं। दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित और अन्य दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ सामान्य विद्यार्थियों की संयुक्त शिक्षा व्यवस्था समावेशी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर देती है और उनमें संवेदनशीलता, समानता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती है।
मुख्य अतिथि ने कहा कि विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) की स्थापना दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने और उन्हें समान अवसर देने के उद्देश्य से हुई थी। आज यह संस्थान सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की समावेशी सोच को व्यवहार में उतारने का सशक्त उदाहरण बन चुका है। यहां शिक्षा के साथ सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यहां के शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की आवश्यकता को समझते हुए अतिरिक्त समय और नई शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यही समर्पण इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत है और अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सुगम्यता, पुनर्वास, समावेशी शिक्षा, सहायक तकनीक, कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। दिव्यांग विद्यार्थियों के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदम यह साबित करते हैं कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास जताया कि विकसित भारत-2047 के निर्माण में ऐसे विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) को विशेष दर्जा (Special Status) देने पर विचार किया जाए। उनका कहना था कि इससे विश्वविद्यालय को शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, पुनर्वास सेवाओं और दिव्यांगजनों के लिए तकनीकी विकास के क्षेत्र में और अधिक विस्तार करने का अवसर मिलेगा। साथ ही भारत समावेशी शिक्षा और दिव्यांग अध्ययन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में और मजबूत होगा।

मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें केवल उपाधि नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी मिली है। अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए करें। उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि उनका संघर्ष, साहस और सफलता पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में सत्यनिष्ठा, विनम्रता और सेवा की भावना को सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित होने पर जताई खुशी, सुगंध पथ, एआई चश्मा भी अनूठा…
मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर के संबोधन के बाद उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम. बोबडे ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन के पहले भाग में संस्मरण साझा किए। इसके बाद कुलाध्यक्षा श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अनुपस्थिति में उनका संबोधन पढ़कर सुनाया। संबोधन में विश्वविद्यालय स्थित स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय, कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र, कॉलेज फॉर डेफ की सुविधाओं और व्यवस्था को बेहतर बताया। साथ ही भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से विश्वविद्यालय को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया जाने पर खुशी जताई।
कहा कि विश्वविद्यालय चलाई जा रही “सुगंध पथ” योजना सबसे मानवीय और नवाचारी पहलों में से एक है। इसके मार्गों, विभागों, पुस्तकालय, छात्रावास और प्रशासनिक भवनों के आसपास सुगंधित पौधे लगाए गए। के आधार पर दृष्टिबाधित विद्यार्थी अपने मार्ग और गंतव्य की पहचान कर सकते हैं। तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी कदम उठाते हुए दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को स्मार्ट विजन चश्मा उपलब्ध कराया गया है।
परीक्षा प्रणाली में अभिनय प्रयोग करते हुए दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए सह-लेखक विहीन लैपटॉप आधारित परीक्षा का सफल आयोजन संपन्न हो रहा है जो विश्वविद्यालय की समावेशी सोच को दर्शाता है। दिव्यांगों के भौतिक पुनर्वासन एवं दिव्यांगजनों को निःशुल्क अंग प्रदान किए जाने हेतु विश्वविद्यालय में कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केन्द्र स्थापित है। इस केन्द्र द्वारा पंजीकरण एवं निःशुल्क परामर्श सेवा के माध्यम से अब तक 7021 दिव्यांग लाभान्वित हो चुकें है। साथ ही अबतक इस केन्द्र द्वारा अब तक 6647 दिव्यांगों को निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं उपकरण प्रदान किये गये हैं।
यूपी दो विशेष विवि चलाने वाला इकलौता राज्यः नरेंद्र कश्यप
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि यूपी भारत का इललौता राज्य है जहां दो विशेष विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) दिव्यांगजन विभाग की ओर से संचालित होते हैं। एक जिसमें आप बैठे हैं डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय और दूसरा चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय है। भारत सरकार की नियामक संस्था भारतीय पुनर्वास परिषद् द्वारा डॉ० शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनक को राष्ट्रीय स्तर पर सेंटर फॉर एक्सीलेंस घोषित किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) में बीबीए छात्रा संजना कुमारी ने इंडोनेशिया पैरा बैडमिन्टन इण्टरनैशनल टूर्नामेंट 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए महिला युगल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर विश्वविद्यालय, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया। विश्वविद्यालय (13th Convocation Ceremony of Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University ) खेल भावना को जागृत करने के साथ गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर रहा है। 13 लाख रूपए से अधिक तक के पैकेज पर विद्यार्थियों को जॉब ऑफर मिल रहे हैं।( Dr. Shakuntala Misra National Rehabilitation University established by Divyangjan Sashaktikaran Vibhag Uttar Pradesh, Government of Uttar Pradesh came up by an Ordinance dated August 29, 2008, later replaced by U.P. Act No. 1 of 2009, dated February 19, 2009 and U.P. Act No. 24 of 2011, dated No(vember 28, 2011. The first University of its kind, which also provides accessible and quality higher education to challenged students, in a completely barrier-free environment.)
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