लखनऊ, 11 अप्रेल , इंडोनेशिया के यूनिवर्सिटीज मोहम्मदिया कोटभूमि लैम्पुंग उतरा (Universitas Muhammadiyah Metro – UM Metro) द्वारा ऑनलाइन मोड में आयोजित “फर्स्ट ग्लोब फोरम 2026 -ग्लोबल लर्निंग अपॉर्चुनिटीज़ एंड ब्रिजेज इन इंग्लिश एजुकेशन” में की नोट एड्रेस देते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर प्रो. आर. पी. सिंह ( R P SINGH – Professor of English Lucknow University ) ने सस्टेनेबल फ्यूचर्स के लिए इंग्लिश लैंग्वेज एजुकेशन विषय पर चर्चा करते हुए कहा , “ मानव क्षमताओं , क्षेत्रीय संस्कृति और तकनीकी का सम्यक उपयोग वर्तमान समय में अंग्रेजी शिक्षण को नए आयाम देगा।“ उन्होंने ( R P SINGH – Professor of English at Lucknow University ) बताया कि 21वीं सदी में अंग्रेजी भाषा शिक्षण में आमूलचूल परिवर्तन हो रहे हैं , बढ़ती तक़नीकी ने अंग्रेजी सीखने सिखाने के तरीकों में परिवर्तन किया है , और अंग्रेजी सीखने के साधन आज सर्वसुलभ हैं।
जहाँ ग्लोबलाइज़ेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सस्टेनेबिलिटी प्रारूपों ने अंग्रेजी शिक्षण में क्षेत्रीय प्रारूपों और मॉडल्स भी विकसित करने की आवश्यकता है, ,वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप इंग्लिश पढ़ाने के तरीके को पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर नए सिरे से सोचना होगा। अंग्रेजी अध्ययन को सिर्फ़ बातचीत या संचार साधन के रूप में ही नहीं, बल्कि क्रिटिकल अवेयरनेस, इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन और सांस्कृतिक राजनय के साधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए। उन्होने (Dr. RP SINGH University of Lucknow, ENGLISH AND MODERN EUROPEAN LANGUAGES, Faculty Member)
कहा की “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग के समय में लोकल और ग्लोबल लेवल पर प्रतिदिन उभरती नयी व्यवस्थाओं के तारतम्य में नैसर्गिक मानवीय मेधा , संस्कृति और टेक्नोलॉजी का समुचित उपयोग अंग्रेजी टीचिंग-लर्निंग का सार्थक माहौल बना सकते हैं।
उन्होंने ( R P SINGH – Professor of English at Lucknow University ) अपने विचार को शेक्सपियर के नाटक ‘द टेम्पेस्ट’ को पढ़ाने के साथ-साथ उपनिवेशवाद , और क्लाइमेट चेंज पर इंटरकल्चरल प्रोजेक्ट्स का उदहारण देते हुए समझाया। प्रो सिंह कहा की प्रारंभिक चरण में क्षेत्रीय आकाँक्षाओं के अनुरूप छोटे छोटे कोर्स डिज़ाइन करके ऑनलाइन माध्यम से अंग्रेजी शिक्षण प्रशिक्षण में प्रयोग किये जा सकते हैं।
