लखनऊ , 24 मार्च , माँ गोमती दर्शन पदयात्रा को लेकर वृहद स्तर पर तैयारियां चल रही हैं. गोमती उद्गम स्थल, माधवटांडा (पीलीभीत) से 28 मार्च को शुरू होने वाली यात्रा को लेकर काफी उत्साह है और पूरी आयोजन समिति कार्यक्रम को भव्य बनाने में लगी है . माँ गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। आज आवश्यकता है कि हम सब मिलकर माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के लिए आगे आएं। इसी उद्देश्य से गोमती दर्शन पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है।
दिनांक: 28 मार्च से 5 अप्रैल 2026
प्रारंभ: गोमती उद्गम स्थल, माधवटांडा (पीलीभीत)
समापन: कुड़िया घाट, लखनऊ
यात्रा के प्रमुख उद्देश्य:
▪️ माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाना
▪️ जन-जन में नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना
▪️ सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का संरक्षण
▪️ माँ गोमती को पुनः उसका सम्मान दिलाना

आयोजक अवनीश कुमार अवस्थी से मिले
गोमती दर्शन पदयात्रा के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी से शिष्टाचार भेंट कर एक अत्यंत सार्थक एवं सकारात्मक वार्ता संपन्न हुई।
इस अवसर पर हमने गोमती दर्शन पदयात्रा के उद्देश्यों, इसकी सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्ता पर विस्तार से चर्चा की। अवस्थी जी ने पूरे विषय को गंभीरता से सुना तथा अपने बहुमूल्य सुझावों एवं मार्गदर्शन से हमें प्रेरित किया।यह भेंट निश्चित रूप से माँ गोमती के संरक्षण एवं जनजागरण के इस अभियान को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करने वाली सिद्ध होगी।

केवल एक पदयात्रा नहीं
गोमती दर्शन यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि माँ गोमती के प्रति श्रद्धा, संवेदना और जिम्मेदारी का जीवंत आह्वान है।
माँ गोमती, जो करोड़ों लोगों की जीवनरेखा हैं, आज प्रदूषण और उपेक्षा से पीड़ित हैं—यह यात्रा हमें इस सच्चाई से जोड़ती है।
जब हम उनके तटों पर चलते हैं, तो केवल मार्ग नहीं नापते, बल्कि अपने भीतर की चेतना को जाग्रत करते हैं।
यह यात्रा बताती है कि जल ही जीवन है, और नदियों का संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा है।
तथ्य यह है कि गोमती नदी का प्रवाह और जल गुणवत्ता निरंतर प्रभावित हो रही है, जिसे जनभागीदारी से ही सुधारा जा सकता है।
संयोजक एडवोकेट अनुराग पाण्डेय के अनुसार इस पदयात्रा में शामिल होकर हम केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन के सहभागी बनते हैं। यह यात्रा हमें सनातन परंपरा की उस भावना से जोड़ती है, जहाँ नदियों को माता का दर्जा दिया गया है। हर कदम के साथ हम संकल्प लेते हैं कि माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाएंगे। यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों का प्रश्न है। इसलिए गोमती दर्शन यात्रा में चलना एक अवसर नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य और धर्म है।
