लखनऊ/ नई दिल्ली , 17 अप्रैल . उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को अंतिम रूप दिया जा रहा है. लंबे समय से फेरबदल की चल रही चर्चाओं पर अब विराम लगने की उम्मीद दिख रही है . गुरुवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के साथ देर रात हुई बैठक में यह बात सामने आ रही है कि अब मंत्रिमंडल विस्तार को जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाए.
इसकी मुख्य वजह है कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं और इसलिए सभी जाति और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने के लिए यह फेरबदल बहुत जरूरी हो गया है . संगठन में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जिला इकाइयों का पूरी तरीके से गठन हो चुका है और प्रदेश की सभी जिला इकाइयां सक्रिय रूप से शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए कार्यक्रमों को तत्परता से लागू कर रहीं हैं, यह भी विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है .
भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी चुनाव में किसी प्रकार की कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है . यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व योगी सरकार के मंत्रिमंडल में रिक्त पदों को तत्काल भरने की कोशिश में है. इसके लिए कई महत्वपूर्ण नामों पर विचार चल रहा है. इनमें संगठन में शामिल कुछ बड़े नेताओं के भी नाम है. हालांकि इन नामों का खुलासा नहीं किया जा रहा है लेकिन माना जा रहा है कि बीजेपी जनाधार वाले और तेजतर्रार नेताओं को ही मंत्रिमंडल में में स्थान देने की पक्षधर है .
ऐसा इसलिए है कि चुनाव में ऐसे नेताओं और वक्ताओं की बहुत जरूरत होगी और जाति व क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखना इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी भी जाति और क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से अपनी टिकट वितरण करती हैं . अब यह देखना है महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल में कौन-कौन से नए चेहरे शामिल करती है और किन्हें बाहर कर संगठन की जिम्मेदारी सौंपती है.
बहरहाल अब तक मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद पूरी नहीं हो जाती है तब तक भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में हलचल बनी रहेगी मंत्री बनने के ख्वाहिशमंद नेता दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं ताकि उन्हें कुर्सी मिल जाए वहीँ कुछ ऐसे भी नेता है जो अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए भी शीर्ष नेतृत्व की शरण में है . भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की कोशिश सबको साथ लेकर चलने की है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कड़े फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटेगी. भारतीय जनता पार्टी में यह फेरबदल अब तक पूरा हो गया होता लेकिन पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु आदि के चुनाव और बिहार के घटनाक्रम के चलते इसमें थोड़ा विलंब हो रहा है . इसलिए अब बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लेने की कोशिश में है.
