लखनऊ . उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालयों और अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाएं कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं . समय से वेतन में न मिलना , प्रमोशन के तौर तरीकों से परेशान शिक्षकों की सुनवाई के लिए जब प्रदेश के संगठनों के बड़े नेता आगे नहीं आई तो यह कमान खुद लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA )और लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (LUACTA ) के पदाधिकारियों ने संभाली.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन दोनों संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए लंबी मंत्रणा भी की. प्रतिनिधिमंडल का सबसे बड़ा आग्रह शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने के साथ ही पुरानी पेंशन स्कीम बहाली मुख्य रूप से शामिल रही . इसके साथ ही शिक्षक नेताओं ने मुख्यमंत्री को कैशलेस चिकित्सा उपचार की सुविधा देने के लिए धन्यवाद भी ज्ञापित किया.
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) के अध्यक्ष प्रोफेसर आदित्य गौरव महामंत्री प्रोफेसर राममिलन, लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त डिग्री कॉलेज शिक्षक संघ (LUAC TA )के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडे और महामंत्री प्रोफेसर अंशु केडिया के प्रति मंडल ने 13 अक्तूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की थी . मुलाकात में शिक्षक नेताओं ने लगभग 20 प्रमुख मांगों को उनके समक्ष रखा और इन सभी बिदुओं पर एक-एक समस्याओं पर चर्चा करने के उपरांत उन्हें मांग पत्र भी सौंपा .
मुख्यमंत्री ने शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक रूप दिखाया और भरोसा दिया कि शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार संवेदनशील है और समय-समय पर शिक्षक हितों के लिए कदम उठाती भी रही है . मांग पत्र में उल्लेखित मांगों का भी उचित समय पर सकारात्मक हल निकाला जाएगा . प्रतिनिधिमंडल का सबसे अधिक जोर शिक्षकों की सेवा निवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने की रही . शिक्षक नेताओं ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि यूजीसी ने भी 65 वर्ष करने पर अपनी सहमति जताई है और अगर ऐसा राज्य सरकार फैसला करती है तो न केवल विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों को अनुभवी , विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी बल्कि शोध, अध्ययन को भी रफ्तार मिलेगी .
उन्होंने कहा कि सेवा निवृत्ति की आयु बढ़ने से शिक्षकों की सेवाएं थोड़ा अधिक समय तक विद्यार्थियों के हित में उपलब्ध रहेंगी. शिक्षक नेताओं ने पुरानी पेंशन स्कीम का भी मुद्दा उठाया और इसे लागू करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की . मुलाकात करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री(LUTA ) प्रोफेसर राम मिलन ने बताया कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक सुना है और उम्मीद है कि वे इस मांग पत्र पर सकारात्मक फैसला लेंगे . उन्होंने कहा की यह भेंट बहुत ही सार्थक रही और मुख्यमंत्री के रूख को देखकर लगता है कि वे शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील है . वहीं विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ ( LUACTA ) के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडे ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष मांगपत्र प्रस्तुत कर दिया है और उन्हें प्रत्येक मांग के बारे में विस्तार से जानकारी भी दे दी है . उन्होंने कहा कि कई ऐसी भी समस्या है जिन्हें समय रहते दूर किया जा सकता है और यह केवल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण लंबित होती हैं . इसलिए अगर सरकारी स्तर पर ठीक से प्रयास किया जाए तो आसानी से हल किया जा सकता है.
उन्होंने कहा फिलहाल प्रमुख मांग शिक्षकों की सेवा निवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने और पुरानी स्कीम को पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने की है . प्रोफेसर पांडे ने कहा कि आने वाले दिनों में सरकार की ओर से कुछ सकारात्मक फैसला लिए जाने की उम्मीद है. LUTA ओर LUACTA की इस सक्रियता से प्रदेश के विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज शिक्षक संघों की लड़ाई लड़ने वाले शिक्षक नेता खामोश हैं .
यह बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों की शिक्षक कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन उनकी आवाज उठाने के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक संगठन आगे नहीं आ रहे हैं, बल्कि वे आपस में जूझे हुए हैं ऐसे में LUTA और LUACTA के शिक्षक नेताओं के पदाधिकारी का सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराना और मांग पूरी करने के लिए आगे करना शिक्षक राजनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है .
अब यह देखना है महत्वपूर्ण होगा कि उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक संघ के राज्य स्तरीय संगठन इन मांगों को पूरा करने के लिए अपने स्तर से भी प्रयास करते हैं या नहीं. लेकिन LUTA और LUACTA के शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों की समस्याएं मुख्यमंत्री तक पहुंच कर शिक्षकों में या उम्मीद जरूर जगा दी है.
