

- कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र से हुआ जिसमें छात्रों ने ओज़ोन की पुनर्बहाली, वैश्विक तापन और सतत विकल्पों पर प्रश्न पूछे।
- प्राध्यापकों ने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने और अपने वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक पर्यावरणीय कार्यों में बदलने की प्रेरणा दी।
लखनऊ, 16 सितम्बर , लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में अंतर्राष्ट्रीय ओज़ोन दिवस 2025 ( World Ozone Day 2025 ) का आयोजन के.पी. विमल सभागार में किया गया। इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापकगण, शोधार्थी तथा विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रो. ध्रुव सेन सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने ओज़ोन परत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा – “ओज़ोन परत केवल एक वैज्ञानिक विषय नहीं बल्कि धरती पर जीवन का वास्तविक संरक्षक है। यह हमें हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है और इसका संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। ओज़ोन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व सीधे-सीधे इस पर निर्भर है कि हम अपने पर्यावरण के साथ कैसा व्यवहार करते हैं।”

lucknow university news : इसके बाद विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. शीला मिश्रा ने अपने उद्बोधन में वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा – “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल मानव इतिहास का सबसे सफल पर्यावरणीय समझौता रहा है, परंतु हमारी जिम्मेदारी यहीं समाप्त नहीं होती। जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित मानव गतिविधियाँ अब भी वायुमंडल पर गहरा दबाव डाल रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि युवा पीढ़ी न केवल इन विषयों का अध्ययन करे बल्कि समाधान खोजने में सक्रिय भागीदारी भी निभाए।” वक्ता का परिचय विभाग की शोधार्थी सुश्री सोनल शुक्ला ने प्रस्तुत किया।

lu news : विशेष व्याख्यान डॉ. चन्द्र मोहन नौटियाल, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, बिरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बी.एस.आई.पी.) ने प्रस्तुत किया। उन्होंने ओज़ोन परत के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए कहा – “ओज़ोन परत धरती की ‘सुरक्षात्मक छतरी’ है, जो हमें पराबैंगनी विकिरण से बचाती है। औद्योगिक गतिविधियों, क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के प्रयोग और ऊर्जा उपभोग के तरीकों ने इसकी स्थिति को गहराई से प्रभावित किया है। यद्यपि इसमें कुछ सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन मानवनिर्मित जलवायु परिवर्तन अब भी वायुमंडलीय संतुलन को बिगाड़ रहा है। इन जटिल संबंधों को समझना भविष्य की नीतियों और कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है।”

डॉ. नौटियाल ने विशेष रूप से छात्रों को संदेश दिया कि “वैज्ञानिक जागरूकता और जन-स्तर पर पर्यावरणीय जिम्मेदारी ही ओज़ोन परत और वातावरण को सुरक्षित रखने का वास्तविक उपाय है।”
कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र से हुआ जिसमें छात्रों ने ओज़ोन की पुनर्बहाली, वैश्विक तापन और सतत विकल्पों पर प्रश्न पूछे। प्राध्यापकों ने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने और अपने वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक पर्यावरणीय कार्यों में बदलने की प्रेरणा दी।
