लखनऊ, 13 जुलाई , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ का 22वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों को 1707 उपाधियां प्रदान की गईं तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 20 विद्यार्थियों को कुल 54 पदकों से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल जी ने दीक्षांत समारोह में दीक्षांत व्याख्यान देने के उपलक्ष्य में मुख्य अतिथि भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया

समारोह में जनपद हरदोई के 400 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी किटें वितरित की गईं। साथ ही पुलिस लाइन में कार्यरत पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 200 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया। इस अवसर पर राज्यपाल जी ने बताया कि प्रदेश में अब तक सीएसआर के सहयोग से 64743 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुविधासंपन्न बनाया जा चुका है। साथ ही बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन की कुल 162460 डोज़ प्रदान की जा चुकी हैं, जिनमें पुलिसकर्मियों की बेटियां भी शामिल हैं।
सभी डिग्रियों एवं अंकपत्रों को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों की अंकतालिकाएं एवं डिग्रियां डिजिलॉकर पर अपलोड की जा रही हैं, लेकिन अनेक विद्यार्थी इस सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों को डिजिलॉकर के उपयोग के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने के निर्देश दिए, ताकि वे घर बैठे अपने मोबाइल से अपनी डिजिटल अंकतालिका एवं डिग्री डाउनलोड कर सकें और अनावश्यक भागदौड़ से बच सकें।
राज्यपाल जी ने कहा कि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का 22वाँ दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा एवं मानवता की सेवा के दायित्व को स्वीकार करने का अवसर है। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के बेटे और बेटियाँ अपने ज्ञान, कौशल एवं चरित्र के बल पर ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
राज्यपाल जी ने कहा कि चिकित्सा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और समर्पण का सर्वाेच्च माध्यम है। रोगी चिकित्सक के पास केवल उपचार के लिए नहीं, बल्कि जीवन की आशा लेकर आता है। ऐसे में चिकित्सकों का संवेदनशील व्यवहार, धैर्य और विश्वास से भरे शब्द भी कई बार दवा से अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं।
उन्होंने मुख्य अतिथि भारत सरकार के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व, राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता तथा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी अनुसंधान, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही लखनऊ के जनप्रतिनिधि के रूप में शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना एवं जनकल्याण के क्षेत्रों में उनके योगदान की भी प्रशंसा की।
राज्यपाल जी ने कहा कि वर्ष 1905 में स्थापित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का देश का प्रतिष्ठित संस्थान है। विश्वविद्यालय की ओपीडी में प्रतिवर्ष लगभग 19 लाख मरीजों की सेवा होती है। उन्होंने विश्वविद्यालय को नैक में ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त होने, एनआईआरएफ रैंकिंग में चिकित्सा श्रेणी में देश में आठवाँ तथा डेंटल श्रेणी में सातवाँ स्थान प्राप्त करने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च सेंटर का देश के आठवें सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उच्चीकृत होना तथा वर्ष 2025 का फिक्की हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवॉर्ड प्राप्त करना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान उत्कृष्टता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गाइनेकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजी, संक्रामक रोग सेवाओं, पेन मेडिसिन, ट्रॉमा क्रिटिकल केयर, रोबोटिक सर्जरी तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश की पहली रोबोटिक ह्यूमन कैडेवेरिक वेट लैब की स्थापना तथा हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड के माध्यम से किफायती दरों पर दवाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं मानवीय स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भविष्य में भी नई ऊँचाइयाँ स्थापित कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएगा।
राज्यपाल जी ने कहा कि एक चिकित्सक का हृदय करुणा से परिपूर्ण, मस्तिष्क ज्ञान एवं विज्ञान से समृद्ध तथा हाथ सदैव सेवा के लिए तत्पर होने चाहिए। प्रत्येक रोगी के प्रति चिकित्सकों का व्यवहार संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण एवं आत्मीय होना चाहिए तथा किसी भी मरीज को समय पर उपचार और उचित परामर्श से वंचित नहीं रहना चाहिए।

राज्यपाल जी ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत लगभग 90 करोड़ नागरिकों की यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाई जा चुकी है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं सुलभ हुई हैं। उन्होंने युवा चिकित्सकों से निरंतर अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार को अपनाने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ, समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मातृ स्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण, सुरक्षित प्रसव और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर ही स्वस्थ एवं संस्कारित पीढ़ी का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का उल्लेख करते हुए युवा चिकित्सकों से अपने जीवन के प्रारंभिक वर्षों में कम से कम तीन वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने का आह्वान किया। साथ ही निजी अस्पताल एवं क्लिनिक संचालित करने वाले चिकित्सकों से निर्धन एवं जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क अथवा रियायती उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल इंडिया अभियान ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई दिशा प्रदान की है तथा यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बन रही हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिजिटल हेल्थ मिशन, जन औषधि केंद्र, टीबी उन्मूलन अभियान, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम तथा चिकित्सा अवसंरचना के विस्तार जैसी पहलें देश के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत कर रही हैं। उत्तर प्रदेश में भी नए मेडिकल कॉलेजों, सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों, ट्रॉमा सेंटरों तथा डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की पहुंच निरंतर बढ़ रही है।
राज्यपाल जी ने नव चिकित्सकों से निरंतर अध्ययन, अनुसंधान और नवाचार को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है और जो चिकित्सक आजीवन सीखता रहता है, वही समय की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने ज्ञान, सेवा-भाव, नैतिक मूल्यों एवं उत्कृष्ट कार्यों से किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देंगे।

राज्यपाल जी ने बताया कि जन भवन सचिवालय की टीम द्वारा किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के भवनों का निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान पाई गई सभी कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश देते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर एवं छात्रावासों में स्वच्छता व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि लगभग 10 वर्षों से निर्माणाधीन भवन का कार्य शीघ्र पूर्ण कर उसे हस्तांतरित किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय में निर्माणाधीन चार नए भवनों का निर्माण विश्वविद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्ता, डिजाइन एवं नियमित निगरानी के साथ कराने के निर्देश दिए।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय में स्ट्रेचरों की संख्या एवं गुणवत्ता में सुधार करने, सभी छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए वाशिंग मशीन उपलब्ध कराने तथा मेस में पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निरीक्षण के दौरान एक्सपायर मसाले पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए खाद्य गुणवत्ता एवं व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या 600 से बढ़ाकर 2,500 करने तथा खेल एवं जिम गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने दीक्षांत समारोह में दीक्षांत व्याख्यान देने के उपलक्ष्य में मुख्य अतिथि भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को स्कूल बैग एवं स्टेशनरी आदि वस्तुयें प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने जन भवन की ओर से विद्यालयों के शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें भी भेंट कीं। एचपीवी टीकाकरण अभियान के सफल संचालन में योगदान देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को फैकल्टी अवार्ड भी प्रदान किए। समारोह में नीति आयोग के सदस्य श्री एम. श्रीवास्तव को उनकी अनुपस्थिति में डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
