- मंडलीय समितियों के लिए शिक्षा निदेशक के आदेश मायने नहीं, २३०० तदर्थ शिक्षकों के नियमित किये जाने का मामला : डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
- तीस दिसंबर दो हजार के पूर्व से कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को नहीं मिला अब तक न्याय : ओ पी त्रिपाठी
लखनऊ, 20 जून। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के गैर सरकारी सहायता प्राप्त मा विद्यालयों मे पिछले ३० दिसंबर २००० के पूर्व से नियुक्त लगभग २३०० तदर्थ शिक्षकों को अब तक नियमित न किये जाने उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल, प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी एवं महामंत्री आशीष कुमार सिंह ने आज यहाँ जारी अपने बयान मे बताया कि लखनऊ मंडल सहित अनेक मंडलों में विनियमन के मामले लबित पड़े हुए हैं जिन पर शिक्षा निदेशक मा के स्पष्ट अदेश के बाद भी लंबित प्रकरण ज्यो के त्यों पड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशक इस मामले में गत दिनों जारी अपनी गाइड लाइन मे साफ तौर पर निर्देश दिए है कि निर्धारित समय, निरंतरता के साथ शिक्षक की अर्हता को ही ध्यान मे रख कर इतने लंबी अवधि से सेवा करने वाले तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने की कार्यवाई के आदेश जारी किया है। जिसका कोई अनुपालन नहीं किया गया है। सूबे के सभी तदर्थ २३०० तदर्थ शिक्षकों का भविष्य अधर मे लटका हुआ है। इसके चलते जहाँ उन्हें चयन और प्रो न्नत वेत मान नियमानुसार मिल रहा है। वही २८ से ३० वर्धो की लंबी सेवा के बाद रिटायर होने पर पेंशन का भुगतान तक नहीं हो पा रहा है, जबकि उन्हें जी पी एफ और ग्रुप एल आई सी का भुगतान मिल रहा है।

शिक्षक नेताओ ने बताया कि पेंशन, जी पी एफ और ग्रुप एल आई सी तीनों मिल कर लाभ त्रयी सेवानिवृतिक लाभ एक साथ प्राप्त होता है। उन्होंने इन बातों की ओर शासन एवं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर तत्काल हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है।
तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के लिए उ प्र माध्यमिक शिक्षा सेवा अधिनियम २०१६ की धारा ३३- ( छ) के अंतर्गत ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसंबर २००० की निर्धारित सीमा अवधि तक नियुक्त सभी को विनियमित करने का निर्देश प्रदान किया गया है। संगठन यही मांग लंबी अवधि से करता चला आ रहा है।
शिक्षा निदेशक द्वारा जारी निर्देश मे मात्र अधिनियम मे वर्णित समय एवं निरं तरता को विशेष रूप से ध्यान में रखे जाने की ओर ध्यान दिये जाने को कहा गया है। वेतन भुगतान पर ध्यान न देकर अन्य वर्णित विंदुओ पर परीक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक नेताओ ने लगातार संगठन की मांग पर जारी स्पष्ट निर्देश के अनुसार ही लभभग तीस- तीस सालों से कार्य र त सभी तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा जगत से तदर्थ वाद को हमेशा के लिए खत्म किये जाने की संगठन के मांग को शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा अधिकारियों के समक्ष जोरदार दंग से उठाया है।
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