- कुलसचिव द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद की कार्यकारिणी को भंग करने व चुनाव अधिकरी नियुक्त करने सम्बन्धी पत्रांक संख्या R/361/2026 दिनांक 27.04.2026 पर प्रतिक्रिया।
लखनऊ, लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारी परिषद कार्यकारिणी को भंग करने के निर्णय को गलत स्वीकार करते हुए यह मान लिया कि उसके पास इस आशय का अधिकार नहीं था कि वह कार्यकारिणी को भंग करें अथवा नए चुनाव अधिकारी की नियुक्ति करें। कुलसचिव कार्यालय द्वारा जारी पत्रांक संख्या R/1047/26 दिनांक 03.9.2026 में उल्लेख किया गया है कि कुलसचिव ने इससे पूर्व दिनांक 27.04.2026 को जारी अपने पत्रांक संख्या R/361/2026 द्वारा कर्मचारी परिषद का कार्यकाल एक वर्ष मानते हुये की वर्तमान कार्यकारिणी भंग किये जाने तथा लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद संविधान के प्राविधान के दृष्टिगत नये चुनाव कराने हेतु चुनाव अधिकारी नामित किया था।
लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद ने कुलसचिव पत्रांक संख्या R/361/2026 दिनांक 27.04.2026 को चुनौती देते हुए मा० उच्च न्यायालय में वाद दायर किया था। कुलसचिव ने मा० उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अपने पत्रांक संख्या R/1047/26 दिनांक 03.9.2026 में यह स्वीकार किया कि कर्मचारी परिषद कार्यकारिणी का कार्यकाल एक नहीं तीन साल का दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक था और अनुमन्य अवधि पत्र दिनांक 27 अप्रैल 2026 जारी होने के दिनांक तक समाप्त नहीं हुई थी जब कार्यकारिणी को बर्खास्त किया गया था। इस सम्बन्ध में कुलसचिव पत्रांक संख्या R/361/2026 दिनांक 27.04.2026 अस्तित्वहीन (Non est)/निष्प्रभावी (infructuou) हो गया है। जिसे मा० उच्च न्यायलय ने स्वीकार कर लिया है तथा निर्णय से संतुष्ट न होने पर लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद को पुनः प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान किया है।
लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश यादव एवं महामंत्री संजय शुक्ला ने मा० उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि कुलसचिव ने ट्रेड यूनियन एक्ट 1926, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का खुला उल्लंघन करने एवं लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद संविधान के विपरीत जाकर कार्यकारिणी भंग करने तथा चुनाव अधिकारी की नियुक्त किये जाने का आदेश निकाला था, जिसे वापस लेने को मजबूर होना पड़ा है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कर्मचारी परिषद का संचालन विश्वविद्यालय प्रशासन अथवा कुलसचिव की इच्छा से नही उसके संविधान व ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के प्राविधानों के अनुरूप होगा। कर्मचारी हितो की रक्षा के लिए परिषद यह लड़ाई आगे भी जारी रखेगा तथा कुलसचिव के अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नही किया जाएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद इस सम्बन्ध में पुनः प्रत्यावेदन प्रस्तुत करेगा। यह जानकारी शिवानन्द द्विवेदी संगठन मंत्री लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद ने दी है .
