- प्रदेश के 2300 तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने संबंधी निदेशक के गाइड लाइन को दरकिनार कर कररहे मनमानी : पांडेय गुट
- तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने का शिक्षा निदेशक, माध्य मिक ने दिये कड़े निर्देश : डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
- नियमित करते समय केवल निर्धारित समय सीमा एवं निरं तर ता को ही ध्यान में रखे सक्षम अधिकारी : ओम प्रकाश त्रिपाठी
- तदर्थ शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय, अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा करें तत्काल हस्तक्षेप : आशीष कुमार सिंह
लखनऊ 11 अप्रैल। प्रदेश के गैर सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में विगत ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसंबर २००० के मध्य तत्समय लागू भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त सूबे के शेष बचे तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने के लिए शिक्षा निदेशक डॉ महेंद्र देव जी के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर दिये जाने के बाद भी मंडलीय/ जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारियों द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नही हो रही है।

इस मामले मे उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ ( पांडेय गुट ) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं संगठन, प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी तथा महामंत्री आशीष कुमार सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए शासन एवं विभाग के उच्च शिक्षा अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर जारी आदेशों को धरातल पर शीघ्र अमल मे लाये जाने की मांग की है।

तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के लिए उ प्र माध्यमिक शिक्षा सेवा अधिनियम २०१६ की धारा ३३- ( छ) के अंतर्गत ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसंबर २००० की निर्धारित सीमा तक नियुक्त सभी को विनियमित करने का निर्देश प्रदान किया गया है। संगठन यही मांग लंबी अवधि से करता चला आ रहा है।
शिक्षा निदेशक द्वारा जारी निर्देश में मात्र अधिनियम मे वर्णित समय एवं निरंतरता को विशेष रूप से ध्यान में रखे जाने की ओर ध्यान दिये जाने को कहा गया है। वेतन भुगतान पर ध्यान न देकर अन्य वर्णित विंदुओ पर परीक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक नेताओ ने लगातार संगठन की मांग पर जारी स्पष्ट निर्देश के अनुसार ही लभभग तीस -तीस सालों से कार्यरत सभी तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर उनके अवरुद्ध वेतन भुगतान किये जाने की मांग को दोहरायी है।
