
- जारी तुगलकी फरमान , शिक्षक समुदाय की साख पर सवालिया निशान ओंम प्रकाश त्रिपाठी
- शासन के उच्च शिक्षा अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने पांडेय गुट ने की माँग
लखनऊ, 20 जुलाई , उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट ) ने बीते दो दिनों पहले यू पी बोर्ड द्वारा परिषद के विभिन्न वेब साइड पर पहली जुलाई से शिक्षकों एवं छात्रों की आन लाईन उपस्थिति दर्ज कराये जाने संबंधी जारी फरमान को तुगलकी फरमान की संज्ञा देते हुए कड़ा एतराज जताया है,। संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता ओंम प्रकाश त्रिपाठी ने इसे शिक्षकों की साख एवं उनके दायित्व निर्वहन पर शिक्षा विभाग के इस आदेश को सवालिया निशान बताते हुए नाराजगी जाहिर की है।
शिक्षक नेताओ ने कहा कि परिषद द्वारा बिगत तीस जून को जारी इस, तुगलकी आदेश मे कुछ नया कर दिखाने की लगी होड मे अब शिक्षकों एवं छात्रों की यू पी एम एस पी के पोर्टल के होम पेज एवं गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध यू पी एम एस पी अटेंडेंस मध्यम से लॉग इन कर उपस्थिति दर्ज कराये जाने का निर्देश जारी किया गया है। संगठन ने इसे विभाग द्वारा शिक्षकों के सम्मान के साथ खिलवाड किये जाने की संज्ञा देते हुए उच्च अधकरियो का ध्यान आकृष्ट कर उनसे हस्तक्षेप करने की माँग की है।

शिक्षक नेताओ ने कहा कि अब तक यह कार्य बायो मेट्रिक अटेंडेंस की पहले से ही व्यवस्था विद्यमान है। अधिनियम में विहित प्रावधानों के तहत उपस्थिति पंजिका एशिक्षण संस्थाओ मे विद्यमान है। अब शिक्षक समुदाय शिक्षण कार्य पर नियत समय सीमा के अंतर्गत ध्यान देने के स्थान पर पोर्टल पर अटेंडेंस लॉग इन कर अप लोड करने की कवायत मे उलझा रहेगा इसके चलते शिक्षण कार्य जो शिक्षण संस्थानों का या शासन का मूल उद्येश्य है करने में अपने को असहज शिक्षक समाज कर रहा है। शिक्षक नेताओ ने कहा कि संगठन इस आदेश को तानाशाही आदेश बताते हुए पूर्व से प्रावधानों को लागू किये जाने की दिशा में शासन से प्रभावी आदेश व दिशा निर्देश जारी कर प्रदेश में शैक्षिक वतावर न को व्यवधान उत्पन्न करने के बजाय समुचित वातावरण बनाऐ रखने का आग्रह किया है।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि विद्यालयो को अब मात्र प्रचार प्रसार के माध्यम और अनेकानेक आयेदिन सूचन्नाओ का आनलाईन ( Online Attendance in school) प्रेषण केंद्र बन कर रह गए हैं। इसी क्रम में आन लाईन शिक्षकों एवं छात्रों की उपस्थिति ( Online Attendance in school) का प्रतिदिन बोर्ड के पोर्टल पर प्रेषण का मामला और अलग से थोप दिया गया है। जबकि प्रतिदिन छात्र उपस्थिति पंजिका पर विगत एक सौ पांच वर्षो से किया जाता आ रहा है। कभी इस पर प्रश्नचिन्ह नही लगा है। बोर्ड द्वारा लिया गया यह निर्णय शिक्षकों के अस्मिता पर एक सवालिया निशान है, जिसको लेकर शिक्षकों में गहरा रोष व्याप्त है और संगठन इस फरमान ( Online Attendance in school) को वापसी की पुरजोर माँग करता है।
