लखनऊ | नवयुग कन्या महाविद्यालय, राजेंद्र नगर, लखनऊ के ‘elan’ (इंग्लिश लिटरेरी एसोसिएशन ऑफ नवयुग) द्वारा 15 अक्टूबर को विद्यार्थियों की रचनात्मकता, साहित्यिक अभिरुचि एवं अभिव्यक्ति कौशल को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महाविद्यालय के सभागार में ‘ओपन माइक प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के कुल 21 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
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कार्यक्रम का संचालन डॉ. रीमा छाबड़ा ने किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी एवं प्रो. मंजुला यादव सम्मिलित रहीं। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की संरक्षिका प्रो. मंजुला उपाध्याय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपने विचारों के प्रति जागरूक रहने, राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों पर अपनी राय विकसित करने तथा नियमित रूप से पढ़ने और अपने आसपास की घटनाओं के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन को अनेक घटनाएँ और परिस्थितियाँ प्रभावित करती हैं, इसलिए जागरूक एवं विचारशील नागरिक बनना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने elan समिति के सदस्यों के प्रयासों और योगदान की सराहना की।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कविता, भाषण और हास्यपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों, लैंगिक समानता, मानवीय मूल्यों तथा सामाजिक रूढ़ियों पर अपने विचार व्यक्त किए। अरुधंति यादव ने मानवीय समानता और दूसरों का आकलन करने की प्रवृत्ति पर विचार रखे। दीप्ति सेंगर ने अपनी प्रभावशाली आवाज़ के माध्यम से लैंगिक हिंसा और पीड़ितों को दोषी ठहराने की मानसिकता का विरोध किया। मुस्कान मिश्रा ने श्रीमदभगवद्गीता की शिक्षाओं पर आधारित कविता प्रस्तुत की, जबकि निधि ने गीता के ज्ञान और कर्मनिष्ठा के महत्व को रेखांकित किया।

निकिता सिंह ने ‘हाँ, मैं लड़की हूँ’ कविता के माध्यम से स्त्री की पहचान और आत्मसम्मान को अभिव्यक्त किया। निकिता दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति और उनके लिए निर्धारित रूढ़िबद्ध भूमिकाओं पर प्रकाश डाला। श्रुति ने ‘संघर्ष’ विषय पर अपने वक्तव्य के माध्यम से चुनौतियों का सामना करने और निरंतर स्वयं को बेहतर बनाने का संदेश दिया। वर्तिका श्रीवास्तव ने ‘परफेक्ट लड़की बनने का दबाव’ विषय के माध्यम से समाज की अपेक्षाओं और दूसरों के निर्णयों से उत्पन्न मानसिक दबाव को उजागर किया।
वैदेही यादव ने अंग्रेज़ी भाषा, उच्चारण और उसे सीखने से जुड़े सामाजिक दबावों को एक हास्यपूर्ण कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया। अंशिका सिंह ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से मानवीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि ईश्वर नहीं, बल्कि हमारी मानवता खतरे में है।
प्रतियोगिता की निर्णायक मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा होती है और आवश्यकता केवल उसे अभिव्यक्त करने के उचित अवसर की है। उन्होंने कहा कि ओपन माइक का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ वे कविता, कहानी अथवा समसामयिक मुद्दों के माध्यम से अपने विचारों और प्रतिभा को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने अपनी स्वरचित कविता की भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम के माहौल को और भी जीवंत एवं प्रभावशाली बना दिया।
प्रो. मंजुला यादव ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जो विद्यार्थी मंच पर आकर अपने विचारों और प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का साहस दिखाता है, वह अपने आप में विजेता है। मंच पर उपस्थित होना स्वयं में आत्मविश्वास, साहस और रचनात्मकता का परिचायक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिता के परिणामों में वैदेही यादव एवं निकिता दीक्षित ने प्रथम स्थान, शुभी सिंह ने द्वितीय स्थान तथा निधि बाजपेयी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार मुस्कान मिश्रा, दीप्ति सेंगर एवं दर्शना उपाध्याय को प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता कोतवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा निर्णायक मंडल, प्रतिभागियों, आयोजन समिति और उपस्थित सभी अतिथियों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. संगीता कोतवाल, प्रो. सीमा सरकार, डॉ. नेहा पांडेय एवं डॉ. रीमा छाबड़ा के संयोजन में किया गया। कार्यक्रम में प्रो. वंदना द्विवेदी, प्रो. विनीता सिंह, सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मविश्वास विकसित करने तथा सामाजिक विषयों पर स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया।
