- राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी की मजबूती जरूरी
लखनऊ . हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य में खुनखुनजी डिग्री कॉलेज सभागार ( Khun-Khun Ji Girls PG College | Lucknow ) में स्नातकों से संवाद करते हुए हिंदी जन अभियान के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का लोकजीवन में अधिकाधिक प्रयोग जरूरी है, इससे भारतीयता एवं राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल होगी l गैर हिंदी भाषी प्रांतों में हिंदी को राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़कर आत्मसात किया जाता है l दक्षिण भारत में हिंदी का विरोध नहीं के बराबर है l आत्मबल की कमी और प्राथमिकता के अभाव के कारण सरकार अपने कर्तव्य का पालन ठीक से नहीं कर रही l संविधान के भाग 17 व अनुच्छेद 343 की लगातार अवज्ञा हो रही है l शासन – प्रशासन व न्याय की भाषा हिंदी होनी चाहिए l नेपाल, थाईलैंड, कम्बोड़िया, अरब आदि देशों में नंबर प्लेट वहां की भाषा में मिलते हैं l

दीपक ने कहा कि जिन दुकानों के नाम- पट हिंदी में होंगे, हम वहीं से खरीदारी करेंगे l हमें मानसिक और सांस्कृतिक गुलामी से भी लड़ना होगा l समाजवादी चिंतक दीपक ने बताया कि देश के सभी महान नेताओं और विभूतियों ने हिंदी और भारतीय भाषाओं को सशक्त किया l हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की प्रथम मांग महात्मा गाँधी व महर्षि दयानन्द सरस्वती ने की थी, दोनों गुजरात के थे l नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द सरकार की राष्ट्र भाषा हिंदी को घोषित किया था, जबकि वे बांग्लाभाषी थे और उनका जन्म उड़ीसा के कटक में हुआ था l वन्दे मातरम् के रचयिता बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय, केशवचंद्र सेन, टी. विजयराघवाचारी, रामास्वामी अय्यर जैसी अनेक विभूतियों ने हिंदी के पक्ष में अभियान चलाया l शिवाजी ने हिंदी कवि भूषण को राजकवि बनाकर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकेत दिया था l हिंदी की मजबूती से लोकतंत्र मजबूत होगा l लोकराज लोकभाषा में सशक्त होता है l दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा होने के बावजूद हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ में आधिकारिक भाषा के दर्जा से वंचित है l

दीपक ने हिंदीजन से अनुरोध किया कि जिन दुकानों के नाम पट्ट हिंदी में हों, वहां से अधिक खरीदारी करें और दुकानदार को बता कर करें l नेपाल, कम्बोड़िया, अरब आदि देशों में गाड़ियों के नंबर प्लेट वहां की भाषा में हैं जबकि भारत में भारतीय भाषाओं में नंबर प्लेट नहीं मिलते l हिंदी और राष्ट्रीय एकता के ध्येय को लेकर पूरे भारत की यात्रा करने वाले दीपक ने कहा कि हिंदी के नाम पट कटक, कोणार्क, त्रिपुरा, तेलंगाना में मिल जाएंगे लेकिन हिंदी प्रान्त उत्तर प्रदेश के हजरतगंज में नहीं l

संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. अंशु केडिया और संचालन लेखिका डॉ. शालिनी शुक्ला ने किया l हिंदीविद् डॉ प्रियंका, समाजशास्त्री डॉ.स्नेहलता शिवहरे, शिक्षाशास्त्री अनामिका, डॉ. प्रीती, डॉ. चेतना ने विचार विनिमय किया l आभार प्रकट डॉ. रजनी अवस्थी द्वारा किया गया l
