लखनऊ । उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) द्वारा गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi ) के पावन अवसर पर आज 13 सितम्बर को हजरतगंज मेट्रो स्टेशन में प्रतिभाशाली छायाचित्रकार पुनीत कात्यायन की एकल छायाचित्र प्रदर्शनी “द नेचुरल फॉर्म्स ऑफ गणेशा” का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना हैं। प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने किया।
‘गजानन’ भगवान गणेश ( Ganesh Chaturthi ) का एक अत्यंत प्रिय नाम है—‘गज’ अर्थात हाथी और ‘आनन’ अर्थात मुख। वे बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और विघ्नों का नाश करने वाले प्रथम पूज्य देव माने जाते हैं। इसी सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना को प्रकृति में खोजने का प्रयास इस प्रदर्शनी का मूल भाव है।

प्रदर्शनी ( Ganesh Chaturthi ) में वृक्षों की छाल, तनों और प्राकृतिक बनावटों में स्वतः उभरते भगवान गणेश के 20 विविध प्राकृतिक स्वरूप प्रस्तुत किए गए हैं। इन छवियों की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि पुनीत कात्यायन ने इन्हें केवल 2 से 3 इंच के अत्यंत छोटे प्राकृतिक फ्रेम में खोजकर कैमरे में कैद किया, जिन्हें प्रदर्शनी ( Ganesh Chaturthi ) के लिए बड़े आकार में प्रस्तुत किया गया। इससे उनकी सूक्ष्म दृष्टि, धैर्यपूर्ण अवलोकन और तकनीकी दक्षता स्पष्ट रूप से सामने आती है।

पुनीत कात्यायन पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से प्रकृति, अध्यात्म और दृश्य-कथा (Visual Storytelling) पर कार्य कर रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट्स से कला-शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने लंबे समय तक विज्ञापन जगत में आर्ट डायरेक्टर के रूप में कार्य किया। वर्तमान में वे एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
उनकी चर्चित ‘ट्री बार्क सीरीज़’ वृक्षों की छाल में छिपे प्राकृतिक रूपों और आकृतियों की खोज है। ‘गजानन’ श्रृंखला ( Ganesh Chaturthi ) उसी कलात्मक यात्रा का आध्यात्मिक विस्तार है, जहाँ घायल, कटे और समय की मार झेल चुके वृक्षों में भी सृजन, आस्था और जीवन की उपस्थिति दिखाई देती है। इन छवियों में प्रकाश, बनावट और रंगों का कोई कृत्रिम हस्तक्षेप नहीं है; प्रकृति स्वयं कलाकार बनकर सामने आती है।

क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने कहा कि फोटोग्राफी लेखन के बाद संप्रेषण की सबसे प्रभावशाली दृश्य भाषा है। प्रकृति की अनगिनत बनावटें हमारी कल्पना, संवेदना और सौंदर्यबोध को विस्तृत करती हैं। पुनीत कात्यायन की यह प्रदर्शनी दर्शाती है कि एक संवेदनशील दृष्टि साधारण वृक्ष-छाल में भी दिव्यता, नवाचार और आध्यात्मिक अनुभूति खोज सकती है। यह प्रदर्शनी केवल छायाचित्रों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण चेतना और भारतीय सांस्कृतिक स्मृति का एक कलात्मक संवाद है। प्रदर्शनी में पंचानन मिश्रा, अविनाश लिटिल, अंगद वर्मा, दिनेश आर्या, आनंद कुमार सहित बड़ी संख्या में कला-प्रेमी, कलाकार, छायाकार, विद्यार्थी और आम नागरिक उपस्थित रहे तथा प्रकृति, आस्था और कला के इस अनूठे संगम का अनुभव किया। यह प्रदर्शनी 17 सितंबर तक आम जन के अवलोकनार्थ लगी रहेगी।
