लखनऊ . नवयुग कन्या महाविद्यालय, लखनऊ ( Navyug Kanya Mahavidyalaya ) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं “अभिव्यक्ति” क्लब मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान द्वारा मानविकी एवं समाज विज्ञान विभाग, आईएमसीई तथा सकारात्मक मनोविज्ञान क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आज को ‘रीबिल्डिंग माइंड्स’ तथा ‘मनस्य’ के सहयोग से “इमोशनली सेफर कैंपस” विषय पर एक विशेष संवेदीकरण सत्र का आयोजन मिनी ऑडिटोरियम में किया गया।
सत्र की शुरुआत मनोवैज्ञानिक दीक्षा अग्रवाल ने की, जिन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कॉलेज केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उससे कहीं अधिक विस्तृत अनुभव है। उन्होंने छात्राओं को परिसर में सहज महसूस करने तथा परिसर जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामना करने पर बल दिया। इसके पश्चात दोनों वक्ताओं—विशाखा राठी एवं दीक्षा अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से परिचर्चात्मक सत्र का संचालन किया गया, जिसमें छात्राओं से व्यावहारिक व परिस्थितिजन्य गतिविधियाँ करवाई गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि किसी साथी को भावनात्मक संबल देना कितना सरल हो सकता है, जैसे ज़रूरत पड़ने पर केवल उनकी बात सुनना या उन्हें अपनी बात रखने का खुला अवसर और स्थान देना। सत्र के दौरान छात्राओं ने भी खुलकर संवाद किया और अपने व्यक्तिगत डर, संकोच व चिंताओं को साझा किया, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान सुझाया। साथ ही मानसिक शांति, एकाग्रता और तनाव मुक्ति के लिए छात्राओं को योग एवं प्राणायाम के महत्व से अवगत कराते हुए इन्हें दिनचर्या में शामिल करने की प्रेरणा दी गई। इसके उपरांत छात्राओं से क्यूआर कोड स्कैन कराकर ‘मनस्य’ ऐप डाउनलोड कराया गया और ऐप के माध्यम से उनका डिजिटल मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन संपन्न हुआ।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में विचार व्यक्त करते हुए ‘रीबिल्डिंग माइंड्स’ की संस्थापक व मनोवैज्ञानिक विशाखा राठी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करने के बजाय अपनी भावनाओं को समझना और स्वीकार करना ही भावनात्मक संतुलन की पहली सीढ़ी है, ताकि शैक्षणिक परिसर हर विद्यार्थी के लिए एक सुरक्षित मंच बन सके। वहीं मनोवैज्ञानिक दीक्षा अग्रवाल ने कहा कि तनाव या भावनात्मक संकट के शुरुआती संकेतों को पहचानना और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना बेहद ज़रूरी है, जिससे कई जटिल समस्याओं का समाधान समय रहते संभव हो सके।
इस अवसर पर महाविद्यालय ( Navyug Kanya Mahavidyalaya ) की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि छात्राओं के समग्र विकास हेतु शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक संबलता अत्यंत आवश्यक है; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों तथा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य व कुशल-क्षेम को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के अनुरूप महाविद्यालय ( Navyug Kanya Mahavidyalaya ) परिसर में एक सुरक्षित, सकारात्मक और तनावमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन प्रो. विनीता सिंह द्वारा किया गया।
इस महत्वपूर्ण सत्र में आईक्यूएसी तथा महाविद्यालय ( Navyug Kanya Mahavidyalaya ) की वरिष्ठ प्रवक्ताएं प्रो. संगीता कोतवाल, प्रो. मंजू गुप्ता, प्रो. सीमा सरकार, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. नेहा अग्रवाल, डॉ .सोनल अग्रवाल डॉ. गगनप्रीत कौर, डॉ. सुकन्या तिवारी, मानशी, तथा अन्य संकायों की सम्मानित प्रवक्तागण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
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