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कल युग के सुविधा म मरत हे
घर म टाईल्स फेसलेटी बढ़त हे।
फिसल के गिरत हे तव
गोड़ ह हाथ टुटत हे।
गैस चूल्हा म भात साग बनावत हे।
भंग ले बरथेय तहा हाथ मुंह भुजावत हे।
घर म बिजली लाईट जगजग ले बारत हे।
कंरेंट म चटक मर जात हे।
गाड़ी मोटर म फर फर चलावत हे।
एक्सीडेंट म चपका जात हे।
हवाई जहाज म उड़त जवाथे
चिथड़ी चिथड़ी म फेकात हे।
आनी बानी के फैसन करत हे
दिन दहाड़े इज्जत बेचात हे।
कई मंजिल के घर बनत हे
बाढ़ आगे तव भरभड़ा मरत हे।
जगह जगह म बोर होवत हे
बुंद पानी बर लोग मरत हे।
आनी बानी के खवाई पियाई
डाक्टर ल पैसा देवाई होवत हे
बड़े बड़े स्कूल फीस ल वसुलत हे
घर खेत बेचके दाई ददा पढ़ात हे।
नई पाय नौकरी तव माई पिल्ला ओरम जात हे।
सुख सुविधा के पाछू जाके
करम अपन ठठावत हन।
दुख झेले के क्षमता घट गे
बीमारी अपन बुलावत हन।
ओमप्रकाश वर्मा
सेमरताल बिलासपुर
