लखनऊ ,29 जून , जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज, बहरौली, लखनऊ में आज दानवीर भामाशाह जयंती के अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार वर्मा ने भामाशाह के चित्र पर माल्यार्पण कर किया तथा चित्र कला प्रतियोगिता करवाई गई।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य अनिल कुमार वर्मा ने बच्चों को बताया कि भामाशाह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि त्याग, देशभक्ति और सच्ची मित्रता की मिसाल हैं। भामाशाह मेवाड़ के महाराणा प्रताप के मंत्री, खजांची और परम मित्र थे। जब मुगल सम्राट अकबर से लड़ते-लड़ते महाराणा प्रताप का सब कुछ खत्म हो गया था, जंगलों में घास की रोटी खाने की नौबत आ गई थी, तब भामाशाह ने अपना पूरा खजाना महाराणा के चरणों में रख दिया।

इतिहासकार कहते हैं कि भामाशाह ने इतना धन दिया कि उससे 12 साल तक 25 हजार सैनिकों का खर्च चल सकता था। इसी धन से महाराणा प्रताप ने फिर से सेना तैयार की और मेवाड़ को आजाद कराया।इनके जीवन से हमें कई सीख मिलती हैं । जैसे भामाशाह के पास अकबर का साथ देकर ऐश करने का मौका था। पर उन्होंने मातृभूमि चुनी। आज जब हम छोटी-छोटी बात पर देश की बुराई करते हैं, भामाशाह हमें सिखाते हैं कि देश सर्वोपरि है।
दूसरी सीख दोस्ती सिर्फ सुख में साथ निभाना नहीं है। असली दोस्त वो है जो मुसीबत में अपना सब कुछ दांव पर लगा दे। भामाशाह और प्रताप की दोस्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। तीसरी सीख भामाशाह व्यापारी थे, मेहनत से धन कमाया। पर उस धन को तिजोरी में बंद नहीं रखा। जब देश को जरूरत पड़ी तो सब दान कर दिया। आज हम भी अपनी पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा जरूरतमंद की मदद में लगा सकते हैं।चौथी सीख भामाशाह ने दान देकर कोई पद नहीं मांगा, कोई अहसान नहीं जताया। चुपचाप कर्तव्य निभाया। महाराणा ने जब उन्हें मेवाड़ का प्रधानमंत्री बनाना चाहा तो उन्होंने मना कर दिया।
शिक्षक शंभू दत्त ने बताया कि जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में मदद करें – पुरानी किताबें दान करें,देश की चीजें खरीदें, स्वदेशी अपनाएं – यही भामाशाह को सच्ची श्रद्धांजलि है

शिक्षक संजय अवस्थी ने बताया कि अपने दोस्तों का मुसीबत में साथ दें, जैसे भामाशाह ने प्रताप का दिया।
“वो धन ही क्या जो देश के काम न आए, वो दोस्ती ही क्या जो वक्त पर काम न आए”
भामाशाह का जीवन हमें बताता है कि इतिहास तलवार से ही नहीं, त्याग से भी लिखा जाता है।
प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतिभागियों ने भामाशाह के त्याग, देशभक्ति और महाराणा प्रताप के साथ उनकी मित्रता को अपनी चित्रकला के माध्यम से उकेरा।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे:
प्रथम स्थान – नंदिनी पटेल, कक्षा 9
द्वितीय स्थान – मेनाज, कक्षा 10 ‘बी’
तृतीय स्थान – संयुक्त रूप से अंशु गौतम, कक्षा 12 ‘सी’ एवं नैंसी वर्मा, कक्षा 10 ‘ए’
प्रधानाचार्य श्री अनिल कुमार वर्मा ने सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को स्टेशनरी वितरित कर पुरस्कृत किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भामाशाह का जीवन हमें सिखाता है कि राष्ट्रहित में अपना सर्वस्व न्योछावर कर देना ही सच्ची देशभक्ति है। विद्यार्थियों को उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक संजय अवस्थी द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक शंभू दत्त, कर्मचारीगणों में केशवराम, जितेंद्र कुमार, युवराज, गोमती प्रसाद तथा शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
