विशेष लेख – ‘हमारी नदियां, हमारा भविष्य’
आज पूरी दुनिया में विश्व नदी दिवस (World Rivers Day) मनाया जा रहा है। हर साल सितंबर के अंतिम रविवार को यह दिन मनाया जाता है और इस साल यह 27 सितंबर को पड़ रहा है। विश्व नदी दिवस की शुरुआत वर्ष 2005 में नदी संरक्षण के लिए प्रसिद्ध कनाडाई पर्यावरणविद मार्क एंजेलो ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य है:नदियों के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना , नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए लोगों को प्रेरित करना, नदी संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों को सम्मान देना है ।
2026 की थीम है: “Waterways of Life: Protecting Our Rivers for All” अर्थात – जीवन की जलधाराएं: सभी के लिए हमारी नदियों की रक्षा।
क्यों जरूरी है नदी बचाना ?
भारत में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी जैसी 400 से ज्यादा बड़ी नदियां हैं, जो 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को पानी देती हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार:70% नदियों का पानी प्रदूषण के कारण पीने योग्य नहीं रहा . प्लास्टिक और फैक्ट्रियों का कचरा सबसे बड़ा कारण है विशेषज्ञों का कहना है, “नदी सिर्फ पानी नहीं है, ये हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है।
नदियों का एक भौतिक संसाधन के रूप में अंधाधुन उपयोग किए जाने के करण प्राकृतिक विकृत हो गया है आज हम यह कहने के लिए हम नहीं है कि छत्तीसगढ़ की कोई भी नदी बारहमासी या सदानीरा है l बड़े नदियों में बांधों का निर्माण रेत खनन जल विद्युत उत्पादन अतिक्रमण के कारण सभी नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता तंत्र बार-बार नष्ट हो जाता है प्रयास सभी नदियां गर्मी के दिनों में जनवरी महीना से सूखने लग जाती है मानसून आने पर फिर से बहती है यह सारी नदियां हमारी संस्कृति के पोषक हैं एक जल की धारा नहीं बल्कि संस्कृति है जब मैं उनको बरसात में पूरी घाटी में बहते हुए देखता हूं तो नदियों का असली रूप मुझे हरसो उल्लासित तो करता है साथ ही भय पैदा करता हैl शीत ऋतु में उसके निर्मल पानी में कार्तिक स्नान और अन्य पर्वत पर किए जाने वाले दीपदान मां को मोह लेता है लेकिन वही आज आधुनिकता के कारण हमारी नदियां गर्मी के दिनों में सूख जाती है हमारे संस्कार और सांस्कृतिक कार्यक्रम जो नदियों के घाट में होते हैं वह अवरोध हो जाते हैं.
पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के एसोसिएट प्रोफ़ेसर पीएल चंद्राकर का कहना है कि दुनिया के कई देशों में जैसे न्यूजीलैंड, कनाडा और बांग्लादेश जैसे देशों में नदियों को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया गया है तथा उसके लिए अभिभावक नियुक्त किया गया इसी प्रकार का प्रयास प्राकृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए छत्तीसगढ़ में भी किया जाना चाहिए l उन्होंने बताया छत्तीसगढ़ को नदियों का प्रदेश कहा जाता है। यहाँ चार अपवाह तंत्र हैं – महानदी, गोदावरी, गंगा और नर्मदा। राज्य की कुल जलधारा का 58.48% हिस्सा सिर्फ महानदी और उसकी सहायक नदियाँ समेटती हैं।महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा और छत्तीसगढ़ की गंगा कहा जाता है। धमतरी जिले के सिहावा पर्वत श्रेणी सेलंबाई: कुल 851 किमी, जिसमें से 286 किमी छत्तीसगढ़ में बहती है. धमतरी, महासमुंद, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ होते हुए ओडिशा जाकर बंगाल की खाड़ी में मिलती है। पीने के पानी, सिंचाई और प्राचीन सिरपुर सभ्यता का आधार के साथ साथ राज्य की सबसे बड़ी नदी है।
इसी प्रकार बस्तर पठार की प्रमुख नदी इंद्रावती है। यह गोदावरी की सहायक है और बस्तर जिले की सबसे बड़ी नदी है। जगदलपुर के पास इसी नदी पर चित्रकोट जलप्रपात बनता है, जिसे “भारत का नियाग्रा” कहा जाता है। शिवनाथ नदी महानदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। इसका उद्गम राजनांदगांव के पानाबारस पहाड़ी से होता है और यह शिवरीनारायण में महानदी से मिलती है। इसकी सहायक नदियाँ – हाफ, आगर, अरपा, लीलागर, खारुन हैं। इसी प्रकार हसदेव नदी महानदी की प्रमुख सहायक। यह कोरिया की पहाड़ियों से निकलती है और कोरबा के कोयला क्षेत्र में बहती है। इस पर हसदेव बांगो बहुउद्देशीय परियोजना बनी है, जो प्रदेश की सबसे बड़ी परियोजना है। नदियों का एक भौतिक संसाधन के रूप में अंधाधुन उपयोग किए जाने के करण प्राकृतिक विकृत हो गया है आज हम यह कहने के लिए हम नहीं है कि छत्तीसगढ़ की कोई भी नदी बारहमासी या सदानीरा है l
नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता तंत्र बार-बार नष्ट हो जाता है
बड़े नदियों में बांधों का निर्माण रेत खनन जल विद्युत उत्पादन अतिक्रमण के कारण सभी नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता तंत्र बार-बार नष्ट हो जाता है प्रयास सभी नदियां गर्मी के दिनों में जनवरी महीना से सूखने लग जाती है मानसून आने पर फिर से बहती है यह सारी नदियां हमारी संस्कृति के पोषक हैं एक जल की धारा नहीं बल्कि संस्कृति है जब मैं उनको बरसात में पूरी घाटी में बहते हुए देखता हूं तो नदियों का असली रूप मुझे हरसो उल्लासित तो करता है साथ ही भय पैदा करता हैl शीत ऋतु में उसके निर्मल पानी में कार्तिक स्नान और अन्य पर्वत पर किए जाने वाले दीपदान मां को मोह लेता है लेकिन वही आज आधुनिकता के कारण हमारी नदियां गर्मी के दिनों में सूख जाती है हमारे संस्कार और सांस्कृतिक कार्यक्रम जो नदियों के घाट में होते हैं वह अवरोध हो जाते हैं.
होगें विविध कार्यक्रम
इस अवसर पर आज सरकारी स्तर पर नमामि गंगे मिशन के तहत विशेष कार्यक्रम किये जा रहे हैं . उत्तर प्रदेश की बात करें तो आज वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने आज सुबह वाराणसी में गंगा आरती के बाद सफाई अभियान की शुरुआत की। सभी जिलों में डीएम द्वारा नदी तटों पर “नदी चौपाल” लगाई जा रही है, जहां नदी के किनारे रहने वाले लोगों से संवाद किया जा रहा है।
इसी प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने विशेष कार्यक्रम रखे हैं. इनमे रायपुर में महादेव घाट पर महानदी आरती और सफाई अभियान, जगदलपुर में चित्रकोट में स्कूली बच्चों द्वारा “इंद्रावती बचाओ” जागरूकता रैली, कोरबा में हसदेव नदी में औद्योगिक प्रदूषण पर कार्यक्रम होंगे . इसके साथ ही जल शक्ति विभाग की समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहले ही केंद्र से आग्रह किया है कि नौसेना के जहाजों का नाम INS महानदी और INS इंद्रावती रखा जाए, क्योंकि ये नदियाँ केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा हैं।
