- पांडेय गुट ने किया पहले से निर्धारित अर्हता से नियुक्त शिक्षकों पर भी टेट अनिवार्य किये जाने का कड़ा विरोध
- टेट पास करने की अनिवार्य ता को लेकर शिक्षक हो रहे अवसाद के शिकार : डॉ जितेंद्र सिंह पटेल।
- शिक्षकों के एक लंबी सेवाओं के अनुभव को ही टेट पास मानकर उन्हें सेवाओं मे बनाये रखा जाय : त्रिपाठी
लखनऊ, 13 अप्रेल। प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में पूर्व से निर्धारित अर्हता के अनुसार विधिवत नियुक्त कार्यरत शिक्षकों को अब टेट की अर्हता मे लाये जाने का माध्य मिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने कड़ा विरोध किया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल, संगठन प्रवक्ता ओ पी त्रिपाठी, महामंत्री आशीष कुमार सिंह एवं संयुक्त मंत्री मिथिलेश कुमार पांडेय ने सूबे में टेट की अनिवार्यता लागू करने के पूर्व निर्धारित अर्हता उन पर अब लागू किया जाना शिक्षकों के साथ घोर अन्याय करार दिया है । उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 मे टेट पास करने का प्रवधान किया गया। अब यह कहा जाना कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच साल से अधिक है उन्हे दो साल के भीतर टेट पास करना जरूरी है, अन्यथा सेवा से विमुक्त किये जाने का आदेश सरासर गलत है और लागू करने वाले अधिकारियों का दिमागी दिवालियापन भी है। शिक्षक नेताओ ने बताया कि कोई भी संशोधन/ बदलाव शासनादेश निर्वत होने की तिथि से लागू होता है न कि पूर्व से नियुक्त लोगो पर। शिक्षक नेताओं ने दावा किया कि कोर्ट ने भी शिक्षा सेवा आयोग को पूर्व के हुए विज्ञापन में टेट की अर्हता जोड़ कर संशोधित विज्ञापन करने का आदेश जारी किया है।
ऐसा अभी तक शासन द्वारा नहीं किया गया है। पूर्व के सेवा शर्तों के तहत नियुक्त शिक्षकों पर टेट पास करने का कानून थोपा जाना विधिक रूप से भी असंवैधानिक है। उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का इस तरह मामले मे तत्काल हस्तक्षेप कर जन हित / शिक्षक हित में इस प्रकार के संशोधनो को वर्ष 2010 के बाद ही नियुक्त शिक्षकों पर लागू करने की मांग की है।
