लखनऊ/आनंद, 09 मार्च, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, वल्लभ विद्यानगर (गुजरात)( Sardar Patel University, Vallabh Vidyanagar ) के ऑटोनोमस कॉलेज एन.एच. पटेल कॉलेज ऑफ एजुकेशन, आनंद द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार “इंडिया 2026: वन नेशन, वन डेस्टिनी” में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ ( Dr. Ram Manohar Lohia National Law University Lucknow ) की शिक्षिका डॉ. अलका सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में बीज व्याख्यान प्रस्तुत किया।
Sardar Patel University, Vallabh Vidyanagar : अपने व्याख्यान में डॉ. अलका सिंह ने कहा कि वर्तमान भारत की संस्थाएं असीम अवसरों और प्रयासों की प्रयोगशालाएं हैं, जहां राष्ट्रीय संवादों के मायने मानवता को जीवंत और पोषित करते हैं। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे, संवैधानिक आदर्शों, स्वतंत्रता और विधि व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्रगति केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक, बौद्धिक और नैतिक मूल्यों के समन्वय से निर्मित होती है।

डॉ. सिंह ने अपने व्याख्यान में वेदों की ज्ञान परंपरा, विधि और साहित्य के अंतर्संबंध, शिक्षा की भूमिका, अवसंरचनात्मक विकास, सॉफ्ट डिप्लोमेसी तथा समकालीन भारत की प्रमुख पहलें जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि डेस्टिनी (नियति) पूर्वनिर्धारित नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसी दृष्टि है जो हमें एक विकसित राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है। यह तभी संभव है जब हम सतत विकास, समावेशी नीतियों और संवाद की संस्कृति को अपनाते हुए सभी के विकास और भागीदारी को सुनिश्चित करें।
सेमिनार में विभिन्न देशों और संस्थानों से आए विद्वानों ने भारत के समकालीन विकास, नीतिगत पहलों और वैश्विक भूमिका पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय एकता, समावेशी विकास और वैश्विक दृष्टि पर अकादमिक विमर्श को सुदृढ़ करना था।
Sardar Patel University, Vallabh Vidyanagar : डॉ अलका सिंह ने कहा कि भारत समेत दुनिया की महिलाओं ने प्राकृतिक विकास के मायनों को नए सिरे से परिभाषित किया है। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों और पहलुओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत ने अपने आयुर्वेद,योग शिक्षा, अध्यात्म और साहित्य के माध्यम से दुनिया को मानवीय मूल्यों को गढ़ने की नईं दिशा प्रदान की है।
