कोरबा, 24 मई | अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कोरबा वन मंडल एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त तत्वावधान में डी.एफ.ओ. श्रीमती प्रेमलता यादव के दिशा-निर्देश पर ग्राम दूधीटांगर में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” रही।

कार्यक्रम में विज्ञान सभा के वैद्यराज श्री अर्जुन श्रीवास एवं श्री देव नारायण माझी के नेतृत्व में पहाड़ी कोरबा जनजाति समुदाय के साथ औषधीय पौधों के पारंपरिक उपयोग, वनों में इन प्रजातियों की घटती उपलब्धता के कारणों तथा उनके संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों एवं उनसे जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान दशमूलारिष्ट, हड़जोड़, भुईं नीम, केवतीन, हर्रा, बहेरा, सभारभंज आदि महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के गुणों एवं उपयोग संबंधी पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान किया गया। साथ ही सांप-बिच्छू के दंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार के बाद निकटतम चिकित्सालय जाने हेतु जनजागरूकता संदेश दिया गया।

वक्ताओं ने जोर दिया कि जंगल में जैव विविधता संरक्षण के लिए सामुदायिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से पौधों के बीजों को संग्रह कर पुनः प्रकृति में रोपित करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पहाड़ी कोरबा समुदाय के मुखिया श्री चरण एवं श्री रामशंकर की विशेष भूमिका रही। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की छात्राओं आरती सिंह एवं तरन्नुम ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विज्ञान सभा के सदस्य कमलेश दास एवं निधि सिंह का भी सराहनीय योगदान रहा।
