
- माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग की सेवा सुरक्षा की धारा 21 समाप्त होने के पश्चात एक्ट 1921 की पूर्व से प्रावधानित सेवा सुरक्षा की धारा १६ छ की उप धारा (३ क) के तहत कार्य वाईयों की हुई अच्छी शुरूआत – डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- शिक्षा सेवा आयोग गठन के बाद पूर्व की सेवा सुरक्षा की धारा 21 समाप्त हो जाने के से पहले इंटरमीडिएट एक्ट 1921 की धारा १६ की उप धारा (३ क) मे विद्यमान सेवा सुरक्षा के तहत किये गए सकारात्मक संघर्ष का रहा परिणाम -ओम प्रकाश त्रिपाठी
- जारी आदेश से शिक्षकों मे शिक्षा सेवा आयोग मे प्रावधान होने तक एक्ट 1921 के प्रवधान से बढ़ेगा कानूनी सुरक्षा के प्रति सम्मान – मिथिलेश कुमार पांडेय
- शिक्षा विभाग द्वारा सेवा सुरक्षा प्रदान करने में अच्छी पहल की शुरूआत
लखनऊ, 01 अक्तूबर, स्थानीय चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज ( chutki bhandar girls college lucknow) के प्रबंधक को करारा झटका लगा है . प्रबंधतंत्र द्वारा गैरकानूनी तरीके से संस्था प्रधान सुमन शुक्ला के किये गये निलंबन से लेकर सेवा बर्खास्तगी तक की तानाशाही पूर्ण कार्यवाही को कानूनी दायरे में अमान्य कर शिक्षिका को डीआईओएस लखनऊ , राकेश कुमार ने सेवा सुरक्षा प्रदान कर दी है।
chutki bhandar girls college lucknow : इस मामले को पांडेय गुट ने राजधानी में इस असंवैधानिक कार्यवाही को शिक्षकों के सम्मान की लडाई मानकर संघर्ष जारी रखे हुए था। जिस पर शिक्षा विभाग ने अन्याय पूर्ण कार्यवाई को न्याय की मोहर लगा कर न्याय प्रदान किया है। शिक्षा विभाग की इस कार्यवाही से जहाँ एक ओर सेवा सुरक्षा हेतु पूर्व अधिनियमित् व्यवस्था समाप्ति से शिक्षकों मे पुनः स्थापित होने तक एक्ट 1921 में उपलब्ध सेवा सुरक्षा के प्रति आस्था बढेगी, वही गलत कार्य करने की कुप्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा .
पांडेय गुट प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने डी आई ओ एस लखनऊ के जारी अमान्य आदेश पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि संगठन के प्रयास से संस्था प्रधान डॉ सुमन शुक्ला को निलंबन अवधि से बर्खास्तगी तक की कुल अवरुद्ध सात माह के वेतन में से छ माह का केवल एक माह का छोड़ कर वेतन भुगतान भी विभाग द्वारा हो गया है। उन्होंनें इसे अन्याय पर न्याय की जीत एवं अहंकार पर स्वाभिमान की जीत बताया है।
उक्त के मामले में संस्था प्रबंधक द्वारा शिक्षिका के विरुद्ध की गई कार्यवाही को DIOS राकेश कुमार ने इंटरमीडिएट एक्ट 1921 में सेवा सुरक्षा संबंध में विद्यमान व्यवस्था धारा १६ (३ क) के सर्वथा विपरीत बताते हुए प्रकरण को अमान्य कर विद्यालय को वापस कर सेवा सुरक्षा प्रदान की है।
