लखनऊ , 29 जून , राजकीय महाविद्यालय बाराखाल, जनपद सन्तकबीर नगर के अनेक छात्र-छात्राओं द्वारा शिकायती पत्र की जाँच में गंभीर आरोपों पुष्टि के बाद आज कालेज के डॉ० दिलीप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है .इनके विरुढ चल रही जाँच की रिपोर्ट आने के बाद उच्च स्तर से यह कार्रवाई की गयी है
पूरा प्रकरण इस प्रकार है – संख्या- 1251/सत्तर-5-2026-2056252- लखनऊः दिनांक 29 जून, 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया है –
कार्यालय-आदेशराजकीय महाविद्यालय बाराखाल, जनपद सन्तकबीर नगर के अनेक छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत दिनांक रहित शिकायती पत्र में डॉ० दिलीप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) के विरुद्ध छात्राओं के साथ अनुचित एवं अशोभनीय व्यवहार, यौन उत्पीड़न, पद का दुरुपयोग तथा राजकीय सेवक के अनुरूप अपेक्षित आचरण के उल्लंघन सम्बन्धी गंभीर आरोप लगाये गये थे।
उक्त प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए शासन के कार्यालय ज्ञाप संख्या-1110/सत्तर-5-2026-2056252, दिनांक 04.06.2026 द्वारा
विशेष सचिव, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था।
2- उक्त शिकायतों के परीक्षण हेतु शासन द्वारा गठित त्रिसदस्यीय जांच समिति ने दिनांक 23.06.2026 को अपनी विस्तृत जांच आख्या प्रस्तुत की।
जांच समिति द्वारा उपलब्ध मौखिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, छात्राओं एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के कथनों तथा अभिलेखीय सामग्री का परीक्षण करते हुए
यह निष्कर्ष अभिलिखित किया गया कि डॉ० दिलीप कुमार द्वारा छात्राओं के प्रति अनुचित एवं मर्यादाविहीन व्यवहार, शारीरिक शोषण, व्यक्तिगत सम्पर्क स्थापित करने के प्रयास, मोबाइल नम्बर प्राप्त करने, अनावश्यक वार्तालाप करने
तथा आपत्तिजनक टिप्पणियाँ किए जाने संबंधी आरोपं प्रथम दृष्टया पुष्ट एवं विश्वसनीय प्रतीत होते हैं।
जांच समिति ने यह भी संस्तुति की है कि उक्त आचरण एक शिक्षक एवं राजकीय सेवक से अपेक्षित नैतिक एवं सेवा आचरण के प्रतिकूल है
तथा उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्यवाही किया जाना आवश्यक है।
3- जांच समिति द्वारा प्रस्तुत आख्या एवं उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों के परीक्षण से प्रथमदृष्टया यह परिलक्षित होता है कि डॉ० दिलीप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास द्वारा कार्यस्थल पर अध्ययनरत छात्राओं के साथ ऐसा आचरण किया गया है,
जो उ०प्र० सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-3-क में निहित उपबंधों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
उक्त नियम के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी कार्यस्थल पर किसी महिला के यौन उत्पीड़न के किसी भी कृत्य में संलिप्त नहीं होगा
तथा प्रत्येक कार्यालयाध्यक्ष का यह दायित्व होगा कि वह कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम हेतु प्रभावी उपाय सुनिश्चित करे।
4- जांच समिति द्वारा अभिलिखित निष्कर्षों से यह प्रथमदृष्टया परिलक्षित होता है कि सम्बन्धित अधिकारी का आचरण न केवल राजकीय सेवक की गरिमा के प्रतिकूल है,
अपितु उ०प्र० सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-3-क का भी गंभीर उल्लंघन है।
5- प्रकरण में आरोपों की प्रकृति अत्यन्त गंभीर है, जो छात्राओं के यौन उत्पीड़न, नैतिक अधःपतन, पद के दुरुपयोग तथा राजकीय सेवक के अपेक्षित आचरण के उल्लंघन से सम्बन्धित हैं।
उपलब्ध साक्ष्यों एवं जांच समिति के निष्कर्षों से यह भी परिलक्षित होता है कि यदि सम्बन्धित अधिकारी को वर्तमान पद पर कार्यरत रहने दिया जाता है,
तो उनके द्वारा साक्ष्यों को प्रभावित करने गवाहों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने अथवा प्रस्तावित विभागीय जांच को निष्पक्ष रूप से सम्पन्न होने में बाधा उत्पन्न किये जाने की पर्याप्त संभावना है।
ऐसी स्थिति में लोकहित तथा निष्पक्ष विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने हेतु उनका सेवायोजन पर बने रहना न्यायोचित नहीं है।
6- अतः श्री राज्यपाल महोदय, उ०प्र० सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 के अंतर्गत डॉ० दिलीप कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर इतिहास, राजकीय महाविद्यालय बाराखाल, जनपद सन्तकबीर नगर को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हैं।
