लखनऊ, 01 अप्रैल । केन्द्र व राज्य सरकार के मजदूर विरोधी रूख के कारण प्रदेश के मजदूरों ने आज ( 1 अप्रैल ) के दिन को ‘‘ काला दिवस ’’ के रूप में मनाया। देश के मजदूर चारों श्रम संहिताओं को वापस करने की मॉग करते रहे है। इनमें मजदूर विरोधी प्राविधानों को शामिल किया गया है। इसके लागू होने से मजदूर कारपोरेट के गुलाम हो जायेगें।
ज्ञातव्य हो कि चारो श्रम संहिताओं को वापस करने के लिये हाल में ही देश के मजदूरों ने 12 फरवरी 2026 को एक दिन की आम हड़ताल की थी। फिर भी केन्द्र सरकार मजदूर विरोधी रूख का जारी रखे हुये है। केन्द्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से नियमावली लागू करने की घोशणा कर रखी थी। इसलिये मजदूरों ने आज के दिन को ‘‘काला दिन’’ के रूप में याद किया । प्रदेश के मजदूरों/कर्मचारियों ने अपने अपने कार्य स्थलों पर काला फीता बॉधकर काम किया। बीमा, बैंक व राज्य सरकार के कर्मचारियों ने दोपहर अवकाश के समय दफतरों में सभाये की। नार्दन कोल फिल्ड सोनभद्र के मजदूरों ने हाजिरी दफतर पर काला झण्डा लेकर प्रर्दशन किया।

लखनऊ में मजदूर संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष प्रर्दशन कर ज्ञापन दिया। सभी संगठनों के जिला पदाधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुये। ज्ञापन देने वालों में सीटू से राहुल मिश्रा, विकास स्वरूप, इण्टक से दिनेश यादव, दिलीप श्रीवास्तव, एटक से रामेश्वर यादव, रमेश कश्यप, कान्ति मिश्रा, सेवा से बहन सुरैया, एक्टू से नौमी लाल , अरूण सिंह, आदि शामिल थे।
राज्य केन्द्र पर प्राप्त सूचना के अनुसार प्रदेश के कई जिलों , औद्योगिक क्षेत्रों और संस्थानों में मजदूरों ने हिस्सा लिया।
केन्द्रीय श्रम संगठनों के उत्तर प्रदेश ईकाई ने कहा है कि सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्श जारी रहेगा। सरकार श्रम संहिता वापस नहीं लेती है तो आन्दोलन को नई उॅचाई तक ले जाया जायेगा। केन्द्रीय श्रम संगठनों ने केन्द्र व राज्य सरकार से मजदूर विरोधी रूख बदलने का आवाहन किया है। यह जानकारी प्रेम नाथ राय महामंत्री सीटू उ0प्र0 वास्ते केन्द्रीय श्रम संगठन उत्तर प्रदेश की और से दी गयी है .
