- रायपुर में मंत्री केदार कश्यप जी की विशेष उपस्थिति में ‘मोर अंगना के शोर’ का भव्य विमोचन, बिलासपुर जिले की शिक्षिका श्रीमती तृप्ति शर्मा की कविता को भी मिला स्थान एवं सम्मान
- गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज क्यूआर कोड आधारित बाल काव्य संकलन ने बटोरी सराहना
रायपुर, 29 जून , राजधानी रायपुर में आज बाल साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में “मोर अंगना के शोर” साझा बाल साहित्य काव्य संकलन का गरिमामय विमोचन संपन्न हुआ। यह अभिनव काव्य संकलन अपनी विशिष्ट प्रस्तुति और साहित्यिक नवाचार के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान प्राप्त कर चुका है, जो छत्तीसगढ़ के साहित्यिक परिदृश्य के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

इस गरिमामय समारोह में केदार कश्यप (वन, जलवायु परिवर्तन एवं परिवहन मंत्री, छत्तीसगढ़), धरसीवा विधायक श्री अनुज शर्मा जी, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सीए अमित चिमनानी जी, तथा साझा काव्य संकलन के प्रमुख संपादक श्री वीरेंद्र साहू जी सहित अनेक साहित्यकार, शिक्षाविद एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।
“मोर अंगना के शोर” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक ऑडियो-वीडियो बाल साहित्य संकलन है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें सम्मिलित प्रत्येक रचनाकार ने अपनी कविता का स्वयं सस्वर पाठ एवं प्रस्तुतीकरण किया है। पुस्तक में प्रत्येक रचना के साथ क्यूआर कोड उपलब्ध है, जिसे स्कैन करते ही बच्चे संबंधित कविता को लेखक की आवाज़ में सुन और देख सकते हैं। यह तकनीक और साहित्य का उत्कृष्ट समन्वय है, जो बाल पाठकों के लिए इस संकलन को अत्यंत रोचक, जीवंत और शिक्षाप्रद बनाता है। इस साझा काव्य संकलन में 25 जिले के 50 साहित्यकारों ने 121 कविताएं लिखी हैं।

इस प्रतिष्ठित साझा काव्य संकलन में बिलासपुर जिले के कन्या सरकंडा संकुल, शासकीय प्राथमिक शाला लोधीपारा सरकंडा की शिक्षिका श्रीमती तृप्ति शर्मा की मौलिक बाल कविता को भी स्थान एवं सम्मान प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर श्रीमती तृप्ति शर्मा ने कहा कि इस ऐतिहासिक एवं विश्व रिकॉर्ड में दर्ज संकलन का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि बाल साहित्य के माध्यम से बच्चों में भाषा, संस्कार, नैतिक मूल्यों और रचनात्मक सोच का विकास करना इस संकलन का प्रमुख उद्देश्य है।
“मोर अंगना के शोर” पारंपरिक पुस्तक और आधुनिक तकनीक का उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत करता है। यह संकलन न केवल बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि उन्हें सुनने, गुनगुनाने और साहित्य से भावनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। यह प्रयास बाल साहित्य को नई दिशा और आयाम देने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यह पुस्तक बालवाड़ी तथा प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए बहुत ही रोचक एवं उपयोगी है
