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अयोध्या , 08 जून अयोध्या केवल एक धार्मिक नगर नहीं है, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और साहित्य की दीर्घकालिक स्मृतियों का जीवंत केंद्र भी है। भारतीय जनमानस में इसका स्थान मर्यादा, आदर्श और सांस्कृतिक चेतना की राजधानी के रूप में स्थापित है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित सप्तपुरियों में अयोध्या को प्रथम स्थान प्राप्त है।
यह नगर रामकथा की परंपरा के माध्यम से हजारों वर्षों से भारतीय जीवन-मूल्यों का संवाहक बना हुआ है। यहाँ की गलियों, घाटों, मंदिरों और लोकजीवन में इतिहास, आस्था और संस्कृति एक साथ स्पंदित होते दिखाई देते हैं। सरयू नदी के तट पर विकसित यह नगर भारतीय आध्यात्मिक चिंतन, लोक-विश्वास और सांस्कृतिक निरंतरता का अद्भुत उदाहरण है। यही कारण है कि अयोध्या केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मानस की एक स्थायी अनुभूति है।
All India Artists Camp – Colors of Ayodhya : साहित्य की दृष्टि से भी अयोध्या का योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा है। संस्कृत के आदिकवि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण से लेकर गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस तक, अयोध्या भारतीय साहित्य की प्रेरणाभूमि रही है। हिंदी, अवधी, संस्कृत, उर्दू और अन्य भारतीय भाषाओं में रचित असंख्य काव्य, लोकगीत, नाटक और कथाएँ अयोध्या की सांस्कृतिक स्मृतियों से अनुप्राणित हैं। यहाँ की लोकपरंपराएँ, रामलीला, भजन-गायन, लोकनृत्य और उत्सवधर्मिता भारतीय लोक-संस्कृति की समृद्ध विरासत को आज भी जीवित रखे हुए हैं। आधुनिक समय में तीव्र गति से विकसित होते हुए भी अयोध्या अपनी सांस्कृतिक आत्मा को अक्षुण्ण बनाए हुए है। परंपरा और आधुनिकता का यह अद्वितीय संगम कलाकारों, साहित्यकारों और चिंतकों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। यही कारण है कि “कलर्स ऑफ अयोध्या” जैसा राष्ट्रीय कलाकार शिविर इस नगर में आयोजित होना केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के साथ एक सृजनात्मक संवाद भी है।
अयोध्या और व्यापक अवध क्षेत्र की पहचान उसके प्राचीन इतिहास और धार्मिक महत्ता के साथ ही उन समकालीन विभूतियों से भी निर्मित होती है जिन्होंने साहित्य, संगीत, पत्रकारिता, सामाजिक चिंतन, राजनीति, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। इन व्यक्तित्वों ने अपनी प्रतिभा और कर्मशीलता के माध्यम से इस क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। संगीत के क्षेत्र में बेगम अख्तर का नाम सर्वप्रथम स्मरणीय है। उन्हें ग़ज़ल, दादरा और ठुमरी की मलिका कहा जाता है। उनकी गायकी में अवध की तहज़ीब, संवेदनशीलता और सौंदर्यबोध का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय संगीत को ऐसी ऊँचाइयों तक पहुँचाया कि आज भी उनका नाम संगीत-जगत में श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
उर्दू साहित्य और शायरी की दुनिया में बशीर बद्र, वसीम बरेलवी और कुँवर नारायण जैसे रचनाकारों ने अवध की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई। उनकी कविताओं और शायरी में मानवीय संवेदनाएँ, प्रेम, सामाजिक सरोकार और जीवन-दर्शन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त हुए हैं। उनके अशआर आज भी जनस्मृति का हिस्सा हैं और नई पीढ़ी को साहित्य की ओर आकर्षित करते हैं। समाजवादी चिंतन और भारतीय राजनीति के क्षेत्र में डॉ. राममनोहर लोहिया का योगदान असाधारण है। अवध की भूमि से जुड़े इस महान चिंतक ने भारतीय लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समानता के प्रश्नों को नई वैचारिक दिशा प्रदान की। उनके विचार आज भी राजनीतिक विमर्श और सामाजिक आंदोलनों को प्रभावित करते हैं। चित्रकला और दृश्य कला के क्षेत्र में भी अयोध्या (अवध) ने अनेक महत्त्वपूर्ण कलाकारों को प्रेरित किया है। समकालीन भारतीय कला में सक्रिय अनेक चित्रकार, मूर्तिकार और कला-चिंतक इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत से प्रभावित रहे हैं। अयोध्या की स्थापत्य परंपरा, लोकजीवन, धार्मिक उत्सव, सरयू तट और रामकथा की सांस्कृतिक स्मृतियाँ आज भी कलाकारों की रचनात्मकता को ऊर्जा प्रदान करती हैं। स्व नन्दलाल पाण्डेय और सम्प्रति में डॉ. अवधेश मिश्र जैसे कलाकार और कला-चिंतक भारतीय समकालीन दृश्य कला को राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। कला-सृजन के साथ-साथ कला-लेखन, आलोचना और सांस्कृतिक विमर्श में उनकी सक्रियता उल्लेखनीय है।
भारतीय कला-जगत में ऐसे अवसर विरले ही आते हैं जब देश के विभिन्न सांस्कृतिक भूभागों से आए कलाकार एक ही मंच पर एकत्र होकर अपनी सृजनात्मक दृष्टियों का आदान-प्रदान करते हैं। कला दीर्घा, अंतर्राष्ट्रीय दृश्यकला पत्रिका और जेबीएनएसए, अयोध्या द्वारा 15 से 19 जून 2026 तक अयोध्या में आयोजित होने वाला “ऑल इंडिया आर्टिस्ट कैंप – कलर्स ऑफ अयोध्या” ऐसा ही एक महत्त्वपूर्ण आयोजन है, जो न केवल कला-सृजन का उत्सव है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता और कलात्मक चेतना का एक महत्त्वपूर्ण समागम है। कला दीर्घा इंटरनेशनल जर्नल ऑफ विजुअल आर्ट तथा जेबीएनएस सोसायटी, अयोध्या के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह शिविर देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिष्ठित कलाकारों को एक मंच पर लाएगा, जहाँ वे अयोध्या की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से प्रेरणा लेकर नए कलात्मक आयामों का सृजन करेंगे। इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसमें भाग लेने वाले कलाकारों का विविध और समृद्ध रचनात्मक अनुभव है। प्रत्येक कलाकार अपने साथ एक विशिष्ट कलाभाषा, जीवनानुभव और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि लेकर आ रहा है, जिससे यह आयोजन एक बहुआयामी कला-संवाद में परिवर्तित हो जाएगा।
All India Artists Camp – Colors of Ayodhya : बिहार से आने वाले पद्मश्री श्याम शर्मा भारतीय प्रिंटमेकिंग के क्षेत्र में एक अत्यंत सम्मानित नाम हैं। उनके कार्यों में भारतीय ग्रामीण जीवन, लोक-संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का गहरा समावेश दिखाई देता है। दशकों से वे भारतीय ग्राफिक कला को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करते रहे हैं। उनकी कलाकृतियाँ देश-विदेश के अनेक संग्रहालयों और निजी संग्रहों का हिस्सा हैं। प्रिंटमेकिंग के माध्यम से उन्होंने भारतीय लोक-स्मृतियों और सामाजिक यथार्थ को जिस संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया है, वह उन्हें समकालीन भारतीय कला के अग्रणी कलाकारों में स्थापित करती है। महाराष्ट्र से सहभागी रामचंद्र खरतमल समकालीन भारतीय चित्रकला के प्रमुख हस्ताक्षरों में गिने जाते हैं। रंगों और संरचनाओं के प्रति उनकी गहरी समझ उनके चित्रों को विशिष्ट पहचान देती है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनेक प्रदर्शनियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। उनके चित्रों में आधुनिक जीवन, प्रकृति और मानवीय अनुभवों का एक संतुलित सौंदर्यबोध दिखाई देता है। हरियाणा के वरिष्ठ कलाकार और कला शिक्षाविद् डॉ. राम विरंजन कला और शिक्षा के क्षेत्र में समान रूप से प्रतिष्ठित हैं।
उन्होंने अनेक पीढ़ियों को कला की शिक्षा प्रदान की है तथा अपनी रचनात्मक साधना के माध्यम से भारतीय चित्रकला को समृद्ध किया है। उनके चित्रों में भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिकता और समकालीन संवेदनाओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। गुजरात के सुप्रसिद्ध कलाकार कनु पटेल भारतीय कला-जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं। चित्रकार होने के साथ-साथ वे कला-प्रशासन और सांस्कृतिक नेतृत्व में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उनके चित्रों में भारतीय जीवन के रंग, लोक-संस्कृति और आधुनिक कलाभाषा का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
All India Artists Camp – Colors of Ayodhya : कला के क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक स्तर पर सराहा गया है। तेलंगाना की चर्चित कलाकार अर्पिता रेड्डी भारतीय परंपरागत सौंदर्यबोध और समकालीन अभिव्यक्ति के बीच एक रचनात्मक सेतु का निर्माण करती हैं। उनके कार्यों में स्त्री-अनुभव, सांस्कृतिक स्मृतियाँ तथा भारतीय प्रतीकों का आधुनिक पुनर्पाठ दिखाई देता है। देश की अनेक प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में उनकी कृतियाँ प्रदर्शित हो चुकी हैं। मध्य प्रदेश से आने वाली तृप्ति जोशी अपनी संवेदनशील चित्रभाषा के लिए जानी जाती हैं। उनके चित्रों में प्रकृति, स्त्री-अनुभव और जीवन के सूक्ष्म भावों का कलात्मक रूपांतरण दिखाई देता है। रंगों के संयमित प्रयोग और संतुलित संरचना के कारण उनकी कृतियाँ दर्शकों के साथ सहज संवाद स्थापित करती हैं। पश्चिम बंगाल के कलाकार सुकांता दास अपनी सशक्त दृश्य-भाषा और प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध हैं। बंगाल की समृद्ध कलात्मक परंपरा का प्रभाव उनके कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उनके चित्रों में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंध और सांस्कृतिक स्मृतियाँ एक विशिष्ट कलात्मक रूप में अभिव्यक्त होती हैं। महाराष्ट्र के डगलस जॉन समकालीन भारतीय कला के उन कलाकारों में हैं जिन्होंने रंग, रूप और संरचना के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके चित्रों में आधुनिक जीवन की जटिलताओं और मानवीय अनुभवों की बहुस्तरीय अभिव्यक्ति दिखाई देती है। वे अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कला आयोजनों में सहभागिता कर चुके हैं। ओडिशा के कलाकार मानस रंजन जेना भारतीय लोक और जनजातीय परंपराओं से गहरे रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी कला में ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत, लोक-जीवन और आध्यात्मिक संवेदनाओं की सशक्त उपस्थिति दिखाई देती है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता के बीच एक जीवंत संवाद स्थापित करते हैं।
यह राष्ट्रीय कलाकार शिविर केवल कलाकृतियों के सृजन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से कलाकारों के बीच विचार-विमर्श, अनुभवों का आदान-प्रदान और समकालीन भारतीय कला के विविध पक्षों पर गंभीर संवाद भी होगा। अयोध्या का सांस्कृतिक वातावरण इस संवाद को और अधिक अर्थपूर्ण बनाएगा। रामायण की सांस्कृतिक स्मृतियों, प्राचीन स्थापत्य, सरयू तट की आध्यात्मिक ऊर्जा और आधुनिक अयोध्या के बदलते परिदृश्य से कलाकारों को नई प्रेरणाएँ प्राप्त होंगी। इस आयोजन के क्यूरेटर डॉ. अवधेश मिश्र स्वयं समकालीन भारतीय कला के एक महत्त्वपूर्ण कलाकार, कला-चिंतक और लेखक हैं। चित्रकला, कला-आलोचना और सांस्कृतिक विमर्श के क्षेत्र में उनकी सक्रिय उपस्थिति रही है। उनकी क्यूरेटोरियल दृष्टि भारतीय कला को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ने का प्रयास करती है। उनके नेतृत्व में यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय कला की विविध धाराओं के बीच संवाद का मंच बनने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि डॉ अवधेश मिश्र अयोध्या के मठगोविंद (भोया) गाँव में जन्में, पले-बढ़े और साकेत महाविद्यालय, डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक हैं।
शिविर की संरक्षक श्रीमती मंजुला झुनझुनवाला कला और संस्कृति के संरक्षण तथा प्रोत्साहन से लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उनके संरक्षण और सहयोग से अयोध्या में अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा मिली है। उनका मानना है कि कला समाज में संवेदनशीलता, संवाद और सृजनशीलता को विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इस समय उनके संरक्षण में जेबी एकेडमी, जेबी बाल सदन, जिंगल बेल स्कूल, यश विद्या मंदिर, पक्का स्किल्स, जेबी नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग आदि संस्थाएं जेबीएनएस सोसाइटी के अंतर्गत संचालित हैं और अयोध्या के शिक्षा जगत को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विकास की मुख्य धारा से जोड़ रही हैं।
“कलर्स ऑफ अयोध्या” ( All India Artists Camp – Colors of Ayodhya) केवल एक कला शिविर नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, कलात्मक विविधता और राष्ट्रीय एकात्मता का उत्सव है। अयोध्या की ऐतिहासिक स्मृतियों, साहित्यिक परंपराओं, आध्यात्मिक वातावरण और समकालीन सांस्कृतिक ऊर्जा के मध्य देश के विभिन्न प्रांतों से आए कलाकार जब संवाद स्थापित करेंगे, तब यह आयोजन कला को केवल सौंदर्यबोध की वस्तु न रहने देकर उसे संस्कृति, समाज और मानवीय अनुभवों की साझा अभिव्यक्ति में रूपांतरित करेगा। सरयू के तट पर सृजित होने वाले ये रंग निश्चय ही अयोध्या के सांस्कृतिक वैभव को नई कलात्मक व्याख्याएँ प्रदान करेंगे और भारतीय कला-जगत में इस शिविर ( All India Artists Camp – Colors of Ayodhya ) को एक स्मरणीय सांस्कृतिक उपलब्धि के रूप में स्थापित करेंगे।” डॉ अवधेश मिश्र क्यूरेटर , श्रीमती मंजुला झुनझुनवाला संरक्षक कलर्स ऑफ़ अयोध्या अखिल भारतीय कला शिविर, अयोध्या हैं .
