लखनऊ ,17 मई , शासन -प्रशासन द्वारा शिक्षण कार्यो से इतर शिक्षक एवं शिक्षिकाओं की अन्य कार्यो में लगातार लगाकर छात्र, छात्राओ के भविष्य के साथ खिलवाड किये जाने पर उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पाण्डेय गुट ) ने कड़ा विरोध जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने आज यहाँ जारी अपने एक बयान में कहा कि बोर्ड द्वारा जारी शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित शिक्षण कार्य इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। शिक्षकों के कार्यो का हर मूल्यांकन उसके परीक्षा परिणाम से जोड़ कर ही किया जाता है। वहाँ गैर शैक्षिक कार्यो की ड्यूटी से प्रभावित हुए अध्ययन, अध्यापन पर कोई भी ध्यान ही नहीं दिया जाता है। इसके अलावा शिक्षकों को इतर लिए गए ड्यूटी के एवज़ मे कोई प्रतिकर अवकाश तक प्रदान नहीं किया जाता है, जबकि बोर्ड द्वारा यदि दीर्घावकाश में बोर्ड की ही ड्यूटी कराई जाती है तो उसे प्रतिकर अवकाश प्रदान करने का विधिवत प्रवधान है.

शिक्षक नेताओ ने उक्त मामले में प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि शिक्षक पर जोर जबरदस्त दबाव बना कर लिए जा रहे गैर शैक्षिक कार्यो को कराये जाने पर रोक नहीं लगायी गई तो संगठन आरपार के संघर्ष का रास्ता अपनाये जाने पर बाध्य होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों से गैर शैक्षिक कार्य न कराये जाने के लिए हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने अनेक आदेश तक जारी किया है। जिसकी अवमानना लगातार प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही साथ शिक्षकों निर्धारित पाठ्यक्रम को पूर्ण न होने पर उसे दंडित भी कर उसका उत्पीड़न लगातार हो रहा है। साथ ही साथ उसके परफार्मेंस को उसके रिजल्ट को ही देख कर अन्य बोर्डों के शैक्षिक स्तर से तुलना कर उसे जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि अन्य बोर्डों के शिक्षकों से शैक्षि क कार्यो से इतर अन्य कोई गैर शैक्षिक कार्य कतई नहीं लिये जाते हैं।

शिक्षक नेताओं ने शिक्षक , शिक्षिकाओं को ग्रीष्म कालीन अवकाश मे भी शिक्षा विभाग से इतर अन्य वाह्य परीक्षाओं मे ड्यूटी करने का फरमान दिया गया है। यहीं तक नहीं जनगणना कार्यो में भी पहली बार माध्यमिक शिक्षक शिक्षिकाओं की ड्यूटी लगा कर उसके बदले में भी प्रतिकर अवकाश प्रदान नहीं किया जा रहा है, तमाम शिक्षक शिक्षिकाये इस अवधि मे अपने अनेक प्रकार के बच्चो के साथ कार्यक्रम तक बना कर आरक्षण तक करा चुके हैं। प्रशासन इस पर संवेदन शीलता से विचार करने की जरूरत है। उसे अन्य कर्मियों की तरह अर्जित अवकाश एक महीने का नहीं मिलता है कि वह बाद मे अपना प्रोग्राम बना सके उसे साल मे मात्र एक दिन का ही अर्जित अवकाश मिलता है। यह उसके साथ घोर अन्याय ही नहीं उसके संवैधानिक अधिकारों पर भी जबरन कुठाराघात व न्यायालायीय आदेशों की प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के अधिकरियो द्वारा उल्लंघन है ।
