
लखनऊ. लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज सोसाइटी के प्रबंधतंत्र के गठन को लेकर मिली शिकायतों के मद्देनजर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। निर्देश मिलने के बाद लखनऊ के मंडलायुक्त रंजन कुमार ने इस बाबत आदेश जारी करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। जांच समिति में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक , मंडलीय उप शिक्षा निदेशक और सह-निरीक्षक ऐंग्लो इंडियन स्कूल रीता सिंह को शामिल किया गया है। को शामिल किया गया है और जांच समिति को दो दिन में जांच करके आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें डॉ.आरआर लायल की ओर से लगाए गए आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। डॉ. लायल ने विस्तार से प्रबंधन पर कब्जा करने की बातों का चौंकाने वाला खुलासा किया है।
सवाल डिप्टी रजिस्ट्रार फम्र्स सोसाइटी के निर्णय पर उठ रहे
दरअसल इन दोनों विद्यालयों में प्रबंधसमिति को लेकर चल रहे विवाद के कई पेंच हैं। दो गुट होने के कारण अपने-अपने दावे कर रहे हैं लेकिन दस्तावेजों में गड़बड़ी करके एक गुट द्वारा प्रबंधतंत्र पर कब्जा कर लिया गया है। दोनों विद्यालयों के शिक्षक व कर्मचारी इस मामले में फंसे हुए हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है। ऐसे शिक्षकों का अंदेशा है कि इन दोनों शिक्षण संस्थाओं को संचालित करने वाली एजूकेशन सोसाइटी का वर्तमान स्वरूप बना रहा तो आने वाले दिनों में करोड़ों की जमीन के वारे-न्यारे होंगे और कई शिक्षकों को भी परिणाम भुगतना पड़ेगा। कुछ ऐसे फैसले भी होने लगे हैं। वर्तमान समिति को डिप्टी रजिस्ट्रार रजिस्ट्रार फम्र्स सोसाइटी ने अपने एक फैसले के तहत कई अधिकार दिए हैं। विवाद की वजह रजिस्ट्रार फम्र्स सोसाइटी का निर्णय माना जा रहा है।
जांच पड़ताल में मिले चौंकाने वाले तथ्य
मामला शिक्षकों के उत्पीडऩ, वेतन भुगतान में देरी जैसे कई मामले जब माध्यमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई के पास पहुंचने लगे तो संघ के नेताओं ने अपने स्तर से जांच पड़ताल की। इन दोनों शिक्षण संस्थाओं में इस शिक्षक संगठन की सक्रिय इकाइयां भी हैं। जानकारी के अनुसार जब शिक्षक संघ के जिला संरक्षक व प्रदेशीय डॉ.आरपी मिश्र के नेतृत्व में शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग के कार्यालयों व रजिस्ट्रार फम्र्स सोसाइटी से दस्तावेजों की जांच पड़ताल शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य मिले।
इनमें एक यह भी है कि
इनमें एक यह भी है कि वर्तमान प्रबंध समिति को दबाव में अधिकार दिए गए हैं। यह दबाव किसका है ? मामले की गंभीरता देखते हुए माध्यमिक शिक्षक संघ ने पहले आवेदनों और फिर ज्ञापन के जरिए सभी प्रमुख अधिकारियों तक इस मामले को पहुंचाया। इस मामले में प्रबंध समिति से जुड़े रहे अन्य सदस्य भी आ गए। जिला विद्यालय निरीक्षक, संयुक्त शिक्षा निदेशक से लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक और मंडलायुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए मंडलायुक्त को निर्देशित कर दिया।
पता नहीं था मामला सीएम तक पहुंचेगा
मामला इतना ऊपर तक जाएगा, यह उन अधिकारियों को भी नहीं पता रहा होगा, जिन्होंने यह सब किया है। इस विवाद में शिक्षण संस्थान की छवि प्रभावित हो रही है। मंडलायुक्त द्वारा गठित की गई जांच समिति में इन आरोपों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है, जाहिर है कि आरोप इतने गंभीर हैं कि लखनऊ की यह दशकों पुरानी प्रतिष्ठित संस्थाओं के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश तक रच डाली गई। अब यह जांच समिति दो दिन में मामले की जंाच रिपोर्ट मंडलायुक्त सौंपेगी। माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला संरक्षक व संगठन के प्रदेशीय मंत्री डॉ.आरपी मिश्र ने दो टूक कहा कि शिक्षकों को पूर्ण न्याय चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्ष निर्णय आने तक जारी रहेगा।
पढि़ए मंडलायुक्त की ओर से जारी निर्देश

