लखनऊ, 30 जुलाई , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन, लखनऊ से प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में 2 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले वर्चुअल संवाद की तैयारियों एवं विश्वविद्यालयों की सहभागिता की रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि अभियान में निजी विश्वविद्यालयों की प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र ही प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ पृथक बैठक आयोजित की जाएगी।
नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान भारत सरकार के माय भारत द्वारा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत के विजन के अनुरूप संचालित एक राष्ट्रव्यापी जनभागीदारी अभियान है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए विकसित भारत-2047 के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह अभियान वर्ष 2025 में वाराणसी में आयोजित यूथ स्पिरिचुअल समिट, नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत से प्रारंभ हुआ, जिसके उपरांत 21 सितंबर 2025 को सेवा पखवाड़ा के दौरान देशभर में 2,370 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अगले चरण के अंतर्गत 2 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के लगभग 10,000 स्थानों से वर्चुअली जुड़े एक करोड़ से अधिक युवाओं से संवाद करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान देशभर के एक करोड़ से अधिक युवा नशा मुक्ति संकल्प लेकर नशा मुक्ति युवा स्वयंसेवक के रूप में अभियान से जुड़ेंगे तथा अन्य युवाओं को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। अभियान के अंतर्गत अधिकतम युवाओं को माय भारतक प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत करने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि युवाओं की व्यापक एवं सतत सहभागिता सुनिश्चित की जा सके। अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वयंसेवकों एवं संगठनों को 50वें, 75वें एवं 100वें सप्ताह पर सम्मानित भी किया जाएगा।
यह वर्चुअल संवाद आगामी 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी जनजागरूकता अभियान का शुभारंभ भी होगा। इस अवधि में देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं सहभागी संस्थाओं द्वारा प्रत्येक रविवार वॉकाथन, योग एवं ध्यान सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, कला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, जनजागरूकता अभियान तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि युवाओं में नशामुक्त जीवनशैली के प्रति सतत जागरूकता विकसित हो तथा विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य विश्वविद्यालयों एवं उनके विद्यार्थियों की इस राष्ट्रीय अभियान में व्यापक एवं प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करना था। इस दौरान इस बात पर विस्तार से चर्चा की गई कि 2 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय किस प्रकार अधिकाधिक विद्यार्थियों को जोड़ेंगे, उन्हें माय भारत प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कराएंगे, नशा मुक्ति संकल्प दिलाएंगे तथा अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। साथ ही, अभियान के अंतर्गत आगामी 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार विश्वविद्यालयों में नशा मुक्ति विषयक जागरूकता, खेल, योग, ध्यान, सांस्कृतिक, कला एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के नियमित आयोजन की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिससे युवाओं की सतत एवं सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि इससे पूर्व 22 जुलाई 2026 को जन भवन के अधिकारियों द्वारा प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में भारत सरकार के गृह सचिव एवं स्कूल शिक्षा सचिव द्वारा जारी दिशा-निर्देशों तथा उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेश के क्रम में आगामी तीन वर्षों के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं विद्यालय द्वारा नशा मुक्ति अभियान की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा की गई थी। इसी क्रम में आज की बैठक में 2 अगस्त से प्रारंभ होने वाले अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आगामी गतिविधियों के संबंध में विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि विकसित भारत-2047 तक ड्रग्स फ्री यूथ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों को जनभागीदारी के साथ व्यापक स्तर पर नशा मुक्ति अभियान चलाना होगा। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि किसी भी अभियान के प्रारंभ से पूर्व उसकी आधारभूत स्थिति का आकलन (बेसलाइन सर्वे) किया जाए तथा अभियान के संचालन के बाद उसकी समीक्षा कर यह देखा जाए कि कितना परिवर्तन आया है। क्योंकि किसी भी अभियान की सफलता उसके परिणामों से मापी जाती है, इसलिए समय-समय पर समीक्षा करना आवश्यक है। विश्वविद्यालयों को यह पता होना चाहिए कि अभियान प्रारंभ होने से पहले क्या स्थिति थी और अभियान चलाने के बाद क्या परिवर्तन आया। इसी से समाज में वास्तविक बदलाव दिखाई देगा।
उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि शिक्षक एवं संबंधित अधिकारी समय-समय पर विश्वविद्यालय परिसर, छात्रावासों तथा आवश्यकता अनुसार विद्यार्थियों के संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित करें कि कहीं कोई विद्यार्थी नशे की प्रवृत्ति का शिकार तो नहीं हो रहा है। यदि परिसर या छात्रावास में नशे से संबंधित कोई समस्या सामने आती है तो उसे छिपाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि समस्या को छिपाने से उसका समाधान संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में संबंधित विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए जागरूकता, परामर्श एवं नशामुक्ति से जुड़े प्रयास किए जाएं तथा उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए।
कुलाधिपति जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों के शिक्षक स्वयं भी नशामुक्त जीवन का उदाहरण प्रस्तुत करें, क्योंकि शिक्षक का आचरण ही विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का आधार होता है। विश्वविद्यालयों से लाखों विद्यार्थी एवं परिवार जुड़े हैं, इसलिए विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों से संवाद स्थापित करते हुए घर-घर तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल भाषण देने से परिवर्तन नहीं आता, बल्कि धरातल पर निरंतर कार्य करने से ही वास्तविक परिणाम प्राप्त होते हैं।
राज्यपाल जी ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों के परिसर एवं छात्रावास पूर्णतः नशामुक्त होने चाहिए। विश्वविद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित किया जाए कि विद्यार्थियों में नशे का नहीं बल्कि स्वच्छता का नशा हो। परिसर में स्वच्छ जल, स्वच्छ हवा, स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ परिसर तथा स्वच्छ विचारों को बढ़ावा दिया जाए और इस उद्देश्य से नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए कि स्वच्छता संबंधी गतिविधियों का नियमित रिकॉर्ड भी रखा जाए तथा उसकी समय-समय पर समीक्षा की जा सके।
उन्होंने कहा कि नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत आगामी 100 सप्ताह तक प्रत्येक रविवार विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। चूंकि रविवार अवकाश का दिन होता है, इसलिए विश्वविद्यालयों को विशेष कार्ययोजना बनानी होगी तथा शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को पहले से तैयार कर उनकी अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए पांच-पांच गांवों के प्रत्येक घर तक पहुंचकर नशा मुक्ति अभियान चलाया जाए। यदि विश्वविद्यालय इस प्रकार समाज के बीच जाकर कार्य करेंगे तो यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
राज्यपाल जी ने प्रत्येक विश्वविद्यालय को अपने परिसर में उपलब्ध भूमि के अनुसार एक एकड़ से लेकर 5 एकड़ तक मियावाकी वन विकसित करने तथा व्यापक स्तर पर पौधरोपण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विश्वविद्यालयों के निरीक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ विश्वविद्यालयों के छात्रावासों में भोजन नहीं बनता और विद्यार्थी बाहर से भोजन मंगाते हैं। इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए तथा छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि बाहर से भोजन मंगाने की प्रवृत्ति के साथ नशे जैसी गतिविधियों की संभावना भी बढ़ जाती है। विश्वविद्यालयों को ऐसी सभी संभावनाओं को समाप्त करने के लिए गंभीरता से कार्य करना चाहिए।
