- कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो० रमेश चन्द्र वर्मा ने सरस्वती देवी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन कर किया।
गोरखपुर , 28 जुलाई , वीर बहादुर सिंह राजकीय महाविद्यालय कंपियरगंज ( Veer Bahadur Singh Rajkeeya Mahavidyalaya ) में नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं के ज्ञान, अनुशासन और स्वावलम्बन के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो० रमेश चन्द्र वर्मा ने सरस्वती देवी की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन और पुष्पार्चन कर किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा और दीक्षा ( Veer Bahadur Singh Rajkeeya Mahavidyalaya ) में मूलभूत अंतर यह है कि विविध विषयों का ज्ञान शिक्षा है जबकि ज्ञान के आधार पर कुशल हो जाना दीक्षा है। स्नातक स्तर पर विद्यार्थी जो ज्ञान प्राप्त करते हैं उसके आधार पर वे स्वावलम्बी बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों ( Veer Bahadur Singh Rajkeeya Mahavidyalaya ) को वैदिक समावर्तन संस्कार की जानकारी देते हुए कहा कि गुरुकुल में दीक्षा पूर्ण कर विद्यार्थी जब विशेष ज्ञान मंत्रों से स्नान करता था तो स्नातक कहलाता था। स्नातक व्यक्ति स्वावलंबी होने के साथ ही समाज कल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए तत्पर होता है।

Veer Bahadur Singh Rajkeeya Mahavidyalaya : इतिहास के प्रोफेसर डॉ० जयप्रकाश वर्मा ने नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं को पूर्ण गणवेश में ही महाविद्यालय आने और अनुशासन में रहकर अध्ययन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी ऐसे छात्र या व्यक्ति को महाविद्यालय में न बुलाएं जो महाविद्यालय में अध्ययनरत न हो।

प्रोफेसर मनीष कन्नौजिया, डॉ० सुमित कुमार गुप्ता, जितेन्द्र कुमार चौरसिया, संतोष कुमार, किशोर नन्द, डॉ० संजय गुप्ता, डॉ० राजेश्वरी और विकास कुमार सोनकर ने विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों के अध्ययन से होनेवाले लाभ और उनमें आजीविका सम्बन्धी संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के समवेत गायन से हुआ। कार्यक्रम का आयोजन समारोहक और राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर डॉ० शैलजा अस्थाना ने और संचालन हिन्दी प्राध्यापक योगेन्द्र नाथ मिश्र ने किया।
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