
रायपुर. 13 मार्च 2020 से अब तक ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है. 2 अगस्त 2021 से ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद भी शिक्षकों को ऑनलाइन के लिए बाध्य किया जा रहा है. उनसे बदसलूकी भी हो रही है. साथ ही मानसिक समस्याओं से शिक्षक जूझ रहे हैं.
बिलासपुर के एक वरिष्ठ शिक्षक संस्कार श्रीवास्तव ने बताया कि लगातार मोबाइल से पढ़ाने के कारण स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. वहीं बहुत से निजी स्कूलों में आए दिन गूगल मीट से पढ़ाई के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी ऑनलाइन क्लास में शामिल हो जाते हैं. जो अध्यापन को प्रभावित करते हैं. विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों के बीच इस बात की चर्चा होती रहती है. क्लास के लिए भेजी गई लिंक को कुछ छात्र दूसरे स्कूल के छात्रों को फॉरवर्ड कर देते हैं.
ऐसे हैं बाहरी छात्र, साथी देते हैं लिंक
ऐसे बाहरी छात्र इन्हीं लिंक के जरिए शिक्षकों को डिस्टर्ब करते हैं और छात्राओं पर तरह-तरह की फब्तियां कसते हैं,ऐसे में पूरी कक्षा का माहौल खराब होता है और बच्चों को भी अपमानित होना पड़ता है। शिक्षक असहाय सा बना रहता है और मजबूरी में कक्षाओं को ऑफ करने की कोशिश करता है लेकिन उसे बच्चों कीपढ़ाई होने का नुकसान भी सताता रहता है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार अब ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेकर ऑफ लाइन कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित कराए।
निजी स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई से मुक्त करे शासन
इन बिंदुओं से समझिए पूरे मामला
- स्कूल अब पूरे समय के लिए लग रहे हैं. करीब 4 घंटे लगातार बच्चों को मोबाइल से ऑनलाइन पढऩा पड़ता है. मोबाइल का नेट बेतहाशा खर्च हो रहा है.
- मोबाइल नंबर सार्वजनिक होने से शिक्षकों की निजी जिंदगी प्रभावित हो रही है. उनको लगता है कि वे स्कूल के बाद भी सार्वजनिक जीवन जी रहे हैं.
- शिक्षकों का अनुभव है कि मोबाइल से आनलाइन पढाई कारगर नहीं है खासकर गणित साईंस इंग्लिश जैसे विषयों के लिए.
- आनलाइन सुविधा मिलने से पेरेन्ट्स अब बच्चों को आफलाइन पढाई के लिए स्कूल नहीं भेज रहे हैं. जबकि कोरोना अभी नियंत्रण में है.