राज्यपाल जी ने निर्देश दिए कि जिन विश्वविद्यालयों में अग्निशमन उपकरण (फायर सेफ्टी) एक्सपायर हो चुके हैं, उन्हें तत्काल बदला जाए। जिन विश्वविद्यालयों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है अथवा उसकी गति पर्याप्त नहीं है, वहां आवश्यक सुधार किए जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में बढ़ती पुरस्कारों की संख्या की समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कहा कि पुरस्कारों की गुणवत्ता एवं उपयोगिता पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दीक्षोत्सव के अवसर पर विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए गांवों के बच्चे उत्कृष्ट भाषण देते हैं, कहानी सुनाते हैं, हारमोनियम बजाते हैं तथा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से एक ऐसे बालक का उल्लेख किया, जो आठ भाषाओं में संवाद करने की क्षमता रखता है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया जाए तथा उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। बच्चों द्वारा प्रस्तुत भाषण, नाटक, कहानी, संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रिकॉर्डिंग कर जन भवन में प्रदर्शित की जाए। साथ ही विश्वविद्यालय इन गतिविधियों का संकलन कर पुस्तक प्रकाशित करें तथा उसका वितरण गोद लिए गए गांवों में भी कराएं, ताकि अन्य बच्चे भी प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों से ही परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सीएसआर के सहयोग से भवनों एवं आधारभूत सुविधाओं का उल्लेखनीय विकास किया गया है, जिससे विश्वविद्यालय का स्वरूप बदल गया है। अन्य विश्वविद्यालय भी ऐसे प्रयास करें। उन्होंने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों में आवास खाली होने के बावजूद नए भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे अनावश्यक निर्माण कार्यों से बचा जाए तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए। कुछ विश्वविद्यालयों के छात्रावासों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के बावजूद वहां कोई रचनात्मक गतिविधियां संचालित नहीं होती हैं। ऐसे छात्रावासों में नियमित रूप से योग, खेल, सांस्कृतिक एवं अन्य सकारात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाए। जो विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जाएं।
राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों के दीक्षोत्सव के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनियों में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए शॉल, वस्त्र, अचार, पापड़ एवं अन्य उत्पादों की गुणवत्ता अत्यंत उत्कृष्ट होती है। ऐसे उत्पादों के विपणन की समुचित व्यवस्था की जाए तथा विश्वविद्यालय परिवार स्वयं भी इन उत्पादों को खरीदकर महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करे। उन्होंने बालिका गृहों में रहने वाली बालिकाओं द्वारा तैयार किए जा रहे विभिन्न उत्पादों एवं उनकी रचनात्मक गतिविधियों की भी सराहना करते हुए उन्हें आगे बढ़ाने और प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

राज्यपाल जी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का उत्सव होता है। इसलिए इसे अब दीक्षांत समारोह के स्थान पर दीक्षोत्सव कहा जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार की नमस्ते योजना का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि सफाई कर्मियों को आयुष्मान भारत योजना सहित नमस्ते योजना के अंतर्गत उपलब्ध सभी सुविधाओं एवं लाभों से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय सक्रिय प्रयास करें, ताकि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।
बैठक में विश्वविद्यालयों द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आगामी 2 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित गतिविधियों तथा इसके उपरांत अगले 100 रविवारों तक संचालित किए जाने वाले नशा मुक्ति, जनजागरूकता, खेल, योग, सांस्कृतिक एवं अन्य रचनात्मक कार्यक्रमों की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।
उल्लेखनीय है कि जन भवन में संचालित नशा मुक्ति वाहिनी द्वारा नशा मुक्ति अभियान को निरंतर गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में 24 जुलाई 2026 को नशा मुक्ति वाहिनी की महिला एवं पुरुष सदस्यों की संयुक्त टीम द्वारा जन भवन स्थित अधिकारी आवासीय परिसर में सघन निरीक्षण एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 131 आवासों का निरीक्षण किया गया तथा प्रत्येक आवास पर परिवार की महिला सदस्यों एवं बच्चों से जानकारी प्राप्त की गई कि परिवार का कोई सदस्य किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन तो नहीं करता है। प्राप्त जानकारी का सत्यापन करते हुए संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी लिए गए। साथ ही आवासों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया गया कि परिसर में किसी प्रकार का मादक पदार्थ अथवा उससे संबंधित सामग्री उपलब्ध न हो। इसके अतिरिक्त जन भवन के विभिन्न अनुभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी मादक पदार्थों के सेवन के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई तथा उन्हें नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
