लखनऊ, 04 जून , राजधानी लखनऊ जिले के मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कसमंडी में कंसा किला-मजार विवाद ( Lucknow kasmandi fort or mazar dispute ) को लेकर उठे विवाद में अब राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं। कंसा किला को लेकर पासी समाज के द्वारा शुरू किए गए आंदोलन- धरना प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के स्थानीय सांसद आरके चौधरी की सक्रिय सहभागिता न होने और समर्थन न देने के कारण पासी समाज का एक धड़ा खासा नाराज है। ऐसे में सवाल ये है क्या यह विवाद नए चुनावी समीकरण बदलेगा ?
Lucknow kasmandi fort or mazar dispute : इस मुद्दे पर मुखर होकर काम कर रहे सूरज पासी अपने समूह के नेताओं के साथ आर के चौधरी से भेंट भी कर चुके हैं और भेंट करने के दौरान ही दोनों पक्षों में तल्खी आ गई और यही से बात बिगड़ गई । सूरज पासी से जुड़े लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के सांसद आर चौधरी पासी समाज से ज्यादा दूसरे समुदाय का पक्ष इसलिए रख रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी के सांसद हैं । समाजवादी पार्टी का रुख इस मुद्दे पर तटस्थ है . इसकी वजह यह है कि मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी अपने कोर वोट बैंक को किसी भी सूरत में नाराज नहीं करना चाहती है।
Raja Kansa Pasi Fort: वर्ष 2027 के चुनाव को देखते हुए पार्टी अपनी इस सीट को वापस पाना चाहती है। वर्तमान में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की विधायक जय देवी हैं । उनके पति कौशल किशोर मलिहाबाद से विधायक भी रह चुके हैं और मोहनलालगंज से सांसद के साथ-साथ केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं । पिछले संसदीय चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के आर के चौधरी से हार गए थे . अब उनकी भी सक्रियता मोहनलालगंज सीट से पुनः जीतने की है। इसीलिए वे भी भूमिका बनाने में लगे हैं । इसके साथ ही अगले वर्ष होने वाले मलिहाबाद विधानसभा चुनाव में भी कंसा किला के इस विवाद में नए समीकरण बनते भी करते आ रहे हैं ।
ऐसे में यह विवाद प्रशासन के लिए तो सिरदर्द है ही राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे में मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय बंटी हुई है . पुलिस के लिए चुनौती पूर्ण कार्य है कि विवादित स्थल के इर्द-गिर्द कैसे सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को बनाए रखा जाए ? हालांकि अब तक पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरीके से सफल भी रहा है। किसी प्रकार की कोई ऐसी घटना नहीं हुई है जिससे कानून व्यवस्था को खतरा पैदा हो, लेकिन विवादित स्थल को लेकर जिस तरीके से राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में सक्रियता देखी जा रही है उससे यह आसानी से कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा जरूर पकड़ेगा अब देखना है कि वे इस मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर राजनितिक नेता किस प्रकार की सक्रियता निभाते हैं या फिर वे इस पूरे प्रकरण से खुद को अलग करते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटेंगे .
