नई दिल्ली | कांग्रेस और विपक्षी दलों के ‘INDIA’ गठबंधन द्वारा आज (1 नवंबर 2026) दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक महारैली का आयोजन किया गया। “वोट बचाओ, देश बचाओ” नारे के तहत आयोजित इस रैली में नेताओं ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करना और बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग को प्रमुखता से रखा |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रैली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कहा कि देश को सही रास्ते पर लाने का पहला कदम ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना है| उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखे प्रहार लिए | उन्होंने कई बार मर्यादा की भाषा भी लांघते नजर आये | रैली में कान्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहे | वक्ताओं ने जमकर मोदी सरकार पर हमला बोला |
विपक्ष का मार्च और एकजुटता का प्रदर्शन
रैली की शुरुआत से पहले विपक्षी गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास से रामलीला मैदान तक एक खुली बस में लगभग 1.5 किलोमीटर का मार्च निकाला। इसमें कांग्रेस के अलावा सपा, टीएमसी, राजद और झामुमो जैसे प्रमुख घटक दलों के कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
राहुल गांधी का केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर “वोट चोरी” का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद मतदाता सूचियों से लगभग 15 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। राहुल गांधी ने मंच से बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि चुनावी गड़बड़ियों के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। उन्होंने 2024 के चुनाव को भी “अवैध” करार दिया।
‘वोट चोरी’ और मतदाता सूची (SIR) का मुद्दा
गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा की गई ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं ताकि सत्तारूढ़ दल को फायदा पहुँचाया जा सके।
देशव्यापी कार्यकर्ताओं की भागीदारी
इस रैली में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नागरिक रामलीला मैदान पहुंचे थे। कांग्रेस नेताओं ने रैली में भारी जनसैलाब उमड़ने का दावा किया है। यह रैली आगामी राजनीतिक और चुनावी सुधारों की बहस के बीच विपक्ष द्वारा शक्ति प्रदर्शन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
