लखनऊ , 20 मार्च प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में तथा विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की गरिमामयी उपस्थिति में हिन्दू नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जनभवन, लखनऊ में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जनभवन के सूचना प्रभाग एवं आईटी टीम द्वारा हिंदू नव वर्ष पर निर्मित एक आकर्षक डॉक्यूमेंट्री वीडियो के प्रदर्शन से हुआ, जिसमें भारतीय परंपरा, संस्कृति और नव संवत्सर के महत्व को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।
इसके उपरांत जन भवन कार्मिकों के बच्चों ने देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर विविध राज्यों की संस्कृति एवं वहाँ मनाए जाने वाले नव वर्ष के उत्सवों पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का सजीव चित्र प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अगले चरण में जनभवन के अधिकारियों एवं कार्मिकों की पत्नियों द्वारा विभिन्न राज्यों में मनाए जाने वाले हिंदू नव वर्ष से संबंधित लोकगीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने वातावरण को पूर्णतः उत्सवमय बना दिया।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं तथा कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले बच्चों, जनभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पत्नियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्योहारों को उत्साह और उल्लास के साथ मनाना चाहिए। ऐसे अवसरों पर घरों को सजाना, पारंपरिक व्यंजन बनाना तथा परिवार के साथ समय व्यतीत करना जीवन में आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसे अवसर आएं, उन्हें पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाना चाहिए।
राज्यपाल जी ने जीवन में संकल्प लेने पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समाज, बच्चों एवं माता-पिता के लिए कार्य करना चाहिए। दूसरों के लिए किए गए कार्यों से जो संतोष और प्रसन्नता प्राप्त होती है, वह किसी भी सेवा में नहीं मिल सकती। राज्यपाल जी ने जनभवन के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए वर्ष भर का एक समग्र कैलेंडर तैयार करने को कहा, जिसमें विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सभी आयु वर्ग के बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं पुरुषों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने भारतीय परंपराओं के वैज्ञानिक आधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्रह-नक्षत्रों की गणना के आधार पर ही हमारे त्योहार निर्धारित होते हैं। देश के विभिन्न राज्यों में हिंदू नव वर्ष अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है, किंतु इसके मूल में एक ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण निहित है। उन्होंने कहा कि समय के साथ हम इन परंपराओं के मूल कारणों को भूलते जा रहे हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है।

राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में हिंदू नव वर्ष के वैज्ञानिक आधार जैसे विक्रम संवत एवं पंचांग की गणना के विषय में विद्यार्थियों को जानकारी दिए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसी आधार पर हमारे सामाजिक एवं वैवाहिक मुहूर्त निर्धारित होते हैं। उन्होंने सभी से प्रसन्नचित्त रहने की अपील करते हुए कहा कि जीवन का आनंद लेना चाहिए तथा अपनी सीमाओं के अनुरूप जीवनयापन करना चाहिए। नव वर्ष के अवसर पर उन्होंने कुसंगति एवं दुष्प्रवृत्तियों का त्याग कर सदाचार एवं सकारात्मक जीवन शैली अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उपस्थित कार्मिकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि जिसे हम वर्ष 2026 के रूप में जानते हैं, हिंदू नव वर्ष के अनुसार वर्ष 2083 का प्रारंभ है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देवभूमि पर जन्म लेना उनका सौभाग्य है। भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में सहकार, सेवा, ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना, समस्त प्राणियों के प्रति सद्भावना तथा ‘धर्म की जय, अधर्म का विनाश’ जैसे आदर्श सदैव मार्गदर्शक रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का मूल स्वभाव धर्म होता है जैसे सूर्य का धर्म ऊष्मा प्रदान करना, चंद्रमा का धर्म शीतलता देना तथा पिता का धर्म अपने बच्चों का पालन-पोषण करना है।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के संरक्षण एवं मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होना सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदया के जनभवन में आगमन के पश्चात समस्त जनभवन परिवार को निरंतर स्नेह, मार्गदर्शन एवं संरक्षण प्राप्त हो रहा है, जिससे जनभवन एक सशक्त परिवार के रूप में विकसित हुआ है।

श्री महाना ने अपील की कि सभी लोग अंग्रेजी तिथि के साथ-साथ हिन्दी तिथियों के अनुसार भी अपना जन्मदिन मनाएं। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर पारंपरिक पकवान बनाना, मंदिर जाना और परिवार के साथ समय बिताना हमारी संस्कृति को सुदृढ़ करने का माध्यम बन सकता है।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और ज्ञान ने संपूर्ण विश्व को दिशा प्रदान की है। उन्होंने उल्लेख किया कि जहाँ आधुनिक संस्थाएं कभी-कभी खगोलीय घटनाओं के निर्धारण में असमर्थ होती हैं, वहीं हमारा हिंदू पंचांग वर्षों पूर्व ही ग्रह-नक्षत्रों की सटीक जानकारी प्रदान कर देता है। उन्होंने कहा कि हमारे पंचांग में संपूर्ण ब्रह्मांड की गहन जानकारी समाहित है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।
उन्होंने राज्यपाल को मातृ स्वरूप बताते हुए कार्यक्रम में आमंत्रण एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया तथा सभी से आह्वान किया कि नव वर्ष को संस्कृति और संस्कारों के साथ उल्लासपूर्वक मनाएं।
