- कार्यवाहक संस्था प्रधानों के अनुभव को लिखित परीक्षा उत्तीर्ण मान कर भर्ती हेतु साक्षात्कार में शामिल किया जाये : डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- सुप्रीम कोर्ट ने भी दस साल एक पद पर कार्यरत को स्थाई रूप से नियमित किये जाने संबंधी आदेश का प्रदेश में लागू करे योगी आदित्यनाथ सरकार : ओ पी त्रिपाठी
लखनऊ 18 म ई, । प्रदेश के गैर सरकारी ऐडेड माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में रिक्त संस्था प्रधानों के चयन में संबंधित शिक्षण संस्थानों दो वरिष्ठ शिक्षकों को पूर्ववत साक्षात्कार के लिए बुलाये जाने का प्रवधान सुनिश्चित किया जाय। इस मामले की ओर उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है।
संगठन का साफ तौर पर मानना है कि लगभग पंद्रह से बीस साल के इतने लम्बे संस्था प्रधानों के अनुभव को दरकिनार कर उन्हे चयन प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाना घोर अन्याय है। उनके अनुभव को ध्यान मे रख कर पहले की तरह साक्षात्कार में शामिल किया जाना जहाँ एक ओर उन्हे चयन मे अपने को सक्षम साबित किये जाने का मौका मिलेगा वही दूसरी ओर मामले अपने अधिकारों को लेकर न्यायालय में भी योजित होने से भी बचा जा सकेगा।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल, प्रदेश उपाध्य क्ष एवं संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी एवं महामंत्री आशीष कुमार सिंह तथा संयुक्त मंत्री मिथिलेश कुमार पांडेयने आज यहाँ जारी अपने बयान मे बताया कि इन शिक्षण संस्थानों में विगत बीस साल से भी अधिक समय से रिक्त तदर्थ संस्था प्रधानों द्वारा संस्था मे नियमित प्रधानों की तरह ही सभी दायित्वों का निर्वहन कराया जा रहा है। अब तक उन्हे न तो रेगुलर ही किया गया और अब ओपन प्रतियोगिता से भी उनकी लंबी उम्र के मद्देनजर उनकी सेवाओ को दरकिनार कर उन्हे पद से हटाये जाने का षड्यंत्र चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी लंबी सेवाओ को दृष्टिगत रखते हुए पदों को भरे जाने की प्रक्रिया में उन्हे साक्षात्कार में शामिल करने संबंधी प्रवधा न किये जाने की मांग योगी आदित्यनाथ सरकार से की है।
उन्होंने यह भी बताया कि इन सभी, 4512 ऐडेड माध्य मिक शिक्षण संस्थानों में से लगभग ढाई हजार से भी अधिक रिक्त पदों पर कार्यवाहक संस्था प्रधान तत्समय विद्यमान धारा 18ka के अंतर्गत तदर्थ रूप से पदोन्नति प्राप्त कर विगत दो दशकों से भी अधिक समय से कार्य करते हुए सभी दायित्वों का निर्वहन कर रहे है। पूर्व में गठित बोर्डों मे इस बात को ही ध्यान में रख कर स्थाई भर्ती करते समय संस्था के दो वरिष्ठ शिक्षकों को साक्षात्कार में शामिल किया जाता रहा है। अब वे सभी बोर्ड द्वारा निर्धारित चालीस वर्ष की आयु सीमा को भी पार कर चुके हैं। वे चाह कर भी चयन बोर्ड की परीक्षा में शामिल नहीं हो सके गे। यह कहाँ का न्याय है कि एक लंबी उम्र के कार्यवाहक संस्था प्रधान को जिन्हों ने पंद्रह से बीस साल तक लगाता र नियमित सस्था प्रधानो के समान ही संस्था प्रधान के समस्तदायित्व निर्वहन करने के बाद उन्हें अवसर तक न दिया जाना कहाँ का न्याय है। शिक्षक नेताओ ने इन सब को ध्यान में रख कर वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में वांछित संशोधन किये जाने की मांग को दोहराया है।
