
रायपुर/बिलासपुर। शासकीय प्राथमिक व मिडिल स्कूल के गुरु जी आजकल पढ़ाई से ज्यादा बच्चों के नाम, पते, बैंक खाते का आनलाइन मिलान करने में व्यस्त हैं। इसकी वजह यह है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय का मिड डे मील की कुकिंग कास्ट इन बच्चों के खातों में सीधे ट्रांसफर की जानी है। इसलिए गुरु जी मेहनत कर रहे हैं कि राशि बच्चों के सही खातों में ही पहुंचे। बच्चों की आनलाइन सूची तैयार करने में गुरु जी की जेब हल्की हो रही है।
कोरोना काल में शिक्षण संस्थान बंद रहे और अभी भी कई पाबंदियों के साथ खुल रहे हैं। इनमें आनलाइन व ऑफ लाइन दोनों की व्यवस्था की गई और तीसरी लहर के मद्देनजर स्कूल शिक्षा विभाग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय (लगभग ३९ दिन) मिड डे मील की कुकिंग कास्ट स्कूलों में पंजीकृत विद्यार्थियों को देने का सरकारी आदेश है। यह राशि ५ रुपए से लेकर ७.४५ रुपए तक है और नकद न देकर उनके खाते में सीधे ट्रांसफ र की जाएगी।
टाइम कम,आनलाइन मिलान में व्यस्त
इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के अनुसार स्कूल के प्रधानपाठक लॉगइन पर आनलाइन बच्चों की सूचियों का तैयार कर रहे हैं। सही मिलान किया जाएगा कि सूची में दर्ज बच्चे का नाम, पिता का नाम, बैंक का नाम, खाता व आईएफसी कोड,आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर, स्कूल का नाम आदि सही है या नहीं। अगर गलत है तो आनलाइन दुरुस्त करना होगा ताकि शासन से भेजी जाने वाली राशि बिना किसी देरी के बच्चों के बैंक खातों में ट्रांसफर हो जाय।
गुरु जी काफी परेशान भी हैं
शासकीय प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में बच्चों का उक्त विवरण तैयार करने में गुरु जी काफी परेशान हैं। कई गुरु जी तो स्कूल टाइम में कक्षाएं लेते हैं और फिर घर पर अपने कप्यूटर पर बैठकर बच्चों की इन सूचियों का चेक करते हुए इन्हें त्रुटिरहित बनाते हैं जबकि अधिक संख्या वाले बच्चों के विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है, क्योंकि बच्चों की सूची भी तय समय में देनी है और स्कूल में भी उपस्थिति भी । ऐसे शिक्षक पढ़ाने व सूची तैयार करने के टाइम में तालमेल करते हुए काम कर रहे हैंं लेकिन यह सच है कि इसमें अधिक समय लगने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
५ से ७ रुपए प्रति छात्र देने पड़ रहे
आनलाइन सूची तैयार करने में असुविधा महसूस कर रहे गुुरु जी कैफे या किसी अन्य कप्यूटर सेंटर में जाकर प्रति छात्र ५ से ७ छात्र रुपए देकर आनलाइन सूची तैयार कराने के लिए मजबूर हैं। शिक्षकों को इस काम के लिए अतिरिक्त राशि भी नहीं मिली है। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है बल्कि शिक्षक अधिक बेहतर ढंग से कोरोना काल में पढ़ाई के हुए नुकसान की भरपाई करते हुए जरूरी कार्य भी कर रहे हैं। इनका कहना है कि आने वाले दिनों में इसके अच्छे परिणाम दिखाई देंगे।
शासन से मांग
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को चाहिए कि वे आनलाइन सूची तैयार करने के लिए और समय दें। साथ ही लिंक मोबाइल फोन पर खुलने की प्रक्रिया सरल बनाएं। आजकल सभी जानकरी आनलाइन मांगी जाती है, इसलिए सरकार को चाहिए कि सभी प्राथमिक व मिडिल स्कूलों को नि:शुल्क कम्प्यूटर और अंशकालिक कम्प्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था करे तो काम में सुविधा रहेगी।
सीके महिलांगे
प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रधानपाठक कल्याण संघ बिलासपुर
