लखनऊ विश्वविद्यालय में जब से एक प्रोफेसर साहब को उनके पद से हटाने की चर्चा शुरू हुई है तब से वे धूप में भी सरस्वती वाटिका के पास खड़े रहते हैं .उन्हें हर वक्त डर सताता रहता है कि न जाने कब छात्र आकर धरना प्रदर्शन करने लगेंगे . एक दिन तो हद हो गई जब छात्रों ने मुखिया की ही गाड़ी रोक ली. भला हो सुरक्षा कर्मियों का कि उन्होंने जैसे तैसे मुखिया की गाड़ी घर की ओर रवाना कराई. अभी 2 दिन पहले की बात है कि छात्रों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया तो प्रोफ़ेसर साहब अपने एडिशनल पुरातन साथी को लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे और वहां तब तक जमे रहे जब तक पुलिस ने आकर छात्रों को समझा बुझा कर शांत नहीं किया . आजकल नम्बर बढाने हैं तो फिर धूप सहन करनी पड़ेगी.
लखनऊ विश्वविद्यालय की एक महिला अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर शासन – प्रशासन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है .हालांकि उन्हीं के समकक्ष भातखंडे विश्वविद्यालय की अधिकारी का तबादला हो चुका है लेकिन अभी तक इनका तबादला नहीं हुआ है . उनके तबादले को लेकर एक सांसद महोदय ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उन्हें बताया है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यरत महिला अधिकारी ने स्थानांतरण नीतियों का उल्लंघन करते हुए लखनऊ में ही अधिकांश सेवा काल बिताया है. इसलिए उन्हें यथोचित नियमों के तहत स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए . समाजवादी पार्टी के भी एक वरिष्ठ नेता ने स्थानांतरण के लिए शासन से मांग की है.अब देखना यह महत्वपूर्ण है कि मैडम का ट्रांसफर होता है या स्थानांतरण नीति ही स्थानांतरित हो जाती है
राजधानी लखनऊ के एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कुछ ज्यादा ही नेतागिरी के मूड में आ गए हैं. इतना ज्यादा कि नेतागिरी के चक्कर में उन्होंने अपनी कुर्सी अपने सहयोगी को सौंप दी . अब जब वे कभी प्रधानाचार्य कक्ष में पहुंचते हैं तो पहले से उनके बैठे शिष्य तत्काल उठकर चरण रज लेते हैं और सादर कुर्सी प्राचार्य महोदय की ओर बढाते हैं . एक दिन की बात है कि शिष्य कुर्सी पर बैठे हुए थे तो एक सामाजिक संगठन की पदाधिकारी मौके पर पहुंची और उन्होंने संगठन को लेकर बातचीत शुरू ही की थी कि तब तक प्राचार्य महोदय आ गए और वे बीच में हस्तक्षेप करने लगे. पदाधिकारी को यह पसंद नहीं आया और उन्हें मालूम भी नहीं था कि यही महोदय प्रधानाचार्य हैं तो उसने उन्हें इग्नोर करने की कोशिश की इतने पर ही प्रधानाचार्य महोदय इतना भड़क गए कि उनसे ही कमरे से बाहर निकल जाने की बात कह दी.मामला बिगड़ गया दोनों तरफ से जो तरह तरह की बातें होने लगी लेकिन फिर जैसे तैसे शिष्य ने मामला सम्भाला और पदाधिकारी को विदा कर प्रधानाचार्य को कूल कूल किया . जानते हैं आप ये वही प्रधानाचार्य हैं जिनकी नौकरी चली गई थी लेकिन फिर मिल गयी है .
चुटकी गर्ल्स इंटर कॉलेज का भवन जर्जर होने के कारण उसे बंद करने के फैसले पर तरह-तरह की प्रतिक्रिया आ रही हैं लेकिन सबसे दुखद स्थिति उन अभिभावकों के लिए है जिनके बेटे बेटियाँ यहां अध्ययन करते थे, लेकिन इसके बावजूद यहां के कुछ टीचर्स की आपसी गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है तो कुछ लोगों के लिए आपदा में अवसर जैसी स्थिति बन गई है , क्योंकि इन टीचर्स और कर्मचारियों का समायोजन शिक्षा भवन से ही होना है . इसलिए बेहतर समायोजन के लिए भी दान दक्षिणा की चर्चा जोरों पर चल रही है, जिसका दान ज्यादा रहेगा उसका समायोजन अच्छे ढंग से होगा .
इस बीच विद्यालय के प्रबंधक ने एक वीडियो जारी कर सभी शिक्षकों , विद्यार्थियों और समाज को अद्भुत ज्ञान दिया है . उन्होंने कुछ नाम भी लिए हैं, जिन्हें इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार ठहराया है. कुल मिलाकर वे खुद को पाक साफ साबित करने में लगे हुए हैं , लेकिन वास्तविक स्थिति तो लखनऊ का शिक्षा जगत जानता ही है कि विद्यालय को संचालित कौन करता है ? फिलहाल उम्मीद की जानी चाहिए कि विद्यालय नए रंग रूप में पुनः अपने अस्तित्व में आएगा और महात्मा गांधी जी से जुड़ी यह धरोहर अपनी साख को बनाए रखने में पुनः सफल होगी.
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