- राज्य के पेंशनरों के लिये भी प्रस्ताव सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) अनुसार दिया है- राजेश चटर्जी
- ई-कार्ड के द्वारा सभी प्रकार के बीमारी का होगा कैशलेस इलाज-
- नो रेफेर डायरेक्ट ट्रीटमेंट, सरकार ने किया सपना साकार –
रायपुर , 30 जुलाई , शासकीय सेवक और उसके आश्रित परिजनों के साधारण एवं गंभीर बीमारी के इलाज की जिम्मेदारी छत्तीस गढ़ सरकार ने लिया- छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय सेवक और उसके परिवार को अब साधारण अथवा गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ सरकार के कैशलेस चिकित्सा योजना लागू करने के निर्णय से शासकीय सेवकों का सपना साकार होने जा रहा है।वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में बाकायदा 100 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन जिला सक्ती के जिलाध्यक्ष डॉ टीकाराम सारथी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के तकरीबन 5 लाख कर्मचारी और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना के कार्ययोजना को अंतिम रूप देने मंत्रालय में अमित कटारिया सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ शासन के अध्यक्षता में आयोजित अति- महत्वपूर्ण बैठक में छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष को आमंत्रित किया गया था।
प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने भारत सरकार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना महानिदेशालय के.स्वा.यो. भवन,दिल्ली के कार्यालय ज्ञापन दिनांक 03/10/2025 की कॉपी सौंपकर स्वास्थ्य सचिव को जानकारी दिया कि केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की पैकेज दर के अनुसार केंद्रीय सरकार के पेंशनर्स एवं अन्य विशिष्ट वर्ग के लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है।जोकि 13/10/2025 से प्रभावशील है। अतः छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनर्स एवं अन्य विशिष्ट वर्ग के लाभार्थियों को CGHS की पैकेज दर पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार करने का प्रस्ताव दिया है।
उन्होंने बताया कि कैशलेस चिकित्सा योजना लागू हो जाने से छत्तीसगढ़ राज्य में शासकीय सेवक और उसके परिवार को अब साधारण अथवा गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। छत्तीसगढ़ सरकार के कैशलेस चिकित्सा योजना लागू करने के निर्णय से शासकीय सेवक का सपना साकार होने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में बाकायदा 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिये कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष द्वारा राज्य सरकार को दिया गया था।प्रस्तुत प्रस्ताव के सुझावों को कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने शासकीय सेवक को वर्तमान उपलब्ध चिकित्सा सुविधा एवं कैशलेस चिकित्सा सुविधा की विस्तृत जानकारी दिया है। पहले कर्मचारी/परिजनों के इलाज का खर्चा कर्मचारी प्रारंभ में स्वयं व्यय करता था।तत्पश्चात चिकित्सा में हुए व्यय का बिल जमा करने के बाद शासन से प्रतिपूर्ति प्राप्त करता था। जोकि अत्यंत जटिल प्रक्रिया से गुजरने वाला था। लेकिन अब कैशलेस चिकित्सा योजना में कर्मचारी को बहुत बड़ा राहत मिलेगा।

अब कर्मचारी को ई-कार्ड मिलेगा जिसके तत्काल ऑनलाइन वेरिफिकेशन से आवश्यक चिकित्सा सुविधा बिना एडवांस राशि जमा किये प्रारंभ हो जायेगा। जोकि बहुत बड़ा राहत है। पुराने प्रक्रिया में रेफर (refer) का प्रावधान था।लेकिन अब रेफर (refer) के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। पहले प्रारंभ से अंतिम तक इलाज का सम्पूर्ण व्यय का भुगतान कर्मचारी खुद वहन करता था।लेकिन अब नए योजना में प्रारंभ से अंतिम तक इलाज का सम्पूर्ण व्यय का भुगतान राज्य शासन द्वारा ऑनलाइन (Transaction Management System-TMS) के द्वारा CGHS के दर पर सीधे हॉस्पिटल को होगा। इससे बिल पास कराने के लिये कार्यालयों में चक्कर लगाने और भ्रष्टाचार से कर्मचारियों को मुक्ति मिलेगा।
उन्होंने बताया कि नये कैशलेस चिकित्सा योजना में कर्मचारी द्वारा उपचार एवं मेडिकल देयकों की जाँच- पड़ताल AI आधारित ट्रिगर विश्लेषण एवं राष्ट्रीय धोखाधड़ी विरोधी इकाई (National Anti Fraud Unit-NAFU) के माध्यम से होगा।इससे फर्जी मेडिकल बिल पर नकेल कसने की तैयारी है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने कैशलेस चिकित्सा योजना को कर्मचारियों के सपनों को सरकार द्वारा साकार करने का योजना निरूपित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं मुख्यसचिव विकासशील का विशेष आभार माना है।साथ ही,स्वास्थ्य सचिव श्री अमित कटारिया तथा योजना को मुर्तरुप देने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
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