कानपुर , 25 मई , छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर ( CSJMU ) के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Learning for Tomorrow: Integrating Environment, Equity and Sustainability through Education”
का समापन सत्र गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन सत्र में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, समता, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श हुआ। वक्ताओं ने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न मानते हुए सामाजिक परिवर्तन, मानवीय संवेदनशीलता तथा सतत भविष्य निर्माण का आधार बताया। स्वागत भाषण सम्मेलन की संयोजक डॉ. रश्मि गोरे द्वारा दिया गया।
CSJMU News : मुख्य अतिथि प्रो. ए. के. शर्मा (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, IIT कानपुर) ने “एजाइल मॉडल” की व्याख्या करते हुए शिक्षा को लचीली, अनुकूलनशील एवं संदर्भ-आधारित बनाने पर बल दिया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सतत विकास लक्ष्यों के मध्य समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. स्वीटी श्रीवास्तव (संयोजक, शिक्षा एवं प्राध्यापक, DWTC) ने समावेशी, मूल्यपरक एवं जीवनोपयोगी शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए शिक्षकों की भूमिका को प्रेरक एवं मार्गदर्शक बताया।
विशिष्ट वक्ता प्रो. सुनील उपाध्याय (विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, DBS कॉलेज) ने शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, समाजोपयोगी एवं उत्तरदायी बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों एवं आलोचनात्मक चिंतन के विकास को शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बताया।
दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र, प्लेनरी सत्र, तकनीकी सत्रों एवं अकादमिक चर्चाओं को प्रतिभागियों ने अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया। शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए यह सम्मेलन अकादमिक संवाद और ज्ञान साझेदारी का प्रभावी मंच सिद्ध हुआ।
CSJMU kanpur news : सम्मेलन सचिव डॉ. गोपाल सिंह ने सम्मेलन की विस्तृत आख्या प्रस्तुत करते हुए विभिन्न सत्रों, अकादमिक गतिविधियों एवं प्रतिभागियों की सहभागिता की जानकारी साझा की। विभागाध्यक्ष डॉ. तनुजा भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट वक्ताओं, प्रतिभागियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के सहयोग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. तनुजा भट्ट एवं डॉ. गोपाल सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ, जबकि सम्मेलन की संयोजक डॉ. रश्मि गोरे रहीं।
सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों एवं सहयोगियों के सहयोग से यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने शिक्षा, समता, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सतत विकास के क्षेत्र में नए शैक्षिक विमर्श को दिशा प्रदान की।
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