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लखनऊ | महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेंद्र नगर लखनऊ के संस्कृत विभाग तथा संस्कृत ग्लोबल फोरम के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय की अध्यक्षता में एवं प्रोफेसर वंदना द्विवेदी के संयोजकत्व में रामायण में राष्ट्रीय मूल्य विषय पर एकदिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में मंगलाचरण डॉक्टर वंदना द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत किया गया तथा इस कार्यक्रम के मुख्य विद्वान वक्ता प्रोफेसर बैकुंठनाथ शुक्ला विभागाध्यक्ष संस्कृत नेहरू मेमोरियल शिवनारायण दास पीजी कॉलेज बदायूं में कार्यरत हैं आभासी मंच पर उपस्थित रहे और विशिष्ट विद्वान वक्ता संत प्रकाश तिवारी जी जो पूरब का ऑक्सफोर्ड कहा जाने वाला प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के संस्कृत विभाग में सहायक आचार्य के रुप में कार्य रत है आभासी मंच पर उपस्थित रहे।
प्रोफेसर बैकुंठ नाथ शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि मूल्यात्मक राष्ट्रबोध का आदि स्त्रोत महर्षि वाल्मीकि प्रणीत रामायण है ।रामायण के राष्ट्रीय मूल्य आज भी भारतीय लोक जीवन में शासन व्यवस्था तथा नागरिक चेतना के लिए बहुत ही उपादेय है। भारतीय चिंतन परंपरा में राष्ट्र शब्द वैदिक काल से ही एक सजीव चेतन एवं मूल्य निष्ठ इकाई के रूप में गृहीत है पृथ्वी और नागरिक के बीच केवल स्वामित्व नहीं अपितु मातृ पुत्र संबंध की स्थापना करता है रामायण इसी वैदिक राष्ट्र दृष्टि का काव्यात्मक विस्तार है। विशिष्ट विद्वान वक्ता डॉक्टर संत प्रकाश तिवारी ने कहा कि रामायण का संपूर्ण कथानक अधिकार नहीं कर्तव्य की गाथा है श्री राम को राज्य का वैधानिक अधिकार प्राप्त था किंतु उन्होंने पिता के वचन की रक्षा हेतु उसका परित्याग किया भारतीय राज परंपरा में सत्ता हस्तांतरण का इससे उदात्त प्रतिमान अन्यत्र दुर्लभ है। रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है अपितु मूल्य शिक्षा एवं नागरिक शास्त्र के आदि स्रोत के रूप में भी सार्वभौम प्रसिद्ध है।
प्राचार्या मंजुला उपाध्याय ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रामायण का सर्वाधिक क्रांतिकारी पक्ष उसका समावेशी दृष्टि है निषाद राज गुह को श्री राम ने सखा कहकर आलिंगनबद्ध किया और शबरी के आतिथ्य को उन्होंने पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार किया गृधराज जटायु का अंत्येष्टि संस्कार उन्होंने पिता के समान संपन्न किया वानर -ऋछ समुदाय को उन्होंने आश्रित नहीं बल्कि सहयोगी एवं मित्र के रूप में प्रतिष्ठित किया इस प्रकार श्री राम की यात्रा समाज के हासिये पर स्थित समुदायों के साथ आत्मीय संबंध निर्माण की यात्रा का भी उदाहरण है। संस्कृत ग्लोबल फोरम के महासचिव डॉ राजेश मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर वन्दना द्विवेदी के द्वारा किया गया ।धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रीता तिवारी के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रोफेसर विनीता सिंह डॉ सुनीता सिंह डॉ ऐश्वर्या सिंह प्रोफेसर सीमा पांडे डाक्टर मेघना यादव, बिहार दरभंगा विश्वविद्यालय से डॉ आलोक रंजन तिवारी डॉक्टर योगेंद्र तिवारी डॉक्टर उमेश शुक्लाआदि सम्मानित प्रवक्ता गण, शोध छात्र छात्राएं आदि उपस्थित रहे।
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