लखनऊ, 29 मई ,उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समय-समय पर ऐसे आदेश जारी करते हैं जिससे न केवल राज्य सरकार की किरकिरी होती है , बल्कि शिक्षकों को भी अपमानित होना पड़ता है और वह सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगते हैं , जबकि सच यह है कि बरेली में भूसा दान करने खरीदने और लक्ष्य देने जैसे कार्य निहायत विभागीय स्तर पर अधिकारी कर रहे हैं इनमें कई अधिकारी अपने आका को खुश करने के लिए एक कदम बढ़ाकर आदेश जारी करते हैं
हालांकि जब बरेली के जिलाधिकारी से इस पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी आदेश की जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि जिले में बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहा है और इसके तहत भूसा बैंक बनाए जा रहे हैं. लोगों से स्वेच्छा के आधार पर भूसा दान की अपील की गई है, लेकिन शिक्षकों पर कोई बाध्यता नहीं है.
बरेली के जिला शिक्षा अधिकारी और वहीं के नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए भूसे से संबंधित आदेश इसी क्रम में है, एक BEO ने दूसरी तरह का आदेश जारी किया कि भूसा देना बाध्यकारी नहीं है, इन दो तरह के आदेश जारी होने के बाद जब शिक्षकों ने अपने अपमानित होने की बात कही और लगातार मीडिया में यह सुर्खियां बनी तो शिक्षा विभाग के वही अधिकारी बैक फुट पर आ गए , जिन्होंने यह आदेश जारी किया था, नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी सत्यदेव ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें उच्च स्तर से मिले निर्देशों के आधार पर पत्र जारी किया गया था. उन्होंने स्वीकार किया कि कार्रवाई वाला उल्लेख गलत तरीके से पत्र में शामिल हो गया था. बाद में इसे सुधारते हुए संशोधित पत्र जारी कर दिया गया है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह आदेश सही है और नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर जारी किया गया है तो फिर इसमें त्रुटि या संशोधन या फिर वापस लेने की क्या जरूरत है ? यह आदेश जारी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज बरेली को चाहिए कि वह अपने इसी आदेश पर अमल कराए और यदि उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने ऐसा उसे करने के लिए आदेशित किया है.
यह चिंता की बात है कि बेसिक शिक्षा विभाग ही नहीं बल्कि माध्यमिक शिक्षा विभाग भी ऐसे ही अधिकारियों को समय-समय पर प्रोत्साहित करता है जो नाहक विवाद खड़ा करते हैं . माध्यमिक शिक्षा विभाग के ही अपर निदेशक को बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव का कार्यभार मिला हुआ है. दोनों महत्वपूर्ण पद है . इसके बावजूद एक ही व्यक्ति के पास इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है और इस तरह के आदेश निकल जा रहे हैं. यह कोई पहला आदेश नहीं है जिससे शिक्षकों को अपमानित होना पड़े और अधिकारियों को आदेश वापस लेने या संशोधित करना पड़ा हो .
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